भारतीय सिनेमा जगत से एक बेहद दुखद और चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जिसने हर किसी को स्तब्ध कर दिया है। साउथ से लेकर बॉलीवुड तक अपनी दमदार और शानदार अभिनय शैली के लिए पहचाने जाने वाले दिग्गज अभिनेता प्रदीप रावत अब हमारे बीच नहीं रहे। चार अगस्त को कैंसर जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारी से लंबी और कठिन लड़ाई लड़ने के बाद उनका निधन हो गया। अपने अभिनय के दम पर दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ने वाले प्रदीप रावत अपने पीछे कई अनकही कहानियां, जीवन के कड़े संघर्ष और सिनेमाई विरासत की ऐसी यादें छोड़ गए हैं, जिन्हें चाहकर भी कभी भुलाया नहीं जा सकता। कैंसर जैसी लाइलाज बीमारी से वे एक लंबे समय तक जूझते रहे, लेकिन इसके बावजूद उनकी सबसे बड़ी खूबी यह रही कि वे इस भयंकर शारीरिक पीड़ा के बीच भी लगातार शूटिंग करते रहे और अपने काम के प्रति पूरी तरह समर्पित रहे।

अपने जीवन के अंतिम दौर में उन्होंने सिद्धार्थ कन्नन को दिए गए एक विशेष इंटरव्यू में अपने स्वास्थ्य से जुड़ी कई ऐसी खौफनाक और हैरान करने वाली सच्चाइयों से पर्दा उठाया था, जिन्हें सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएं। साल 2024 में दिए गए उस साक्षात्कार के दौरान उन्होंने अपनी जिंदगी के सबसे अंधकारमय और मुश्किल दौर के बारे में खुलकर बातचीत की थी। उन्होंने बताया था कि किस प्रकार एक के बाद एक कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं ने उन्हें घेर लिया था। दिल की गंभीर बीमारी, बाईपास सर्जरी जैसी बड़ी चिकित्सा प्रक्रियाओं और उसके बाद चौथे स्टेज के कैंसर जैसी महाविनाशक चुनौतियों का सामना करने के बावजूद उन्होंने कभी भी हार नहीं मानी और आखिरी सांस तक जीवन से डटकर मुकाबला करते रहे।

अपने उसी इंटरव्यू में अभिनेता ने जीवन के उस शाश्वत सत्य को बहुत ही सहजता से स्वीकार किया था, जो हर इंसान की अंतिम सच्चाई होती है। उन्होंने उस दौरान बहुत ही मार्मिक और गहरी बात कहते हुए कहा था कि जब भी वे अपनी जिंदगी में आखिरी बार अपनी आंखें बंद करेंगे, तो भारतीय सिनेमा के इतिहास में उनका नाम कहीं न कहीं हमेशा के लिए अमर और अंकित रहेगा। अपने कड़े संघर्षों को याद करते हुए उन्होंने यह भी कहा था कि वे जीवन की भट्टी और आग से पहले ही गुजर चुके हैं, इसलिए उन्हें किसी भी परिस्थिति से डर नहीं लगता। उनकी यह बातें इस बात का प्रमाण थीं कि वे शारीरिक रूप से भले ही कमजोर हो रहे थे, लेकिन मानसिक तौर पर बेहद मजबूत और चट्टान की तरह अडिग थे।

उनके इस लंबे और कष्टदायक स्वास्थ्य संघर्ष की शुरुआत एक बेहद सामान्य सी लगने वाली घटना से हुई थी, जिसके बारे में शायद ही किसी को अंदाजा रहा होगा। प्रदीप रावत ने खुद खुलासा किया था कि उनकी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की असली सुगबुगाहट और शुरुआत एक दक्षिण भारतीय फिल्म की शूटिंग के दौरान हुई थी। वे सेट पर एक हाई-ऑक्टेन फाइट सीन की शूटिंग कर रहे थे, तभी अचानक उन्हें सांस लेने में भारी तकलीफ महसूस होने लगी। उस वक्त को याद करते हुए उन्होंने बताया था कि एक साउथ इंडियन फिल्म में फाइट सीन शूट करते समय अचानक उनकी सांसें फूलने लगी थीं। शूटिंग का शेड्यूल खत्म होने के बाद उन्होंने तुरंत अपनी मेडिकल जांच करवाने का फैसला किया क्योंकि उन्हें अंदर से यह अंदेशा हो गया था कि उनके दिल में कोई गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है।

जब डॉक्टरों ने उनकी चिकित्सकीय जांच की, तो जो रिपोर्ट सामने आई उसने सबको सकते में डाल दिया। मेडिकल जांच में यह बात सामने निकलकर आई कि उनके दिल की पांच प्रमुख नसों में 90 प्रतिशत से ज्यादा का खतरनाक ब्लॉकेज मौजूद था। डॉक्टरों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्हें तुरंत बाईपास सर्जरी और स्टेंट लगवाने की सख्त सलाह दी थी। हालांकि, उस समय उनकी पारिवारिक और व्यावसायिक जिम्मेदारियां आड़े आ रही थीं। उनकी पत्नी ने उन्हें कुछ समय के लिए इंतजार करने का अनुरोध किया था क्योंकि उन दिनों वे कई बड़ी और महत्वपूर्ण फिल्मों की शूटिंग में व्यस्त थे, जिनमें भारी-भरकम एक्शन सीक्वेंस फिल्माए जाने बाकी थे। उस परिस्थिति का जिक्र करते हुए प्रदीप रावत ने तब कहा था कि उनके दिल में ब्लॉकेज होने का मतलब यह बिल्कुल नहीं था कि वे सब कुछ छोड़कर बिस्तर पर लाचार होकर लेट जाएं और अपने पेशेवर काम को पूरी तरह से बंद कर दें।

हालाँकि, स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बाद में मुंबई के प्रतिष्ठित एशियन हार्ट हॉस्पिटल में उनकी विस्तृत जांच करवाई गई। इस अस्पताल में हुई मेडिकल जांच के बाद जो खुलासा हुआ, उसने सभी को हिला कर रख दिया। डॉक्टरों ने पाया कि उनके दिल में एक या दो नहीं बल्कि कुल छह जगह पर अत्यंत गंभीर ब्लॉकेज बने हुए हैं। इस चिकित्सीय रिपोर्ट के आने के तुरंत बाद उनकी जटिल बाईपास सर्जरी की प्रक्रिया को अंजाम दिया गया। इस बड़ी और जोखिम भरी सर्जरी के बाद उनके शरीर पर गहरा प्रभाव पड़ा और इस पूरी प्रक्रिया के दौरान उनका करीब 20 किलो वजन तेजी से कम हो गया, जिससे उनका शरीर काफी कमजोर हो चुका था।

अभी वे इस दिल की बड़ी सर्जरी और उससे उपजे शारीरिक आघात से पूरी तरह से उबर भी नहीं पाए थे कि उनके जीवन में एक और वज्रपात जैसी खबर आ गई। बाईपास सर्जरी से उबरने के कुछ ही समय बाद उन्हें अपने शरीर में कुछ असामान्य लक्षण दिखाई दिए। उन्होंने खुद इस बात का खुलासा किया था कि एक दिन उन्होंने अपने मल में खून देखा, जिसके बाद उन्होंने तुरंत डॉक्टर से संपर्क किया। जब इसके तमाम मेडिकल टेस्ट करवाए गए, तो रिपोर्ट देखकर डॉक्टरों के भी होश उड़ गए। उन्हें पता चला कि वे शरीर के भीतर स्टेज 4 के गंभीर कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी की चपेट में आ चुके हैं। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि परिवार के किसी भी सदस्य के कुछ कहने या बताने से पहले ही वे उनके चेहरों के हाव-भाव को देखकर पूरी सच्चाई भांप गए थे। उन्होंने कहा था कि उनके घर के सभी लोग इस अचानक आए बड़े सदमे से पूरी तरह टूट गए थे और फूट-फूटकर रोने लगे थे। जब उनके अपने रिपोर्ट हाथ में लेकर उनके पास आए, तो वे उनके चेहरों की मायूसी से पलभर में समझ गए थे कि यह और कुछ नहीं बल्कि कैंसर की पुष्टि है।

उस बेहद डरावने और संकटपूर्ण समय में भी उन्होंने खुद को पूरी तरह टूटने देने के बजाय अपने पूरे परिवार को भावनात्मक रूप से संभालने का बीड़ा उठाया। उन्होंने खुद आगे आकर अपने परिजनों को ढांढस बंधाया और कहा कि वे ही अपने घर के लोगों को इस मुश्किल घड़ी में हिम्मत दे रहे थे। उन्होंने बताया कि पहले बाईपास सर्जरी के दौरान उनका 20 किलो वजन कम हुआ था, और उसके ठीक बाद कैंसर की इस जंग में उनका 20 किलो वजन और घट गया, यानी कुल मिलाकर उनका लगभग 40 किलो वजन कम हो चुका था, जिससे उनकी शारीरिक बनावट में भारी बदलाव आ गया था। इसके बावजूद उन्होंने कभी भी मौत के खौफ को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। उन्होंने साल 2016 में अपनी बाईपास सर्जरी और साल 2018 में स्टेज-4 कैंसर की पुष्टि होने के इस पूरे सफर का जिक्र करते हुए बताया था कि एक सेकंड के लिए भी उन्हें यह अहसास नहीं हुआ कि वे इस बीमारी के आगे घुटने टेक देंगे। वे लगातार अपने परिवार को मजबूत करते रहे और खुद भी हर दिन नियमित रूप से दो घंटे तक एक्सरसाइज करते थे, जिससे वे हर परिस्थिति का मुकाबला करने के लिए मानसिक रूप से तैयार रहते थे।

इस लंबी बीमारी और संघर्ष के बीच उनके जीवन का एक ऐसा भी पल आया जब वे अपनी दिवंगत मां को याद करके पूरी तरह भावुक हो गए थे। उन्होंने बताया था कि जब उन्हें अपने चौथे स्टेज के कैंसर के बारे में पता चला था, तो अचानक उनके मन में अपनी मां की यादें ताजा हो गई थीं। मां को याद करते हुए उनकी आंखें नम हो गई थीं। उन्होंने बताया था कि हालांकि उनकी मां अब इस दुनिया में नहीं थीं, लेकिन उनका आशीर्वाद और उनकी दी गई सीख हमेशा उनके साथ बनी हुई थी। उनके जीवन का सबसे बड़ा मलाल या अफसोस यही रहा था कि जब उनकी मां का निधन हुआ था, तब वे उनके पास मौजूद नहीं थे। उस दौरान वे किसी बेहद दूरदराज के घने जंगल में अपनी किसी फिल्म की शूटिंग कर रहे थे, जहां से वापस घर लौटने में पूरा एक दिन का समय लग गया था। मां के अंतिम समय में उनके पास न रह पाने का वह दर्द उनकी सारी हिम्मत को भीतर तक झकझोर कर रख गया था।

यदि बात करें उनके गौरवशाली और प्रेरणादायक फिल्मी सफर की, तो प्रदीप रावत ने भारतीय सिनेमा में चार दशक से भी अधिक लंबे समय तक अपनी अदाकारी का लोहा मनवाया। उन्होंने हिंदी के अलावा तेलुगु, तमिल, कन्नड़, मलयालम, बंगाली, भोजपुरी, नेपाली और मराठी जैसी तमाम क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों में अपने अभिनय की लंबी पारी खेली। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 1980 के दशक में की थी, लेकिन देश भर के घर-घर में उन्हें जो पहचान और अपार लोकप्रियता मिली, वह बीआर चोपड़ा के ऐतिहासिक और मशहूर टेलीविजन धारावाहिक 'महाभारत' से मिली। इस धारावाहिक में उन्होंने गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा का ऐसा अमर किरदार निभाया कि आज भी दर्शक उस भूमिका को भूला नहीं पाए हैं। इसके बाद उन्होंने बड़े पर्दे पर रुख किया और हिंदी सिनेमा की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'गजनी' के साथ-साथ एस.एस. राजामौली की फिल्म 'सई' समेत कई अन्य फिल्मों में बेहद खतरनाक और दमदार खलनायक की भूमिकाएं निभाईं। इन किरदारों ने उन्हें भारतीय सिनेमा इतिहास के सबसे यादगार और खूंखार विलन की सूची में सबसे ऊपर ला खड़ा किया।

अपने जीवन के अंतिम पड़ाव और स्वास्थ्य की तमाम असाध्य चुनौतियों से जूझने के बावजूद वे लगातार फिल्मों में सक्रिय बने रहे और काम करते रहे। 'वाल्टेयर वीरय्या', 'गुलू गुलू' और हालिया चर्चित फिल्म 'छावा' जैसी बेहतरीन फिल्में उनके करियर की आखिरी फिल्मों में शुमार रहीं, जिनमें उन्होंने अपनी बेजोड़ कला का प्रदर्शन किया। उनके शुरुआती हिंदी फिल्मी सफर पर नजर डालें तो साल 1986 में आई ड्रामा फिल्म 'समुंदर' में वे एक नौसेना अधिकारी यानी नेवल ऑफिसर के रूप में नजर आए थे। इसके बाद साल 1990 में आई सुपरहिट फिल्म 'अग्निपथ' में उन्होंने अमिताभ बच्चन के करीबी साथी का किरदार निभाया था। साल 1999 में आमिर खान की चर्चित फिल्म 'सरफरोश' रिलीज हुई, जिसमें उन्होंने सुल्तान नाम के एक बेहद अहम और शातिर गुर्गे का किरदार निभाकर दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचा। इसके बाद साल 2001 में आई ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म 'लगान' में उन्होंने देवा सिंह सोढ़ी नाम के एक जुझारू ग्रामीण का किरदार निभाया, जो ब्रिटिश हुकूमत और अंग्रेज अधिकारियों के खिलाफ भुवन यानी आमिर खान की बनाई गई लगान की क्रिकेट टीम में शामिल होकर अंग्रेजों के छक्के छुड़ाता है। प्रदीप रावत का यह किरदार आज भी भारतीय सिनेमा के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। उनका यूं चले जाना भारतीय फिल्म उद्योग के लिए एक ऐसी अपूरणीय क्षति है, जिसे लंबे समय तक भरा नहीं जा सकता।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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