साउथ सिनेमा से लेकर बॉलीवुड तक अगर कोई ऐसा अभिनेता है जिसकी एंट्री भर से स्क्रीन पर बिजली सी दौड़ जाती है, तो वो हैं Prakash Raj। इन दिनों फिर से उनकी चर्चा सोशल मीडिया पर तेज है। कभी उनकी दमदार एक्टिंग वायरल होती है, कभी बेबाक राजनीतिक बयान, तो कभी फिल्मों में निभाए गए खतरनाक विलेन के किरदार। यही वजह है कि प्रकाश राज सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि इंडियन सिनेमा की सबसे दमदार और निडर आवाज़ों में गिने जाते हैं।

बेंगलुरु में जन्मे प्रकाश राज का असली नाम प्रकाश राय था। थिएटर की दुनिया से उन्होंने अपना सफर शुरू किया, जहां वो महज़ कुछ सौ रुपये में स्टेज शो किया करते थे। कहा जाता है कि उन्होंने करीब दो हजार से ज्यादा स्ट्रीट थिएटर परफॉर्मेंस किए, जिसने उनकी एक्टिंग को बेहद मजबूत बनाया। दूरदर्शन के सीरियल्स से शुरुआत करने वाले प्रकाश राज को असली पहचान तब मिली जब मशहूर निर्देशक K. Balachander ने उन्हें तमिल फिल्म ‘डुएट’ में मौका दिया और उनका नाम बदलकर प्रकाश राज रख दिया। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

प्रकाश राज की सबसे बड़ी ताकत उनकी बहुभाषी पहचान रही। कन्नड़, तमिल, तेलुगु, मलयालम, हिंदी और अंग्रेज़ी फिल्मों में उन्होंने जिस सहजता से काम किया, वो बहुत कम कलाकार कर पाए हैं। फिल्म ‘इरुवर’ में उनके शानदार अभिनय ने उन्हें नेशनल अवॉर्ड दिलाया, जबकि ‘कांचीवरम’ ने उन्हें बेस्ट एक्टर के रूप में नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया। ‘घिल्ली’ का मुथु पांडी हो या ‘सिंघम’ का खतरनाक नेता, ‘वांटेड’ का विलेन हो या ‘वसूल राजा एमबीबीएस’ का सख्त डीन, हर किरदार में उन्होंने ऐसा असर छोड़ा कि दर्शक उन्हें भूल नहीं पाए।

दिलचस्प बात ये है कि प्रकाश राज ने सिर्फ अभिनय तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने निर्माता और निर्देशक के तौर पर भी अपनी अलग पहचान बनाई। ‘अभियुम नानुम’, ‘मोझी’, ‘धोनी’ और ‘पुट्टक्काना हाईवे’ जैसी फिल्मों ने साबित किया कि उन्हें सिर्फ कमर्शियल सिनेमा नहीं, बल्कि मजबूत कहानियों की भी गहरी समझ है। उनकी प्रोडक्शन कंपनी ‘डुएट मूवीज’ आज कंटेंट ड्रिवन फिल्मों के लिए जानी जाती है। टीवी होस्ट के तौर पर भी उन्होंने दर्शकों का दिल जीता और हर मंच पर अपनी अलग छाप छोड़ी।

प्रकाश राज की निजी जिंदगी भी काफी उतार-चढ़ाव भरी रही। बेटे की दर्दनाक मौत ने उन्हें अंदर से तोड़ दिया था, लेकिन उन्होंने खुद को संभाला और जिंदगी में आगे बढ़े। उनकी बेबाक सोच और राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर बोलने की आदत ने उन्हें कई बार विवादों में भी डाला। सोशल मीडिया पर उनका ‘जस्ट आस्किंग’ अभियान खूब चर्चा में रहा। उन्होंने चुनाव भी लड़ा और भले जीत नहीं पाए, लेकिन लोगों के बीच अपनी मजबूत राय रखने वाले कलाकार के रूप में उनकी पहचान और बड़ी हो गई।

आज प्रकाश राज उस दौर के अभिनेता हैं जिनके बिना भारतीय सिनेमा की चर्चा अधूरी लगती है। वो ऐसे कलाकार हैं जो हीरो बनकर भी याद रहते हैं और विलेन बनकर भी। उनकी आवाज़, डायलॉग डिलीवरी और आंखों का एक्सप्रेशन ही उन्हें बाकी कलाकारों से अलग बनाता है। यही कारण है कि नई पीढ़ी भी उनके पुराने किरदारों के क्लिप्स सोशल मीडिया पर शेयर कर रही है और हर कोई यही कह रहा है कि प्रकाश राज जैसा कलाकार शायद ही दोबारा देखने को मिले।

Pratahkal Newsroom

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