Rajesh Khanna Birth Anniversary: शोहरत की बुलंदी से नाकामी के साए तक; जब 'काका' ने देखा करियर का सबसे कठिन दौर
Rajesh Khanna Birth Anniversary पर जानिए बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार की जिंदगी का वो दौर, जब 17 हिट फिल्मों के बाद उन्हें लगातार 7 फ्लॉप फिल्मों का सामना करना पड़ा। शोहरत के शिखर से नाकामी तक का यह सफर राजेश खन्ना के करियर का सबसे भावनात्मक अध्याय माना जाता है।

Rajesh Khanna's Birth Anniversary
Rajesh Khanna birth anniversary story Hindi : बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना की जिंदगी सिर्फ कामयाबी की मिसाल नहीं रही, बल्कि इसमें ऐसा दौर भी आया जिसने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया। आज उनकी 83वीं जयंती पर राजेश खन्ना के करियर के उस अध्याय को याद किया जा रहा है, जब अपार शोहरत के बाद उन्हें लगातार सात फ्लॉप फिल्मों का सामना करना पड़ा और यह नाकामी उनके लिए बेहद पीड़ादायक साबित हुई।
यह अक्सर कहा जाता है कि राजेश खन्ना ने जो स्टारडम देखा, वैसा न उनसे पहले किसी अभिनेता को मिला और न ही उनके बाद कोई कलाकार उस ऊंचाई तक पहुंच सका। ‘काका’ के नाम से मशहूर राजेश खन्ना को बॉलीवुड का पहला सुपरस्टार कहा गया, क्योंकि उन्होंने महज कुछ वर्षों में ही फिल्म इंडस्ट्री में ऐसा मुकाम हासिल कर लिया था, जिसकी मिसाल आज भी दी जाती है।
राजेश खन्ना का जन्म 29 दिसंबर 1942 को पंजाब के अमृतसर में हुआ था। उनका असली नाम जतिन खन्ना था, जिसे बाद में उन्होंने बदलकर राजेश खन्ना कर लिया। साल 1966 में बॉलीवुड में कदम रखने वाले राजेश खन्ना ने बेहद कम समय में दर्शकों के दिलों पर राज कर लिया। महज 28 वर्ष की उम्र में वह सुपरस्टार बन गए। 1969 से 1972 के बीच उन्होंने लगातार 17 हिट फिल्में दीं, जिसने उन्हें इंडस्ट्री का सबसे बड़ा नाम बना दिया।
हालांकि, यह सुनहरा दौर ज्यादा लंबे समय तक कायम नहीं रह सका। साल 1975 तक राजेश खन्ना अपने करियर के शिखर पर थे, लेकिन इसके बाद उनके करियर में गिरावट शुरू हो गई। इस मुश्किल दौर की शुरुआत साल 1976 में रिलीज हुई फिल्म ‘महबूबा’ से हुई, जो बॉक्स ऑफिस पर असफल रही। इसके बाद ‘बंडल बाज’, ‘अनुरोध’, ‘त्याग’, ‘छैला बाबू’, ‘कर्म’ और ‘चलता पुर्जा’ जैसी फिल्में भी लगातार फ्लॉप साबित हुईं। एक के बाद एक सात फिल्मों की नाकामी ने राजेश खन्ना को मानसिक रूप से बुरी तरह तोड़ दिया।
लगातार मिल रही असफलताओं के बाद वह कभी बड़े पर्दे पर उसी तरह की वापसी नहीं कर सके, जैसी उनसे उम्मीद की जा रही थी। हालांकि बाद के वर्षों में उन्हें कुछ फिल्मों में सफलता जरूर मिली, लेकिन शुरुआती दौर जैसी चमक और स्टारडम फिर कभी लौटकर नहीं आया।
अपने करियर में राजेश खन्ना ने ‘आनंद’, ‘हाथी मेरे साथी’, ‘कटी पतंग’, ‘आराधना’, ‘अमर प्रेम’, ‘नमक हराम’, ‘सफर’, ‘दो रास्ते’ और ‘स्वर्ग’ जैसी कई कालजयी फिल्में दीं, जो आज भी दर्शकों के दिलों में बसी हुई हैं। 18 जुलाई 2012 को राजेश खन्ना का निधन हो गया था। उन्होंने 69 वर्ष की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कहा, लेकिन उनका नाम और उनकी विरासत आज भी हिंदी सिनेमा के इतिहास में अमर है।
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Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
