कौन हैं रजनीकांत? बस कंडक्टर से ग्लोबल सुपरस्टार बनने की वो अनसुनी कहानी जिसने पूरी दुनिया को दीवाना बना दिया
बस कंडक्टर से सुपरस्टार बने रजनीकांत के 50 साल के फिल्मी करियर, ब्लॉकबस्टर फिल्मों और उनके सादगीपूर्ण जीवन का विस्तृत विवरण।

भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता रजनीकांत अपनी फिल्म 'जेलर' की सफलता के बाद एक कार्यक्रम के दौरान मुस्कुराते हुए।
आज जब भी सिनेमाई पर्दे पर बिजली कड़कती है या कोई अभिनेता अपनी जादुई स्टाइल से सिगरेट उछालता है, तो एक ही नाम जेहन में आता है और वो है रजनीकांत। थलाइवा के नाम से मशहूर शिवाजी राव गायकवाड़ का जादू आज भी वैसा ही बरकरार है जैसा दशकों पहले था। बेंगलुरु की सड़कों पर बस कंडक्टर के तौर पर टिकट काटने वाले एक साधारण युवक का दुनिया के सबसे प्रभावशाली अभिनेताओं की सूची में शामिल होना किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। हाल ही में 'जेलर' की ऐतिहासिक सफलता और फिर 'कुली' जैसी फिल्मों के साथ बॉक्स ऑफिस पर पांच सौ करोड़ का आंकड़ा पार कर उन्होंने साबित कर दिया है कि उम्र महज एक नंबर है और असली किंग आज भी वही हैं।
रजनीकांत का सफर साल उन्नीस सौ पचहत्तर में फिल्म 'अपूर्वा रागांगल' से शुरू हुआ था। शुरुआत में उन्होंने पर्दे पर विलेन बनकर लोगों के दिलों में खौफ पैदा किया, लेकिन जल्द ही उनकी मेहनत और यूनिक मैनरिज्म ने उन्हें हीरो बना दिया। अस्सी के दशक में 'बिल्ला' की कामयाबी ने उन्हें वो एक्शन हीरो की इमेज दी, जो आगे चलकर उनकी पहचान बन गई। उन्होंने न केवल तमिल सिनेमा बल्कि हिंदी, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम फिल्मों में भी अपनी छाप छोड़ी। अमिताभ बच्चन को अपना आदर्श मानने वाले रजनीकांत ने 'अंधा कानून' से बॉलीवुड में डेब्यू किया और 'गिरफ्तार', 'हम' और 'चालबाज' जैसी सुपरहिट फिल्मों के जरिए उत्तर भारत के दर्शकों को भी अपना मुरीद बना लिया।
नब्बे का दशक रजनीकांत के लिए वह दौर था जब वह एक अभिनेता से ऊपर उठकर भगवान की तरह पूजे जाने लगे। 'बाशा', 'मुथु' और 'पदयप्पा' जैसी फिल्मों ने कमाई के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। दिलचस्प बात यह है कि उनकी फिल्म 'मुथु' ने जापान में भी ऐसी धूम मचाई कि वहां के लोग भी उनके दीवाने हो गए। उनके डायलॉग बोलने का अंदाज और उनकी स्क्रीन प्रेजेंस ऐसी होती है कि सिनेमाघरों में तालियों की गड़गड़ाहट थमने का नाम नहीं लेती। उनकी सादगी का आलम यह है कि करोड़ों की कमाई और पदम भूषण, पदम विभूषण तथा दादा साहब फाल्के जैसे सम्मान पाने के बाद भी वह निजी जिंदगी में बेहद जमीन से जुड़े इंसान बने हुए हैं।
जैसे-जैसे वक्त बदला, रजनीकांत ने भी खुद को बदला। उन्होंने 'शिवाजी: द बॉस' और 'एंथिरन' (रोबोट) जैसी फिल्मों के जरिए भारतीय सिनेमा को सौ करोड़ और पांच सौ करोड़ क्लब का रास्ता दिखाया। वैज्ञानिक वसीकरण और चिट्टी रोबोट के किरदार में उन्होंने तकनीक और अभिनय का जो मेल दिखाया, उसने हॉलीवुड तक को हैरान कर दिया। 'कबाली', 'काला' और 'टू पॉइंट जीरो' जैसी फिल्मों ने ग्लोबल स्तर पर उनकी धाक जमाई। आज वह भारतीय सिनेमा के इतिहास में अकेले ऐसे अभिनेता हैं जिनकी तीन फिल्मों ने पांच सौ करोड़ से अधिक का व्यापार किया है, जो उनकी अटूट लोकप्रियता का सबसे बड़ा प्रमाण है।
रजनीकांत केवल एक कलाकार नहीं बल्कि एक विचारधारा बन चुके हैं। उनकी आध्यात्मिक यात्रा, हिमालय से उनका लगाव और उनकी परोपकारी प्रवृत्तियां उन्हें अन्य सितारों से अलग बनाती हैं। उन्होंने कई बार अपनी कमाई का हिस्सा संकट में फंसे लोगों और फिल्म वितरकों को वापस किया है, जो फिल्म इंडस्ट्री में बहुत कम देखने को मिलता है। चाहे वह बस कंडक्टर का दौर रहा हो या आज का सुपरस्टारडम, उन्होंने अपनी मेहनत और ईमानदारी से हर बाधा को पार किया है। यही वजह है कि आज बच्चा हो या बुजुर्ग, हर कोई उनकी एक झलक पाने के लिए बेताब रहता है।
उनकी इस लंबी और शानदार पारी का सम्मान करते हुए भारत सरकार और अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सवों ने उन्हें सत्यजीत रे लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड जैसे सर्वोच्च सम्मानों से नवाजा है। आज जब वह 'जेलर टू' जैसी अपनी अगली बड़ी फिल्मों की तैयारी कर रहे हैं, तो पूरा देश उनकी अगली जादुई परफॉरमेंस का इंतजार कर रहा है। रजनीकांत की कहानी हमें सिखाती है कि अगर आपके भीतर कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो एक साधारण इंसान भी असाधारण ऊंचाइयों को छू सकता है।

Pratahkal Newsroom
प्रातःकाल न्यूज़-रूम, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, समयबद्ध और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा न्यूज़-रूम राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।
