भारतीय फिल्म जगत में अपनी दमदार अदाकारी, बेबाक अंदाज और अनोखी लेखन शैली के लिए जाने जाने वाले प्रसिद्ध अभिनेता पीयूष मिश्रा ने हाल ही में झारखंड की राजधानी रांची में चल रहे छात्र आंदोलन के दौरान कुछ ऐसा कह दिया है, जिसकी चर्चा पूरे देश में हो रही है। रांची के ऐतिहासिक जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और गड़बड़ियों के खिलाफ पिछले करीब तीन हफ्तों से छात्र सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इन आंदोलनकारी छात्रों का समर्थन करने और उनका हौसला बढ़ाने के लिए जब अभिनेता पीयूष मिश्रा खुद रांची पहुंचे, तो उन्होंने वहां न सिर्फ छात्रों का पक्ष सुना, बल्कि देश के एक अन्य दिग्गज और वरिष्ठ अभिनेता नसीरुद्दीन शाह की चुप्पी पर भी जमकर निशाना साधा। पीयूष मिश्रा के इस तीखे बयान ने एक बार फिर से यह बहस छेड़ दी है कि जब देश के युवा और छात्र अपनी शैक्षणिक व्यवस्था और भविष्य को बचाने के लिए सड़कों पर संघर्ष कर रहे होते हैं, तब फिल्म इंडस्ट्री के बड़े और नामचीन चेहरे इस पर अपनी चुप्पी क्यों साध लेते हैं।

इस पूरे विवाद की जड़ में पिछले महीने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुआ एक अन्य विरोध प्रदर्शन और उससे जुड़ा नसीरुद्दीन शाह का एक बयान है। जानकारी के अनुसार, कुछ समय पहले दिल्ली में नीट (NEET) पेपर लीक और अन्य शिक्षा संबंधी मुद्दों को लेकर एक आंदोलन हुआ था। उस दौरान देश के जाने-माने अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने एक मीडिया साक्षात्कार में फिल्म जगत और देश के प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा ऐसे गंभीर मुद्दों पर चुप्पी साधे रहने को लेकर तीखी टिप्पणी की थी। उन्होंने करन थापर को दिए गए अपने उस इंटरव्यू में कहा था कि लोग या सेलिब्रेटीज तभी बोलते हैं जब उनका जमीर उनसे ऐसा करने को कहता है। अपनी बात को आगे समझाते हुए नसीरुद्दीन शाह ने एक पुरानी कहावत का इस्तेमाल करते हुए कहा था कि जिस कुत्ते के मुंह में हड्डी होती है, वह भौंक नहीं सकता। उनका आशय यह था कि जिन बड़े कलाकारों के पास सुख-सुविधाएं और लाभ होते हैं, वे सिस्टम के खिलाफ खुलकर बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाते और उनके मुंह पर एक तरह से चुप्पी का ताला लगा रहता है। जैसे ही वह हड्डी उनके मुंह से गिरेगी या उनके दांत टूटेंगे, तभी वे कुछ बोलेंगे।

अब जब रांची में जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित धांधली को लेकर छात्रों का आक्रोश सातवें आसमान पर है और आंदोलन का तीसरा हफ्ता चल रहा है, तब अभिनेता नसीरुद्दीन शाह की इस पूरे मामले पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसी बात पर तंज कसते हुए 'गुलाल', 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' और 'तमाशा' जैसी बेहतरीन फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवाने वाले 63 वर्षीय पीयूष मिश्रा ने बेहद कड़े शब्दों में सवाल उठाया है। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों से मुलाकात करने के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए पीयूष मिश्रा ने नसीरुद्दीन शाह के पुराने बयान का जिक्र किया और तंज कसते हुए कहा कि नसीर साहब, मुझे माफ कीजिएगा और मैं यह बात पूरे सम्मान के साथ कह रहा हूं, लेकिन इस वक्त वे कौन कुत्ते हैं जिनके मुंह में हड्डी है? पीयूष मिश्रा का यह बयान सोशल मीडिया से लेकर हर तरफ चर्चा का विषय बन गया है।

ग्वालियर में जन्मे और प्रतिष्ठित नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) से अभिनय की शिक्षा प्राप्त करने वाले पीयूष मिश्रा ने रांची के इस छात्र आंदोलन और दिल्ली-मुंबई में होने वाले तथाकथित बड़े प्रदर्शनों के बीच का फर्क भी बहुत बेबाकी से सबके सामने रखा। उन्होंने कहा कि रांची में अपनी परीक्षाओं और भविष्य को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे इन छात्रों और दिल्ली के तथाकथित आंदोलनों में एक बड़ा अंतर यह है कि इन ग्रामीण और साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों ने आंदोलन के दौरान पिज्जा या बर्गर नहीं खाया है। संघर्ष के इन कठिन दिनों में इन युवाओं ने केवल साधारण 'दाल-भात' खाकर अपना गुजारा किया है और अपनी मांगों पर अडिग रहे हैं। उन्होंने नसीरुद्दीन शाह को संबोधित करते हुए यह भी सवाल किया कि क्या वे लोग इसलिए चुप रहे क्योंकि उन्हें पिज्जा और बर्गर की तलब थी या फिर इसलिए कि वे जिस भीड़ का हिस्सा थे, वह कोई खास और सुविधासंपन्न वर्ग था? पीयूष मिश्रा ने दो टूक शब्दों में कहा कि वह नसीरुद्दीन शाह का बहुत सम्मान करते हैं, लेकिन अब उन्हें उनसे डर नहीं लगता और वे सच बोलने से पीछे नहीं हटेंगे।

छात्रों को संबोधित करते हुए पीयूष मिश्रा ने संयम और अनुशासन बनाए रखने की भी पुरजोर अपील की। उन्होंने कहा कि वे खुद थोड़े पुराने ख्यालों के इंसान हैं और उन्हें किसी भी तरह की गाली-गलौज या अपशब्दों का इस्तेमाल बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं होता है। उनके अपने दो बेटे हैं जो आज की 'जेन-जी' पीढ़ी से ताल्लुक रखते हैं और राजनीति तथा सामाजिक मुद्दों को लेकर काफी जागरूक हैं। उन्होंने छात्रों से कहा कि सरकार को देश और राज्य चलाना होता है, इसलिए वे बहुत ही सावधानी और सोच-समझकर कदम उठाती हैं और शांति बनाए रखने का प्रयास करती हैं। इसलिए छात्रों का भी यह कर्तव्य बनता है कि वे विरोध प्रदर्शन के दौरान शांति का दामन न छोड़ें और किसी भी प्रकार की अभद्र भाषा का प्रयोग करने से बचें।

दूसरी तरफ, यदि रांची में चल रहे इस पूरे आंदोलन के जमीनी हालात की बात करें तो जेपीएससी और जेएसएससी के खिलाफ चल रहा यह विरोध प्रदर्शन अब और अधिक गंभीर रूप ले चुका है। छात्र लगातार यह मांग कर रहे हैं कि 14वीं जेपीएससी परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं को पूरी तरह से रद्द किया जाए और इसकी स्वतंत्र जांच सीबीआई या फिर उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के पैनल से करवाई जाए। न्याय की इस मांग को लेकर कई छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आमरण अनशन और भूख हड़ताल पर भी बैठे हुए हैं। हालांकि झारखंड सरकार के नुमाइंदों के साथ छात्रों के प्रतिनिधियों की कई दौर की उच्च स्तरीय बातचीत हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद फिलहाल गतिरोध पूरी तरह से समाप्त नहीं हो पाया है और छात्र अपनी जिद पर अड़े हुए हैं।

इस बढ़ते दबाव और तनाव के बीच झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने छात्रों को यह भरोसा दिलाने की कोशिश की है कि उनकी सभी जायज चिंताओं और मांगों पर पूरी गंभीरता से गौर किया जाएगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने लगातार संवाद और पूरी पारदर्शिता बनाए रखने पर जोर दिया है। इस बीच, परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और धांधली को लेकर चल रही सीआईडी (CID) जांच के सिलसिले के बीच जेपीएससी के तीन सदस्यों ने अपने पदों से इस्तीफा भी दे दिया है, जिसे इस पूरे घटनाक्रम में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है। कुल मिलाकर देखा जाए तो जहां एक तरफ छात्र अपने भविष्य की रक्षा के लिए सड़क पर डटे हैं, वहीं पीयूष मिश्रा के इस तीखे बयान ने कला जगत और बुद्धिजीवी वर्ग की भूमिका पर एक बार फिर से तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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