कौन हैं प्रियदर्शन? कॉमेडी, क्लासिक और कल्ट फिल्मों के असली बादशाह
मलयालम सिनेमा से बॉलीवुड तक अपनी पहचान बनाने वाले प्रियदर्शन अब अक्षय कुमार के साथ 'भूत बंगला' और 'हेरा फेरी 3' जैसी फिल्मों से वापसी कर रहे हैं।

दुबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के दौरान निर्देशक प्रियदर्शन, जिन्होंने भारतीय सिनेमा में कॉमेडी और थ्रिलर शैली को नए आयाम दिए।
आज जब भी हिंदी सिनेमा की सबसे आइकॉनिक कॉमेडी फिल्मों की बात होती है, तो एक नाम अपने आप सामने आ जाता है—Priyadarshan। सोशल मीडिया पर एक बार फिर उनकी चर्चा तेज है क्योंकि वह लंबे गैप के बाद अक्षय कुमार के साथ ‘भूत बंगला’ और ‘हेरा फेरी 3’ जैसी फिल्मों से वापसी कर रहे हैं। यही वजह है कि फैंस से लेकर फिल्म इंडस्ट्री तक हर कोई उनके अगले प्रोजेक्ट का इंतजार कर रहा है। 90 से ज्यादा फिल्मों का निर्देशन कर चुके प्रियदर्शन सिर्फ एक डायरेक्टर नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा की उस सोच का नाम हैं जिसने कॉमेडी, इमोशन, थ्रिल और ड्रामा को एक नए लेवल पर पहुंचाया।
30 जनवरी 1957 को केरल में जन्मे प्रियदर्शन का बचपन किताबों और कहानियों के बीच बीता। उनके पिता लाइब्रेरियन थे और वहीं से उनमें कहानी कहने का जुनून पैदा हुआ। कॉलेज के दिनों में वह नाटक और रेडियो स्क्रिप्ट लिखते थे। दिलचस्प बात यह है कि उनका पहला सपना क्रिकेटर बनने का था, लेकिन आंख की चोट ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। इसके बाद उन्होंने कैमरे के पीछे अपनी दुनिया बसाई। इसी दौरान उनकी दोस्ती मोहनलाल, एम. जी. श्रीकुमार और कई भविष्य के सितारों से हुई। चेन्नई जाकर उन्होंने फिल्मों में असिस्टेंट स्क्रिप्ट राइटर के तौर पर काम शुरू किया और फिर धीरे-धीरे खुद की पहचान बना ली।
1984 में आई उनकी पहली फिल्म ‘पूचक्कोरु मूक्कुथी’ ने उन्हें रातोंरात पहचान दिला दी। इसके बाद ‘चित्रम’, ‘किलुक्कम’, ‘थलावट्टम’, ‘कालापानी’ और ‘वंदनम’ जैसी फिल्मों ने मलयालम सिनेमा में उन्हें सुपरहिट मशीन बना दिया। खास बात यह रही कि वह सिर्फ कॉमेडी तक सीमित नहीं रहे। ‘कालापानी’ जैसी ऐतिहासिक फिल्म ने साबित कर दिया कि प्रियदर्शन बड़े कैनवास पर भी कमाल कर सकते हैं। उनकी फिल्मों में कहानी, विजुअल्स और किरदारों का ऐसा बैलेंस दिखता था जो उस दौर में बहुत कम देखने को मिलता था।
लेकिन असली पैन इंडिया पहचान उन्हें बॉलीवुड से मिली। साल 2000 में आई ‘हेरा फेरी’ ने हिंदी कॉमेडी का पूरा गेम बदल दिया। बाबूराव, राजू और श्याम जैसे किरदार आज भी मीम्स और सोशल मीडिया पर ट्रेंड करते हैं। इसके बाद ‘हंगामा’, ‘हलचल’, ‘गरम मसाला’, ‘भागम भाग’, ‘चुप चुप के’, ‘ढोल’, ‘दे दना दन’ और ‘भूल भुलैया’ जैसी फिल्मों ने उन्हें कॉमेडी का मास्टर बना दिया। उनकी फिल्मों की सबसे बड़ी ताकत रही है परफेक्ट टाइमिंग, गलतफहमियों से पैदा होने वाला हास्य और ऐसे किरदार जो दर्शकों को सालों तक याद रहते हैं। अक्षय कुमार और परेश रावल के करियर में भी प्रियदर्शन का बड़ा योगदान माना जाता है।
प्रियदर्शन सिर्फ बॉक्स ऑफिस तक सीमित नहीं रहे। ‘कांचीवरम’ जैसी फिल्म ने उन्हें नेशनल अवॉर्ड दिलाया और साबित किया कि वह गंभीर सिनेमा में भी उतने ही मजबूत हैं। उन्हें तीन राष्ट्रीय पुरस्कार, कई केरल स्टेट अवॉर्ड और 2012 में पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है। ‘मरक्कार’ जैसी बड़े बजट की फिल्मों से लेकर ‘ओप्पम’ जैसे थ्रिलर तक, उन्होंने हर दौर में खुद को बदलते सिनेमा के साथ ढाला। अब जब वह अपने करियर की 100वीं फिल्म और ‘हेरा फेरी 3’ जैसे प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं, तब फैंस के बीच उनका क्रेज फिर से चरम पर पहुंच चुका है।
पर्सनल लाइफ भी उनकी फिल्मों की तरह चर्चा में रही। अभिनेत्री लिसी से शादी और फिर तलाक के बाद 2026 में दोनों के दोबारा साथ आने की खबर ने फैंस को चौंका दिया। प्रियदर्शन ने खुद माना कि जिंदगी ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया है और अब वह धीरे-धीरे फिल्मों से रिटायरमेंट की ओर बढ़ना चाहते हैं। लेकिन भारतीय सिनेमा में उनका असर इतना बड़ा है कि उनकी बनाई फिल्में आने वाली कई पीढ़ियों को हंसाती और प्रेरित करती रहेंगी।

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