कौन हैं पृथ्वीराज सुकुमारन? साउथ से बॉलीवुड तक छाया इस वर्सटाइल सुपरस्टार का जादू
मलयालम सुपरस्टार पृथ्वीराज सुकुमारन के अभिनय, निर्देशन और फिल्म निर्माण के सफल करियर के साथ उनके निजी जीवन और पुरस्कारों पर एक विस्तृत नजर।

मलयालम फिल्म उद्योग के प्रमुख अभिनेता और निर्देशक पृथ्वीराज सुकुमारन, जिन्होंने साल 2024 में फिल्म 'द गोट लाइफ' के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का केरल राज्य पुरस्कार जीता।
आज के दौर में अगर कोई ऐसा कलाकार है जिसकी चर्चा केरल की गलियों से लेकर मुंबई के फिल्म गलियारों तक हो रही है, तो वह नाम पृथ्वीराज सुकुमारन है। पृथ्वीराज सिर्फ एक अभिनेता नहीं बल्कि एक निर्देशक, निर्माता और प्लेबैक सिंगर के रूप में भारतीय सिनेमा का एक पावरहाउस बन चुके हैं। हाल के वर्षों में 'द गोट लाइफ' और 'सलार' जैसी फिल्मों में उनकी शानदार एक्टिंग ने उन्हें ग्लोबल मैप पर लाकर खड़ा कर दिया है। सोशल मीडिया से लेकर सिनेमाघरों तक हर जगह उनकी 'वाइब' का जादू सिर चढ़कर बोल रहा है। आखिर कौन है यह शख्स जिसने अभिनय की बारीकियों से लेकर फिल्म निर्माण की तकनीकी समझ तक, हर मोर्चे पर खुद को साबित किया है और आज वह मलयालम सिनेमा के सबसे महंगे सितारों में से एक बन चुके हैं।
पृथ्वीराज का सिनेमाई सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। तिरुवनंतपुरम के एक प्रतिष्ठित फिल्मी परिवार में जन्मे पृथ्वीराज के पिता सुकुमारन और मां मल्लिका सुकुमारन दोनों ही मशहूर कलाकार रहे हैं। हालांकि, पृथ्वीराज ने कभी भी अपने पारिवारिक नाम का सहारा नहीं लिया। साल २००२ में फिल्म 'नंदनम' से अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत करने वाले इस नौजवान ने शुरुआत में कुछ उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन २००६ की फिल्म 'क्लासमेट्स' ने उनकी किस्मत बदल दी। इसी साल उन्होंने फिल्म 'वास्तवन' के लिए अपना पहला केरल स्टेट फिल्म अवॉर्ड जीता और वह इस सम्मान को पाने वाले सबसे कम उम्र के अभिनेता बन गए। यह तो बस उनके शानदार सफर की एक छोटी सी झलक थी।
समय के साथ पृथ्वीराज ने अपनी एक्टिंग रेंज को इतना विस्तार दिया कि वह हर किरदार में फिट होने लगे। उन्होंने 'अयलुम ज्ञानुम थम्मिल' और 'सेल्युलाइड' जैसी फिल्मों के जरिए अपनी संजीदगी दिखाई, तो वहीं 'पुथिया मुघम' जैसी फिल्म से खुद को एक एक्शन सुपरस्टार के तौर पर स्थापित किया। उनकी प्रतिभा केवल साउथ तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने साल २०१२ में रानी मुखर्जी के साथ फिल्म 'अय्या' से अपना बॉलीवुड डेब्यू किया और उसके बाद 'औरंगजेब' और 'नाम शबाना' जैसी फिल्मों में अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराई। इतना ही नहीं, 'काविया थलाइवन' में विलेन बनकर उन्होंने तमिल सिनेमा में भी बेस्ट विलेन का अवॉर्ड अपने नाम किया और साबित कर दिया कि वह किसी भी सांचे में ढल सकते हैं।
सिर्फ कैमरे के सामने ही नहीं, बल्कि कैमरे के पीछे भी पृथ्वीराज का विजन कमाल का रहा है। उन्होंने साल २०१९ में फिल्म 'लूसिफर' के साथ बतौर निर्देशक अपनी पारी शुरू की, जिसमें सुपरस्टार मोहनलाल लीड रोल में थे। यह फिल्म मलयालम सिनेमा की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर में से एक साबित हुई और पृथ्वीराज की डायरेक्टोरियल समझ का लोहा पूरी दुनिया ने माना। इसके बाद उन्होंने अपनी खुद की प्रोडक्शन कंपनी 'पृथ्वीराज प्रोडक्शंस' के बैनर तले 'ड्राइविंग लाइसेंस', 'जन गण मन' और 'कडुवा' जैसी सुपरहिट फिल्में दीं। हाल ही में प्रभास के साथ फिल्म 'सलार' में वर्धा राजा के किरदार ने उन्हें हिंदी भाषी दर्शकों के बीच भी एक नया क्रेज दे दिया है और हर कोई उनके अगले प्रोजेक्ट 'सलार २' और 'वाराणसी' का बेसब्री से इंतजार कर रहा है।
आज पृथ्वीराज सुकुमारन केवल एक नाम नहीं बल्कि एक ब्रांड बन चुके हैं। उनकी उपलब्धियों में नेशनल फिल्म अवॉर्ड, चार केरल स्टेट फिल्म अवॉर्ड और फिल्मफेयर जैसे कई बड़े सम्मान शामिल हैं। १६ साल के लंबे इंतजार और कड़ी मेहनत के बाद बनी उनकी फिल्म 'द गोट लाइफ' ने सफलता के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए, जिसके लिए उन्हें २०२४ में एक बार फिर बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड मिला। अपनी निजी जिंदगी में बीबीसी की पत्रकार सुप्रिया मेनन के साथ खुशहाल जीवन बिता रहे पृथ्वीराज अब मुंबई के पाली हिल में भी अपना घर बना चुके हैं। उनका यह सफर संघर्ष, जुनून और सिनेमा के प्रति अटूट प्यार की मिसाल है, जो उन्हें आज के दौर का सबसे प्रभावशाली कलाकार बनाता है।

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