फिल्म निर्माता राम गोपाल वर्मा ने फिल्म सेंसरशिप को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक लंबा नोट साझा करते हुए भारत में लागू सेंसरशिप व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जब एक वयस्क देश का नेता चुनने के लिए मतदान कर सकता है, परिवार चला सकता है और व्यवसाय संचालित कर सकता है, तो उसे यह तय करने का अधिकार क्यों नहीं होना चाहिए कि वह स्क्रीन पर क्या देखना चाहता है।

अपने पोस्ट में वर्मा ने लिखा, “अगर कोई वयस्क देश के नेता को चुनने के लिए वोट देने, परिवार पालने और कारोबार चलाने के लिए पर्याप्त परिपक्व है, तो आखिर वह खुद यह फैसला क्यों नहीं कर सकता कि उसे क्या देखना है… एक 18 वर्षीय व्यक्ति देश का नेता चुन सकता है, लेकिन उसे यह तय करने के लिए किसी रैंडम कमेटी सदस्य की जरूरत पड़ती है कि कोई गाली सुनना या कोई दृश्य देखना उसके लिए भ्रष्टकारी है या नहीं।” उन्होंने फिल्म सेंसरशिप को “दर्शकों का अपमान” बताया और यह भी सवाल उठाया कि फिल्मों को प्रमाणित करने वाले लोगों की योग्यता क्या है। उन्होंने कहा कि फिल्म निर्माण एक निर्देशक के नजरिए से प्रस्तुत नाटकीय कहानी कहने की कला है और उससे सहमत या असहमत होना दर्शकों पर छोड़ दिया जाना चाहिए।

राम गोपाल वर्मा ने करी बार्कर की फिल्म Obsession का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि लगभग 10 लाख अमेरिकी डॉलर के बताए गए बजट में बनी इस फिल्म ने दुनिया भर में 300 मिलियन डॉलर से अधिक की कमाई की है। यह फिल्म अमेरिका में रिलीज होने के लगभग दो सप्ताह बाद 29 मई को भारत में रिलीज हुई, लेकिन यहां इसे 38 सेकंड के फुटेज हटाने के बाद प्रदर्शित किया गया। इसके बावजूद फिल्म ने भारत में 10 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार किया। वर्मा ने कहा कि यह कटौती निरर्थक थी क्योंकि बिना कट वाला संस्करण VPN के जरिए आसानी से देखा जा सकता है। उनके अनुसार सेंसरशिप किसी सामग्री को समाप्त नहीं करती, बल्कि उसे ऑनलाइन देखने की जिज्ञासा और बढ़ा देती है।

उन्होंने लिखा, “OBSESSION के हेड-बैंगिंग सीन का उदाहरण ही देख लीजिए। सेंसर बोर्ड द्वारा उसे काटे जाने के बाद उस दृश्य को इंस्टाग्राम रील्स पर उन लोगों से 10 गुना ज्यादा लोगों ने देखा होगा, जिन्होंने वास्तव में फिल्म सिनेमाघरों में देखी।”

राम गोपाल वर्मा की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब हाल के दिनों में केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के कई फैसले चर्चा में रहे हैं। विजय की Jana Nayagan को 12 कट्स के साथ ‘A’ प्रमाणपत्र दिया गया, जबकि अक्षय कुमार की Welcome To The Jungle में लगभग 18 बदलाव करने के लिए कहा गया। इनमें “Gorkha Regiment” शब्द को अधिक सामान्य संवाद से बदलने और पूरी फिल्म में “General” शीर्षक को बदलने के निर्देश भी शामिल थे। वहीं, आदित्य धर की Dhurandhar The Revenge (2026) को 20 से अधिक कट्स के बाद प्रमाणन मिला, जबकि Satluj में कथित तौर पर 127 कट्स लगाए गए।

वर्मा ने कहा कि CBFC का रवैया ऐसा है जैसे कोई नौकरशाही व्यवस्था उन वयस्कों की अभिभावक बनने की कोशिश कर रही हो जिन्हें किसी अभिभावक की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने फिल्म निर्माताओं से भी अपील की कि वे उनके अनुसार एजेंडा-प्रेरित उस व्यवस्था के आगे झुकना बंद करें, जो न कला को समझती है और न ही उसके दर्शकों को। उन्होंने यह भी कहा कि सीमाहीन डिजिटल पहुंच के इस दौर में इस तरह की गेटकीपिंग उद्योग के हित में काम करने के बजाय उसके खिलाफ जाती है।

Pratahkal Newsroom

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