सपनों के लिए लड़ रहे हैं हमारे बच्चे, उन्हें सुनना होगा- बारिश के बीच बेंगलुरु की सड़कों पर प्रकाश राज की हुंकार
नीट पेपर लीक और परीक्षाओं में धांधली को लेकर बेंगलुरु में युवाओं ने किया प्रदर्शन। अभिनेता प्रकाश राज ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग का किया समर्थन।

बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में नीट पेपर लीक और परीक्षाओं में अनियमितताओं के खिलाफ 'कॉकरोच जनता पार्टी' के विरोध प्रदर्शन को संबोधित करते अभिनेता प्रकाश राज।
देश भर में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और हालिया नीट (NEET) पेपर लीक विवाद को लेकर युवाओं का आक्रोश अब सड़कों पर एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुका है। शिक्षा व्यवस्था की खामियों और जवाबदेही की कमी के खिलाफ उठी इस आवाज को अब कई प्रमुख हस्तियों का साथ भी मिलने लगा है। इसी कड़ी में रविवार को कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में एक अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला, जब भारी बारिश की परवाह किए बिना हजारों युवा 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के बैनर तले विरोध प्रदर्शन करने के लिए एकत्रित हुए। इस जनसैलाब का उत्साह तब और भी दोगुना हो गया, जब दक्षिण भारतीय फिल्मों के दिग्गज अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राज ने इस विरोध प्रदर्शन में शिरकत की और युवाओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में आयोजित इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करना था। प्रदर्शनकारी छात्रों और युवाओं का स्पष्ट आरोप है कि हाल ही में सामने आया नीट प्रश्न पत्र लीक मामला और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली में कथित गड़बड़ियां सीधे तौर पर केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय की प्रशासनिक विफलता को दर्शाती हैं। भारी बारिश के बीच डटे युवाओं के जज्बे को सलाम करते हुए प्रकाश राज ने मंच से एक बेहद ओजस्वी और तीखा भाषण दिया। उन्होंने देश की राजनीतिक व्यवस्था और सत्ता में बैठे राजनेताओं पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि चुने हुए प्रतिनिधियों का प्राथमिक दायित्व अपना काम ईमानदारी से करना होता है, लेकिन वर्तमान में वे केवल राजनीति करने में व्यस्त हैं। उन्होंने सत्ता तंत्र पर निशाना साधते हुए कहा कि जब सिस्टम काम करना बंद कर देता है, तो देश के युवाओं को अपने भविष्य और अपने सपनों की लड़ाई खुद लड़ने के लिए सड़कों पर उतरना पड़ता है।
अभिनेता ने अपने संबोधन में वरिष्ठ नेताओं पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि रिटायरमेंट की उम्र पार कर चुके लोग आज भी देश पर राज कर रहे हैं और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। प्रकाश राज ने दो टूक शब्दों में कहा कि अब समय आ गया है कि सत्ता में बैठे बुजुर्ग नेता पद छोड़ें और युवाओं को उनके अधिकार दें। इस आंदोलन को 'कॉकरोच जनता पार्टी' नाम दिए जाने और युवाओं को दिए जाने वाले विभिन्न नकारात्मक टैग्स पर भी उन्होंने खुलकर अपनी बात रखी। प्रकाश राज ने स्पष्ट किया कि सत्ता पक्ष भले ही इन संघर्षरत युवाओं को 'अर्बन नक्सल', 'पाकिस्तानी' या 'कॉकरोच' कहकर उनका मनोबल तोड़ने की कोशिश करे, लेकिन यह नई पीढ़ी अब इन खोखले शब्दों से डरने वाली नहीं है। वे अपने हक और अपने सपनों के लिए लड़ रहे हैं, और सरकार को अब चुप होकर उनकी जायज मांगों को सुनना ही होगा।
इस अवसर पर 'कॉकरोच इज बैक' के आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट से एक वीडियो भी साझा किया गया, जिसमें प्रकाश राज के साथ प्रख्यात शिक्षाविद् व जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके भी मंच पर खड़े नजर आए। वांगचुक की उपस्थिति ने इस आंदोलन को एक नई वैचारिक मजबूती प्रदान की। प्रकाश राज ने वांगचुक का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जब बात देश की शिक्षा प्रणाली के भविष्य की हो, तो सोनम वांगचुक से बेहतर मार्गदर्शक कोई और नहीं हो सकता। इससे पूर्व, एक सोशल मीडिया उपयोगकर्ता के सवाल का जवाब देते हुए प्रकाश राज ने स्पष्ट किया था कि पूर्व निर्धारित व्यस्तताओं के कारण वह दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में शामिल नहीं हो सके थे, लेकिन उनका पूर्ण समर्थन हमेशा इस छात्र आंदोलन के साथ है।
'कॉकरोच जनता पार्टी' का यह आंदोलन केवल बेंगलुरु तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को लामबंद करने वाली इस मुहिम ने अब एक राष्ट्रीय स्वरूप ग्रहण कर लिया है। इससे पहले 6 जून को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर इस समूह ने एक विशाल प्रदर्शन कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। इसके पश्चात इस विरोध की आंच 11 जून को महाराष्ट्र के पुणे, 12 जून को उत्तर प्रदेश के लखनऊ और 13 जून को पंजाब के अमृतसर तक भी पहुंची। हर शहर में युवाओं की एक ही मांग गूंज रही है कि शिक्षा तंत्र में पारदर्शिता लाई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। यह निरंतर बढ़ता राष्ट्रव्यापी आंदोलन इस बात का स्पष्ट संकेत है कि देश का युवा वर्ग अब शिक्षा के प्रति किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है, और जब तक ठोस सुधारात्मक कदम नहीं उठाए जाते, यह संघर्ष बदस्तूर जारी रहेगा।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
