भारतीय सिनेमा के वरिष्ठ अभिनेता प्रकाश राज अपनी फिल्मों से ज्यादा सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपने मुखर बयानों के लिए जाने जाते हैं। अक्सर केंद्र सरकार और उसकी नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले प्रकाश राज एक बार फिर देश के राजनीतिक पटल और सोशल मीडिया पर चर्चा का मुख्य केंद्र बन गए हैं। इस बार उन्होंने सीधे तौर पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अतीत और उनके सार्वजनिक दावों को लेकर एक बेहद विवादित और तीखा तंज कसा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक यूजर के सवाल का जवाब देते हुए अभिनेता ने प्रधानमंत्री के पुराने जीवन और उनके बयानों की सत्यता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जिसके बाद इंटरनेट पर उनके खिलाफ एक बड़ा जन-आक्रोश देखने को मिल रहा है और लोग उन्हें लगातार ट्रोल कर रहे हैं।

इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक व्यक्तिगत यूजर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अतीत को लेकर एक पोस्ट साझा की। उस यूजर ने अपनी पोस्ट में दावा किया कि उसे पूरा विश्वास है कि देश के वर्तमान प्रधानमंत्री अपने शुरुआती जीवन में न तो कभी चाय बेचने वाले थे और न ही कभी उन्होंने विपरीत परिस्थितियों का सामना किया था। यूजर ने प्रधानमंत्री के दावों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए अन्य लोगों से उनकी राय मांगी थी। इस ट्वीट को री-ट्वीट करते हुए अभिनेता प्रकाश राज ने अपनी सहमति व्यक्त की और लिखा कि उन्हें इस बात की प्रामाणिक जानकारी नहीं है कि अपने शुरुआती दिनों में देश के प्रधानमंत्री ने चाय बेची थी अथवा जीविकोपार्जन के लिए कोई अन्य माध्यम अपनाया था, परंतु वह उनके सार्वजनिक जीवन में दिए गए विभिन्न बयानों और दावों की विसंगतियों को करीब से देखते रहे हैं। उन्होंने अंत में अपने चिरपरिचित अंदाज में हैशटैग के साथ लिखा कि कृपया बताएं कि कौन-कौन इस बात से सहमत है।

विदित हो कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक राजनीतिक और व्यक्तिगत इतिहास के अनुसार, राजनीति के मुख्य पटल पर आने और गुजरात के मुख्यमंत्री का पदभार संभालने से पहले उनका शुरुआती जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा था। गुजरात के वडनगर रेलवे स्टेशन पर उनके द्वारा चाय बेचने की बात भारतीय राजनीति और जनमानस में व्यापक रूप से स्थापित है। पारिवारिक आर्थिक पृष्ठभूमि सुदृढ़ न होने के कारण उनके पिता ने शुरू में जीवनयापन के लिए एक अनाज पीसने वाली चक्की लगाई थी और बाद में रेलवे स्टेशन के समीप चाय की एक छोटी दुकान संचालित की थी, जहां बचपन में नरेंद्र मोदी भी हाथ बंटाया करते थे। राजनीति के शीर्ष स्तर पर पहुंचने के बाद भी प्रधानमंत्री ने कई मंचों से अपने इस अतीत का गर्व से उल्लेख किया है, परंतु प्रकाश राज जैसे आलोचकों को इन ऐतिहासिक तथ्यों और दावों पर हमेशा से संदेह रहा है।

अभिनेता द्वारा प्रधानमंत्री के अतीत पर इस प्रकार की शब्दावली का प्रयोग किए जाने के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया। प्रधानमंत्री के समर्थकों और सामान्य इंटरनेट उपयोगकर्ताओं ने प्रकाश राज के इस ट्वीट को बेहद अमर्यादित और संवेदनशील मानते हुए उन पर तीखा पलटवार किया। एक यूजर ने फिल्म उद्योग के संदर्भों का हवाला देते हुए लिखा कि किसी भी व्यक्ति का ईमानदारी से काम करना सम्मानजनक होता है और कम से कम प्रधानमंत्री ने स्क्रीन पर पैसों के लिए काम करने वाले अभिनेताओं की तरह किसी से मार नहीं खाई है। वहीं एक अन्य यूजर ने आर्थिक दृष्टिकोण से प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि समाज में चाय बेचना अथवा कोई भी छोटा व्यवसाय करना एक पूर्णतः वैध और सम्मानजनक पेशा है, उसे किसी भी परिस्थिति में किसी नकारात्मक कृत्य से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। लोगों ने अभिनेता पर बिना किसी पुख्ता तथ्य के एकतरफा और झूठा राजनीतिक एजेंडा चलाने का गंभीर आरोप भी मढ़ा।

यह पहली बार नहीं है जब प्रकाश राज ने देश के प्रधानमंत्री अथवा सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ इस तरह की आक्रामक बयानबाजी की है। इससे पूर्व भी वह कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों से सरकार की आर्थिक और सामाजिक नीतियों की तीखी आलोचना कर चुके हैं। पिछले दिनों जब प्रधानमंत्री ने हैदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए देश की आर्थिक स्थिरता के लिए नागरिकों से कुछ व्यक्तिगत त्याग करने और घरेलू उपभोग की वस्तुओं में कटौती करने का आह्वान किया था, तब भी प्रकाश राज ने सरकार के पुराने चुनावी घोषणापत्रों और अधूरे दावों की एक लंबी सूची सोशल मीडिया पर साझा की थी। उस समय उन्होंने विमुद्रीकरण (नोटबंदी) के फैसले को देश की अर्थव्यवस्था को तबाह करने वाला कदम बताते हुए सरकार को पूरी तरह से विफल और नाकाम करार दिया था।

इसके अलावा, प्रकाश राज देश में लगातार बढ़ती ईंधन (पेट्रोल और डीजल) की कीमतों और महंगाई के मुद्दे पर भी लगातार सरकार को घेरते आए हैं। उन्होंने कुछ समय पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री काल के एक पुराने भाषण का वीडियो साझा करते हुए उन पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया था। उस पुराने भाषण में तत्कालीन मुख्यमंत्री महंगाई से निपटने में विफल रहने के लिए केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार और तत्कालीन प्रधानमंत्री को जिम्मेदार ठहरा रहे थे। इसी संदर्भ का उपयोग करते हुए प्रकाश राज ने व्यंग्यात्मक शैली में केंद्र सरकार से सवाल पूछा था कि क्या वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए तत्कालीन नीतियों के कर्णधारों को अपनी जिम्मेदारी स्वीकार नहीं करनी चाहिए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एक लोकतान्त्रिक व्यवस्था में रचनात्मक आलोचना का स्वागत होना चाहिए, परंतु सार्वजनिक मंचों पर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के लिए मर्यादित भाषा का चयन भी उतना ही अनिवार्य है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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