कौन हैं पुरी जगन्नाध? साउथ सिनेमा का वो डायरेक्टर जिसने एक्शन का खेल बदल दिया
पोकिरी और आईस्मार्ट शंकर जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों के निर्देशक पुरी जगन्नाथ के करियर, संघर्ष और उनके ब्रांड बनने की पूरी कहानी।

अपनी फिल्मों के जरिए मास एंटरटेनमेंट की नई परिभाषा लिखने वाले निर्देशक पुरी जगन्नाथ एक इंटरव्यू सत्र के दौरान।
आजकल जब भी साउथ सिनेमा के सबसे बेबाक और मास एंटरटेनमेंट देने वाले डायरेक्टर्स की बात होती है, तो पुरी जगन्नाध का नाम सबसे पहले सामने आता है। उनकी फिल्मों का स्टाइल, हीरो की एंट्री, दमदार डायलॉग्स और हाई-वोल्टेज एक्शन आज भी फैंस के बीच अलग ही क्रेज रखता है। हाल ही में उनकी फिल्में और आने वाले प्रोजेक्ट्स फिर से चर्चा में हैं, जिसकी वजह से सोशल मीडिया पर लोग जानना चाहते हैं कि आखिर पुरी जगन्नाध कौन हैं और उन्होंने इंडस्ट्री में ऐसा क्या कर दिखाया कि उनका नाम एक ब्रांड बन गया।
28 सितंबर 1966 को आंध्र प्रदेश के पिथापुरम में जन्मे पुरी जगन्नाध का असली नाम पेटला “पुरी” जगन्नाध है। छोटे शहर से निकलकर फिल्म इंडस्ट्री तक पहुंचना उनके लिए बिल्कुल आसान नहीं था। उन्होंने अपनी पढ़ाई आंध्र प्रदेश में पूरी की और फिर फिल्मों के सपने लेकर इंडस्ट्री में कदम रखा। शुरुआत में उन्होंने मशहूर फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा के साथ असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम किया। यहीं से उन्होंने सीखा कि बड़े पर्दे पर एक्शन और इमोशन को किस तरह पेश किया जाता है। साल 2000 में पवन कल्याण स्टारर ‘बद्री’ से उन्होंने डायरेक्शन में डेेब्यू किया और पहली ही फिल्म से बता दिया कि उनका अंदाज बाकी डायरेक्टर्स से अलग है।
पुरी जगन्नाध की फिल्मों की सबसे बड़ी खासियत उनका रॉ और स्टाइलिश प्रेजेंटेशन रहा है। ‘इटलू श्रावणी सुब्रमण्यम’, ‘इडियट’, ‘अम्मा नन्ना ओ तमिला अम्मायी’, ‘सिवमणि’ और ‘देशमुदुरु’ जैसी फिल्मों ने उन्हें मास ऑडियंस का फेवरेट बना दिया। लेकिन असली धमाका साल 2006 में आया, जब उन्होंने महेश बाबू के साथ ‘पोकिरी’ बनाई। इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया और बाद में इसे कई भाषाओं में रीमेक किया गया। ‘पोकिरी’ सिर्फ एक फिल्म नहीं थी, बल्कि उसने पूरे भारतीय सिनेमा में एक्शन फिल्मों का ट्रेंड बदल दिया। इसी फिल्म ने पुरी को पूरे देश में पहचान दिलाई और उन्हें स्टार डायरेक्टर बना दिया।
पुरी सिर्फ तेलुगु इंडस्ट्री तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने कन्नड़ सिनेमा में पुणीत राजकुमार को ‘अप्पू’ जैसी ब्लॉकबस्टर देकर लॉन्च किया, वहीं हिंदी में ‘शर्त: द चैलेंज’ और अमिताभ बच्चन के साथ ‘बुड्ढा... होगा तेरा बाप’ जैसी फिल्में बनाईं। दिलचस्प बात ये है कि ‘बुड्ढा... होगा तेरा बाप’ को ऑस्कर लाइब्रेरी में भी जगह मिली थी। उनकी फिल्मों में हीरो हमेशा बड़े स्वैग और एटीट्यूड के साथ नजर आता है, और यही वजह है कि उनकी स्टोरीटेलिंग युवाओं को बेहद पसंद आती है। ‘बिजनेसमैन’, ‘टेम्पर’, ‘हार्ट अटैक’ और ‘आईस्मार्ट शंकर’ जैसी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार कमाई की और उनका क्रेज फिर से बढ़ा दिया।
हालांकि हर फिल्म सुपरहिट नहीं रही। विजय देवरकोंडा और अनन्या पांडे स्टारर ‘लाइगर’ से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुई। इसके बावजूद पुरी जगन्नाध ने हार नहीं मानी और लगातार नए प्रोजेक्ट्स पर काम करते रहे। उनकी आने वाली फिल्म ‘स्लमडॉग: 33 टेम्पल रोड’ को लेकर भी फैंस में जबरदस्त उत्साह है। यही नहीं, वह सिर्फ डायरेक्टर ही नहीं बल्कि प्रोड्यूसर, स्क्रीनराइटर और कभी-कभी एक्टर के तौर पर भी नजर आते रहे हैं। उन्होंने ‘पुरी जगन्नाध टूरिंग टॉकीज’, ‘वैष्णो अकैडमी’ और ‘पुरी कनेक्ट्स’ जैसी प्रोडक्शन कंपनियां भी बनाई हैं।
पुरी जगन्नाध की सबसे बड़ी ताकत यह है कि वह आम आदमी के गुस्से, संघर्ष और सपनों को बड़े पर्दे पर बेहद स्टाइलिश तरीके से दिखाते हैं। उनके डायलॉग्स आज भी फैंस की जुबान पर रहते हैं और उनकी फिल्मों के हीरो युवाओं के लिए एटीट्यूड आइकन बन जाते हैं। यही वजह है कि इतने सालों बाद भी पुरी का नाम साउथ सिनेमा के सबसे प्रभावशाली फिल्ममेकर्स में गिना जाता है। उनका सफर इस बात का सबूत है कि अगर विजन बड़ा हो, तो छोटे शहर से निकलकर भी पूरे भारतीय सिनेमा पर राज किया जा सकता है।

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