रश्मिका मंदाना ने स्किन शो पर रखी अपनी राय, जान्हवी कपूर की ‘पेड्डी’ के विवाद पर भी बोलीं
रश्मिका मंदाना ने ‘कॉफी विद करण 9’ में फिल्मों में स्किन शो, अपनी व्यक्तिगत सीमाओं और व्यावसायिक फिल्मों के परिधानों पर बात की। जान्हवी कपूर की ‘पेड्डी’ में उनके किरदार को लेकर उठे विवाद के बीच विजय देवरकोंडा ने भी कलाकारों के समर्थन की जरूरत बताई।

तस्वीर में बाईं ओर रश्मिका मंदाना और दाईं ओर जान्हवी कपूर नजर आ रही हैं, जो फिल्मों में महिला कलाकारों के चित्रण और पेशेवर सीमाओं के संदर्भ में चर्चा का विषय बनी हैं।
अभिनेत्री रश्मिका मंदाना ने फिल्मों में छोटे कपड़े पहनने और शरीर दिखाने वाले दृश्यों को लेकर अपनी सहजता और सीमाओं पर खुलकर बात की है। उन्होंने यह भी बताया कि व्यावसायिक फिल्मों में काम करते समय कई बार ऐसे परिधान पहनने पड़ते हैं, जिनमें कलाकार पूरी तरह सहज महसूस नहीं करते। रश्मिका की यह टिप्पणी अभिनेत्री जान्हवी कपूर की फिल्म ‘पेड्डी’ में उनके किरदार के चित्रण को लेकर उठे विवाद के बीच सामने आई है।
22 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित मिड-डे की रिपोर्ट के अनुसार, रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा हाल ही में करण जौहर के शो ‘कॉफी विद करण 9’ में पहुंचे। सीजन के दूसरे एपिसोड में दोनों ने अपने विवाह प्रस्ताव, शादी, रिश्ते की आपसी समझ, करियर और अन्य विषयों पर बातचीत की।
कार्यक्रम के दौरान करण जौहर ने रश्मिका से जान्हवी कपूर की फिल्म ‘पेड्डी’ में उनके किरदार के चित्रण को लेकर हुई चर्चा के बारे में पूछा। उन्होंने महिला कलाकारों के जरूरत से ज्यादा यौन चित्रण और पर्दे पर उनकी प्रस्तुति से जुड़े सवाल भी उठाए। करण ने रश्मिका से कहा कि उन्होंने फिल्मों में उनके साथ ऐसा होते नहीं देखा है और पूछा कि क्या वह हिंदी, तेलुगु, तमिल या किसी अन्य भाषा की फिल्मों में काम करते समय इस बात का ध्यान रखती हैं।
इस पर रश्मिका ने कहा कि उन्होंने अपने लिए कुछ सीमाएं तय की हैं, क्योंकि कुछ चीजें ऐसी हैं जिनमें वह सहज महसूस नहीं करतीं। उन्होंने बताया कि वह समझती हैं कि कुछ किरदारों के लिए बिकिनी जैसे परिधानों की जरूरत हो सकती है, लेकिन इसके बावजूद वह शरीर को अधिक दिखाने वाले परिधानों में सहज नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह इस तरह की प्रस्तुति पसंद करने वाली व्यक्ति नहीं हैं।
रश्मिका ने आगे कहा कि व्यावसायिक फिल्मों में काम करते समय ऐसे परिधान भी पहनने पड़ सकते हैं, जिनमें कलाकार पूरी तरह सहज नहीं होते। हालांकि, वह अपने लिए कुछ सीमाएं तय करती हैं। उनके अनुसार, जिन निर्देशकों के साथ वह काम करना पसंद करती हैं, वे आमतौर पर उनकी इन सीमाओं को समझते हैं और उनका सम्मान करते हैं।
बातचीत के दौरान विजय देवरकोंडा ने कहा कि इस तरह के मुद्दों पर बातचीत करना कलाकारों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इस पर रश्मिका ने सहमति जताई। करण जौहर ने भी कहा कि फिल्म उद्योग से बाहर से आने वाली जान्हवी कपूर को इस स्थिति में असहजता और असुरक्षा महसूस हुई होगी।
रश्मिका ने इस विषय पर आगे कहा कि कलाकारों के लिए ऐसा माहौल बनाना जरूरी है, जिसमें वे अपनी चिंताओं और सवालों को आसानी से सामने रख सकें। उन्होंने स्वीकार किया कि उनके लिए भी कई बार अपनी बात रखना मुश्किल होता है।
उन्होंने बताया कि कभी-कभी वह किसी दृश्य या काम को करने से इनकार करना चाहती हैं, लेकिन इसके लिए निर्माताओं के साथ कई बार बातचीत करनी पड़ती है। रश्मिका के अनुसार, वह अपनी बात रखने से पहले यह भी पूछती हैं कि क्या वह अपनी इच्छा स्पष्ट रूप से बता सकती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मौकों पर उन्हें यह आश्वासन मिलता है कि उन्हें अपनी बात कहनी चाहिए।
विजय देवरकोंडा ने भी कलाकारों के लिए सहयोग और समर्थन की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कलाकारों को यह भरोसा मिलना चाहिए कि वे किसी चीज के लिए मना कर सकते हैं और अपनी सीमाएं स्पष्ट कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि कभी-कभी कलाकारों पर यह कहकर दबाव बनाया जाता है कि वे अभिनेता हैं, उन्होंने फिल्म के लिए सहमति दी है और ऐसे दृश्य करना उनके काम का हिस्सा है।
विजय के अनुसार, इस तरह की बातें कलाकारों को यह सोचने पर मजबूर कर सकती हैं कि कहीं वे अपना काम ठीक से तो नहीं कर रहे या गैर-पेशेवर तो नहीं माने जाएंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कलाकारों को अपनी असहमति व्यक्त करने के लिए समर्थन मिलना जरूरी है।
जान्हवी कपूर की फिल्म ‘पेड्डी’ को लेकर विवाद सिनेमाघरों में रिलीज होने के बाद सोशल मीडिया पर शुरू हुआ था। फिल्म में राम चरण मुख्य भूमिका में हैं। कुछ दृश्यों को लेकर दर्शकों ने आपत्ति जताई थी। उनका आरोप था कि राम चरण के किरदार के माध्यम से जान्हवी कपूर के किरदार को वस्तु की तरह प्रस्तुत किया गया है। दर्शकों ने यह भी दावा किया कि उनके शारीरिक आकर्षण को लेकर अपमानजनक टिप्पणियां की गई हैं।
इसी विवाद के संदर्भ में रश्मिका मंदाना ने पर्दे पर महिला कलाकारों के चित्रण, अपनी व्यक्तिगत सीमाओं और फिल्म निर्माण के दौरान अपनी बात रखने में आने वाली कठिनाइयों पर चर्चा की। उनकी बातचीत ने इस मुद्दे को फिर सामने ला दिया कि फिल्मों में कलाकारों की सहजता, सहमति और पेशेवर सीमाओं का सम्मान किस तरह सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

