प्रीति जिंटा का 'शिमला कनेक्शन'; मॉल रोड की 67 साल पुरानी इस बेकरी पर आज भी फिदा हैं बॉलीवुड की डिंपल गर्ल
बॉलीवुड अभिनेत्री प्रीति जिंटा ने साझा किया शिमला की 1959 में स्थापित 'त्रिशूल बेकरी' के प्रति अपना अटूट प्रेम। शिमला के मॉल रोड पर स्थित इस बेकरी की स्पूनी पेस्ट्री और हेज़लनट कॉफी आज भी है सुपरस्टार की पसंदीदा। जानिए शिमला की ऐतिहासिक बेकरियों और यूनेस्को विश्व धरोहर कालका-शिमला टॉय ट्रेन के सफर का पूरा विवरण।

Preity Zinta Birthday Special : बॉलीवुड की 'डिंपल गर्ल' प्रीति जिंटा भले ही आज सात समंदर पार ऑस्ट्रेलिया में अपना जीवन बिता रही हों, लेकिन उनका दिल आज भी हिमाचल की बर्फीली वादियों और शिमला की संकरी गलियों में बसता है। वैश्विक व्यंजनों का स्वाद चखने के बावजूद, अभिनेत्री ने हाल ही में अपने बचपन के उस 'सीक्रेट स्पॉट' का खुलासा किया है, जिसने शिमला के पर्यटन और स्थानीय खान-पान को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। यह कहानी केवल एक अभिनेत्री की पसंद की नहीं, बल्कि 1959 से चली आ रही एक ऐतिहासिक विरासत की है।
त्रिशूल बेकर्स: 1959 से स्वाद की अटूट विरासत
शिमला के प्रसिद्ध 'मॉल रोड' पर स्थित त्रिशूल बेकर्स एंड कन्फेक्शनर्स केवल एक दुकान नहीं, बल्कि शिमला की पहचान का हिस्सा है। 1959 में स्थापित यह बेकरी आज भी अपने पारंपरिक स्वाद के लिए जानी जाती है।
- स्टार की पसंद: करण जौहर के मशहूर टॉक शो 'कॉफी विद करण' में प्रीति जिंटा ने स्वीकार किया कि त्रिशूल बेकर्स उनके पसंदीदा 'हलवाई' हैं।
- सिग्नेचर स्वाद: यहाँ की 'स्पूनी पेस्ट्री', आलू पैटी और हेज़लनट कॉफी पर्यटकों के बीच इतनी लोकप्रिय है कि ऑफ-सीजन में भी यहाँ भारी भीड़ रहती है।
- परंपरा: 67 सालों से यह बेकरी शुद्ध शाकाहारी उत्पाद, पफ पेस्ट्री और चॉकलेट डेज़र्ट पेश कर रही है, जो ब्रिटिश काल के बाद के शिमला की झलक दिखाते हैं।
शिमला का बेकरी कल्चर: कृष्णा और सिटी पॉइंट का जादू
त्रिशूल के अलावा, शिमला की अन्य ऐतिहासिक बेकरियां भी अपनी विशिष्टता के लिए जानी जाती हैं। कृष्णा बेकरी अपने स्थानीय हिमाचली व्यंजनों, डिमसम और बटर रोल के लिए मशहूर है। वहीं, सिटी पॉइंट बेकरी आज भी अपनी पारंपरिक शैली को बरकरार रखे हुए है, जहाँ केवल नकद भुगतान स्वीकार किया जाता है और उनके ताज़ा क्रीम रोल शाम की चाय का अनिवार्य हिस्सा माने जाते हैं।
यूनेस्को विरासत: कालका-शिमला टॉय ट्रेन का रोमांच
शिमला की यात्रा तब तक अधूरी है जब तक आप 1903 से चल रही यूनेस्को विश्व धरोहर कालका-शिमला टॉय ट्रेन का आनंद न लें। यह नैरो-गेज रेलवे इंजीनियरिंग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
- सफर का रोमांच: यह ट्रेन 96 किलोमीटर के सफर में 102 सुरंगों और 800 से अधिक पुलों से होकर गुजरती है।
- प्राकृतिक सौंदर्य: बरोग और धरमपुर जैसे ऐतिहासिक स्टेशनों से गुजरते हुए, सर्दियों में बर्फ से लदी पहाड़ियां इस यात्रा को किसी फिल्मी दृश्य जैसा बना देती हैं।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
