कान्स लायंस (Cannes Lions) सम्मेलन के दौरान वैश्विक स्तर पर ख्याति प्राप्त अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा जोनास ने मनोरंजन उद्योग में आए क्रांतिकारी बदलावों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अब विचार और रचनात्मकता, पारंपरिक बाधाओं से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं। प्रियंका ने अपने करियर के शुरुआती संघर्षों को याद करते हुए साझा किया कि कैसे एक गैर-फिल्मी पृष्ठभूमि से आने वाली कलाकार के लिए उस समय का उद्योग अत्यंत दुर्गम था, लेकिन आज का समय कलाकारों के लिए सुनहरा अवसर लेकर आया है।

उन्होंने 'ऑब्सेशन' (Obsession) जैसी कम बजट की हॉरर फिल्म की सफलता का उदाहरण देते हुए कहा कि आज के दौर में यदि आपके पास एक दमदार विचार है, तो उसे साझा करने के लिए किसी बड़े मंच की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सोशल मीडिया और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स ने मनोरंजन की दुनिया को लोकतांत्रिक बना दिया है, जहाँ 'विचार ही आपकी मुद्रा हैं'। प्रियंका ने उल्लेख किया कि उनके द्वारा स्थापित प्रोडक्शन हाउस का मुख्य उद्देश्य भी यही है कि वे उन उभरते हुए फिल्म निर्माताओं को मंच प्रदान कर सकें, जिनके पास अद्भुत विचार तो हैं, लेकिन वे उन तक पहुँचने में सक्षम नहीं हैं।

प्रियंका ने इस दौरान भारतीय सिनेमा के वैश्विक प्रभाव पर भी चर्चा की। उन्होंने उन शुरुआती दिनों को याद किया जब उन्हें यह कहा जाता था कि भारतीय फिल्में कभी हॉलीवुड की तरह वैश्विक स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएंगी, क्योंकि वे अंग्रेजी में नहीं हैं। हालाँकि, स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स और महामारी के दौरान दर्शकों की बदली पसंद ने इन भाषाई बाधाओं को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। उन्होंने 'स्क्वीड गेम' (Squid Game) और 'पैरासाइट' (Parasite) जैसी परियोजनाओं का हवाला देते हुए कहा कि अब गैर-अंग्रेजी सामग्री का प्रभाव किसी भी मायने में छोटा नहीं है। उन्होंने गर्व के साथ अपनी आगामी परियोजना 'वाराणसी' का जिक्र किया, जिसे तेलुगु में फिल्माया गया है और जिसे लगभग 200 भाषाओं में डब किया जा रहा है।

अपने व्यक्तिगत जीवन और पेशेवर प्राथमिकताओं पर बात करते हुए प्रियंका ने स्पष्ट किया कि मातृत्व के बाद उनके दृष्टिकोण में व्यापक परिवर्तन आया है। अब वे अपने करियर के चुनाव को लेकर बेहद चुनिंदा हो गई हैं। वे अब एक वर्ष में पांच फिल्में करने के बजाय गुणवत्तापूर्ण काम को प्राथमिकता देती हैं। अंत में, प्रियंका का यह कथन कि वे अपने अंग्रेजी-भाषा के करियर में भी उसी तरह की विविधतापूर्ण भूमिकाएं तलाश रही हैं, जैसी उन्होंने भारत में निभाई हैं, उनके भविष्य के विजन को स्पष्ट करता है। उनका यह सफर न केवल व्यक्तिगत विकास की कहानी है, बल्कि यह उस बदलते वैश्विक मनोरंजन उद्योग का प्रतिबिंब है, जहाँ अब केवल प्रतिभा ही सफलता का एकमात्र मानदंड है।

Pratahkal Newsroom

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