कौन हैं प्रीतम चक्रवर्ती? हर चार्ट पर छाया बॉलीवुड का हिट मशीन म्यूज़िक जीनियस
दो दशकों से बॉलीवुड चार्ट्स पर राज करने वाले संगीतकार प्रीतम की सफलता, संघर्ष और उनके संगीत के ग्लोबल इम्पैक्ट का विश्लेषण।

मुंबई में एक लाइव कॉन्सर्ट के दौरान दर्शकों का अभिवादन करते संगीतकार प्रीतम चक्रवर्ती, जिन्होंने 'ब्रह्मास्त्र' और 'दंगल' जैसी फिल्मों में सुपरहिट संगीत दिया है।
आज के दौर में अगर आप बॉलीवुड म्यूज़िक चार्ट्स को खंगालेंगे, तो एक नाम आपको हर जगह गूंजता हुआ सुनाई देगा और वो नाम है प्रीतम चक्रवर्ती। केसरिया से लेकर चन्ना मेरेया तक, प्रीतम की धुनें आज सिर्फ गाने बनकर नहीं रह गई हैं, बल्कि करोड़ों लोगों की भावनाओं का हिस्सा बन चुकी हैं। स्पॉटिफाई जैसे प्लेटफॉर्म्स पर लगातार राज करने वाले इस कंपोज़र ने पिछले दो दशकों में हिंदी सिनेमा पर ऐसी धाक जमाई है कि आज किसी भी बड़ी फिल्म की कामयाबी इस बात से तय होने लगी है कि क्या उसमें प्रीतम का जादुई टच मौजूद है।
प्रीतम का कोलकाता से मुंबई तक का सफर किसी रोमांचक फिल्मी कहानी जैसा है, जिसमें जुनून और कड़ी मेहनत का मेल दिखता है। बचपन में अपने पिता से संगीत की बारीकियां सीखने के बाद उन्होंने एफटीआईआई पुणे से साउंड इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और फिर मुंबई का रुख किया। शुरुआत में उन्हें सीधे बड़े प्रोजेक्ट्स नहीं मिले, इसलिए उन्होंने विज्ञापन जिंगल्स और टीवी शोज़ के टाइटल ट्रैक के जरिए इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाना शुरू किया। वैसे तो फिल्म तेरे लिए से उनका बॉलीवुड डेब्यू हुआ, लेकिन असली क्रांति आई फिल्म धूम के टाइटल ट्रैक से, जिसने उन्हें रातों-रात इंडस्ट्री का सबसे बड़ा स्टार कंपोज़र बना दिया।
धूम की सफलता के बाद प्रीतम ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और एक के बाद एक कई कल्ट एल्बम्स दिए। जब वी मेट का मौजा ही मौजा हो या लाइफ इन अ मेट्रो के रूह को छू लेने वाले गाने, प्रीतम ने हर बार कुछ अलग पेश किया। उनकी सबसे बड़ी ताकत इंडियन क्लासिकल और वेस्टर्न बीट्स का वो अनोखा मेल है, जो हर उम्र के सुनने वाले को खुद से जोड़ लेता है। पी लूं और तुम जो आए जैसे गानों ने उन्हें आम जनता का चहेता बनाया, तो वहीं बर्फी जैसी फिल्म के संगीत ने यह साबित कर दिया कि वो सिर्फ हिट मशीन ही नहीं बल्कि एक बेहतरीन आर्टिस्ट भी हैं।
साल २०१० के बाद प्रीतम का करियर एक ऐसी ऊंचाई पर पहुंच गया जहां पहुंचना हर किसी का सपना होता है। ये जवानी है दीवानी, ऐ दिल है मुश्किल और जग्गा जासूस जैसी फिल्मों के लिए उन्हें लगातार फिल्मफेयर अवॉर्ड्स मिले और उनके गानों ने यूट्यूब पर व्यूज के सारे रिकॉर्ड्स ध्वस्त कर दिए। ब्रह्मास्त्र का केसरिया गाना इस बात का सबूत है कि प्रीतम का जादू आज भी बरकरार है, जिसने स्पॉटिफाई पर ४०० मिलियन से ज्यादा स्ट्रीम्स पाकर एक नया इतिहास रच दिया है। उनकी धुनें अब सिर्फ देश तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इंटरनेशनल चार्ट्स पर भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही हैं।
प्रीतम का योगदान सिर्फ फिल्मों तक ही सीमित नहीं रहा, उन्होंने जैम८ जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए नए गायकों और संगीतकारों को भी एक बड़ा मंच दिया है। हालांकि उनके करियर के शुरुआती दौर में उन पर प्लेगरिज्म के आरोप भी लगे, लेकिन उन्होंने बड़ी ही विनम्रता से अपनी गलतियों को स्वीकार किया और अपने काम को और ज्यादा ओरिजिनल और प्रभावशाली बनाया। आज वो नेशनल अवॉर्ड और कई फिल्मफेयर अवॉर्ड्स के साथ भारतीय संगीत जगत के एक सच्चे ट्रेंड-सेटर बन चुके हैं, जिनकी साख पूरी दुनिया में फैली है।
आज जब भी एनिमल, डंकी या आने वाली वॉर २ जैसी बड़ी फिल्मों का नाम सामने आता है, तो दर्शक सबसे पहले उसके म्यूज़िक के बारे में जानना चाहते हैं। सोशल मीडिया और इंडस्ट्री में आज सिर्फ एक ही सवाल चर्चा का विषय रहता है कि क्या फिल्म में प्रीतम का संगीत है? ऐसा इसलिए है क्योंकि आज के समय में प्रीतम का नाम ही किसी एल्बम के सुपरहिट होने की सबसे बड़ी गारंटी बन चुका है। उनकी धुनें आज हर दिल की धड़कन हैं और यही वजह है कि उन्हें आज के दौर का सबसे बड़ा म्यूज़िक जीनियस माना जाता है।

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