20-25 ऑडिशन में रिजेक्ट, कहा गया हीरोइन जैसी नहीं दिखतीं, फिर भी स्टार बनीं रश्मिका मंदाना
रश्मिका मंदाना ने करियर की शुरुआत में 20-25 ऑडिशन में असफलता झेली और कई बार उन्हें कहा गया कि वह हीरोइन जैसी नहीं दिखतीं। विराजपेट से पैन-इंडिया स्टार बनने तक के उनके संघर्ष, पारिवारिक चुनौतियों, फिल्मों और सफलता की पूरी कहानी पढ़ें।

तस्वीर में अभिनेत्री रश्मिका मंदाना कैमरे की ओर देखते हुए पोज दे रही हैं।
आज रश्मिका मंदाना भारतीय सिनेमा की सबसे अधिक मांग वाली अभिनेत्रियों में शामिल हैं। Pushpa, Animal और Chhaava जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों ने उन्हें मजबूत पैन-इंडिया पहचान दिलाई है। हालांकि, सफलता तक पहुंचने का उनका सफर आसान नहीं रहा। प्रमुख अभिनेत्री बनने से पहले उन्हें लगातार ऑडिशन में असफलता का सामना करना पड़ा और कई बार यह तक कहा गया कि उनका चेहरा किसी हीरोइन जैसा नहीं है।
रश्मिका ने कई इंटरव्यू में बताया है कि करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने करीब 20 से 25 ऑडिशन दिए थे। इनमें से अधिकांश में उन्हें निराशा हाथ लगी। कास्टिंग टीमों ने उन्हें बार-बार अस्वीकार किया और कई बार सीधे कहा कि वह एक अभिनेत्री की पारंपरिक छवि में फिट नहीं बैठतीं। इन टिप्पणियों का उन पर गहरा भावनात्मक असर पड़ा और असफल ऑडिशन के बाद वह कई बार रोते हुए घर लौटीं।
5 अप्रैल 1996 को कर्नाटक के कोडागु जिले के विराजपेट में जन्मीं रश्मिका मंदाना कोडवा परिवार से आती हैं। उनके पिता मदन मंदाना कॉफी एस्टेट क्षेत्र से जुड़े एक व्यवसायी हैं, जबकि उनकी मां सुमन मंदाना पूरे करियर के दौरान उनका मजबूत सहारा रही हैं। रश्मिका ने कई बार अपने बचपन के दौरान परिवार की आर्थिक परेशानियों का भी जिक्र किया है।
उन्होंने इंटरव्यू में बताया कि एक समय ऐसा भी था जब उनके माता-पिता को घर का खर्च चलाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। इन्हीं अनुभवों ने उनके जीवन के प्रति नजरिये को आकार दिया और सफल करियर बनाने के लिए कड़ी मेहनत करने की प्रेरणा दी। उनका बचपन काफी हद तक बोर्डिंग स्कूल में बीता, जहां सांस्कृतिक गतिविधियों, विशेष रूप से नृत्य, में उनकी रुचि विकसित हुई।
स्कूल के कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी और भरतनाट्यम का प्रशिक्षण लेने के बावजूद अभिनय उनके शुरुआती करियर की योजना का हिस्सा नहीं था। उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की और अंग्रेजी साहित्य, मनोविज्ञान तथा पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की। कॉलेज के दौरान वर्ष 2014 में उन्होंने Clean & Clear Times Fresh Face प्रतियोगिता जीती, जिसके बाद उनके लिए मॉडलिंग के अवसर खुलने लगे।
इसके बावजूद वह फिल्मों में आने को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं थीं। आसपास के लोगों के प्रोत्साहन के बाद ही उन्होंने अभिनय के लिए ऑडिशन देना शुरू किया। इसके बाद उनके जीवन में लगातार अस्वीकृतियों का एक कठिन दौर शुरू हुआ।
रश्मिका ने बताया है कि उन वर्षों में वह भावनात्मक रूप से काफी संघर्ष कर रही थीं। एक फिल्म प्रोजेक्ट, जिसके लिए उनका चयन हो चुका था, कई महीनों की तैयारी और प्रशिक्षण के बावजूद शुरू ही नहीं हो सका। इस झटके ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या फिल्म उद्योग में करियर बनाना संभव है। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार नए अवसर तलाशती रहीं।
उनके करियर का निर्णायक मोड़ वर्ष 2016 में रिलीज हुई कन्नड़ फिल्म Kirik Party से आया। ऋषभ शेट्टी के निर्देशन में बनी यह फिल्म बड़ी सफलता साबित हुई और रश्मिका को पूरे कर्नाटक में पहचान दिलाई। उनके अभिनय को सकारात्मक समीक्षाएं मिलीं और यहीं से उनके करियर की दिशा बदल गई।
Kirik Party की सफलता के बाद उन्होंने Anjani Putra और Chamak जैसी सफल कन्नड़ फिल्मों में काम किया। इसके बाद उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ी और उन्हें तेलुगु सिनेमा में अवसर मिलने लगे।
उनकी तेलुगु डेब्यू फिल्म Chalo सफल रही, जबकि विजय देवरकोंडा के साथ Geetha Govindam ने उन्हें दक्षिण भारतीय सिनेमा की सबसे चर्चित युवा अभिनेत्रियों में शामिल कर दिया। इसके बाद उन्होंने Dear Comrade, Sarileru Neekevvaru, Bheeshma और Pushpa: The Rise जैसी फिल्मों के जरिए अपनी मजबूत पहचान बनाई।
Pushpa में श्रीवल्ली का किरदार उनके करियर का बड़ा मोड़ साबित हुआ। फिल्म की देशव्यापी सफलता ने उनकी लोकप्रियता को क्षेत्रीय सिनेमा से आगे बढ़ाकर पूरे भारत तक पहुंचाया और हिंदी भाषी दर्शकों के बीच भी उन्हें व्यापक पहचान दिलाई।
बॉलीवुड में उनकी शुरुआत अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म Goodbye से हुई, लेकिन रणबीर कपूर के साथ Animal उनके करियर का एक और बड़ा पड़ाव साबित हुई। इस फिल्म ने हिंदी फिल्म उद्योग में उनकी मौजूदगी और पहचान को और मजबूत किया।
सफलता के बावजूद रश्मिका मंदाना को वर्षों से आलोचनाओं और सोशल मीडिया ट्रोलिंग का भी सामना करना पड़ा है। व्यक्तिगत रिश्तों से जुड़े विवादों से लेकर इंटरव्यू में दिए गए बयानों पर हुई बहस तक, वह कई बार ऑनलाइन चर्चाओं के केंद्र में रहीं। इन परिस्थितियों पर अभिनेत्री ने हमेशा दयालुता का महत्व बताते हुए नकारात्मकता के बजाय अपने काम पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही है।
रश्मिका अक्सर कहती हैं कि शुरुआती असफलताओं ने ही उनके व्यक्तित्व और करियर को आकार दिया। जिन लगातार अस्वीकृतियों ने कभी उन्हें निराश किया था, वही आगे चलकर उनके लिए धैर्य, संघर्ष और दृढ़ता का सबसे बड़ा सबक बन गईं।
एक समय जब उन्हें कहा गया था कि वह अभिनेत्री जैसी नहीं दिखतीं, वहीं आज वह भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी सितारों में गिनी जाती हैं। रश्मिका मंदाना का सफर इस बात का उदाहरण है कि लगातार प्रयास और दृढ़ संकल्प सबसे कठिन चुनौतियों पर भी विजय दिला सकते हैं।

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