नमित मल्होत्रा की ‘रामायणम्’ ने अपनी एक छोटी सी झलक से ही व्यापक उत्साह पैदा कर दिया है, लेकिन इसकी भव्यता के पीछे छिपी एक अहम डिटेल अब सामने आई है। ट्रेलर में दिखाया गया विशाल ओपनिंग बैटल सीक्वेंस केवल दृश्यात्मक प्रभाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महाकाव्य के एक गहरे और अपेक्षाकृत कम चर्चित अध्याय पर आधारित है।

नितेश तिवारी के निर्देशन में बनी और नमित मल्होत्रा के प्राइम फोकस स्टूडियोज, ग्लोबल VFX कंपनी DNEG और मॉन्स्टर माइंड क्रिएशंस के सहयोग से तैयार इस फिल्म का पैमाना अभूतपूर्व बताया जा रहा है। इसका ओपनिंग सीक्वेंस फिल्म के सबसे महत्वपूर्ण और प्रभावशाली हिस्सों में शामिल हो सकता है। यह सीक्वेंस भगवान राम की मुख्य कथा से पहले की घटनाओं को सामने लाता है और रावण के उदय को स्थापित करता है।

कहानी के अनुसार, जब रावण ने लंका पर कब्जा किया, तो उसने अपने सौतेले भाई कुबेर को सत्ता से बेदखल कर दिया, जो उस स्वर्ण नगरी के वास्तविक शासक थे। इसके बाद भी रावण की महत्वाकांक्षा समाप्त नहीं हुई। विश्व पर प्रभुत्व स्थापित करने की लालसा में उसने कैलाश पर्वत के समीप स्थित अलकापुरी तक कुबेर का पीछा किया।

यह घटनाक्रम केवल एक पीछा नहीं था, बल्कि रावण की शक्ति और वर्चस्व का स्पष्ट संदेश था। वह अपने सामने आने वाली हर चुनौती को समाप्त कर अपनी बादशाहत स्थापित करना चाहता था। कैलाश पर्वत की दिव्य पृष्ठभूमि में स्थापित यह युद्ध, जिसमें दैवीय शक्तियों का टकराव दिखाया गया है, फिल्म की शुरुआत को भव्य और प्रभावशाली बनाता है।

यह सीक्वेंस रावण के चरित्र को नई गहराई देता है। वह केवल राम कथा का प्रतिपक्षी नहीं रह जाता, बल्कि एक जटिल और महत्वाकांक्षी व्यक्तित्व के रूप में उभरता है, जिसकी प्रेरणा उसकी असीम महत्वाकांक्षा और विजय की इच्छा है। इस प्रस्तुति के माध्यम से फिल्म प्रारंभ से ही एक सशक्त और बहुआयामी कथा स्थापित करने का प्रयास करती है।

‘रामायणम्’ को एक वैश्विक सिनेमाई परियोजना के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, जिसमें ऐसी अनसुनी और प्रभावशाली कहानियों को शामिल किया गया है जो इस प्राचीन महाकाव्य को नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करती हैं। नितेश तिवारी के निर्देशन में बनी और नमित मल्होत्रा के प्राइम फोकस स्टूडियोज द्वारा 8 बार के ऑस्कर विजेता DNEG और यश के मॉन्स्टर माइंड क्रिएशंस के साथ निर्मित यह दो भागों में बनने वाली फिल्म विश्वभर में IMAX में रिलीज होगी। इसका पहला भाग दिवाली 2026 में और दूसरा भाग दिवाली 2027 में रिलीज किया जाएगा। यह परियोजना भारतीय पौराणिक कथाओं को वैश्विक स्तर पर नए आयाम देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

Pratahkal Bureau

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