आज सोशल मीडिया से लेकर फिल्मी गलियारों तक हर जगह सिर्फ एक ही नाम की चर्चा है और वो हैं Paresh Rawal। कभी अपनी कॉमिक टाइमिंग से लोगों को पेट पकड़कर हंसाने वाले तो कभी खौफनाक विलेन बनकर स्क्रीन पर डर पैदा करने वाले परेश रावल आज भी बॉलीवुड के सबसे वर्सेटाइल एक्टर्स में गिने जाते हैं। “बाबूराव” का उनका किरदार आज मीम कल्चर का हिस्सा बन चुका है और “हेरा फेरी 3” की खबरों ने एक बार फिर फैंस की एक्साइटमेंट को आसमान पर पहुंचा दिया है। यही वजह है कि नई पीढ़ी से लेकर पुराने सिनेमा प्रेमी तक हर कोई उनके नाम की चर्चा कर रहा है।

मुंबई में एक गुजराती परिवार में जन्मे परेश रावल ने अपने करियर की शुरुआत छोटे किरदारों से की थी। 1985 में आई फिल्म “अर्जुन” से उन्होंने बॉलीवुड में कदम रखा, लेकिन असली पहचान उन्हें “नाम” से मिली। इसके बाद उन्होंने 80 और 90 के दशक में इतने दमदार निगेटिव रोल किए कि लोग उन्हें स्क्रीन पर देखते ही डरने लगे। “राम लखन”, “कब्ज़ा”, “किंग अंकल”, “दौड़” और “मोहरा” जैसी फिल्मों में उनका खतरनाक अंदाज़ लोगों के दिमाग में बस गया। लेकिन यही अभिनेता जब “अंदाज़ अपना अपना” में डबल रोल करता है तो दर्शक हंसते-हंसते लोटपोट हो जाते हैं। यही उनकी सबसे बड़ी ताकत रही कि वो हर किरदार में खुद को पूरी तरह ढाल लेते थे।

1994 उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ जब “वो छोकरी” और “सर” के लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड मिला। “सरदार” में सरदार वल्लभभाई पटेल का किरदार निभाकर उन्होंने साबित कर दिया कि वो सिर्फ कॉमेडी या विलेन तक सीमित नहीं हैं बल्कि गंभीर अभिनय में भी उनका कोई मुकाबला नहीं। इसी दौर में उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड्स भी मिले और इंडस्ट्री में उनकी पहचान एक ऐसे कलाकार की बन गई जो किसी भी रोल को यादगार बना सकता है। यही वजह है कि उन्हें हिंदी सिनेमा के सबसे बेहतरीन कलाकारों में गिना जाता है।

फिर आया साल 2000 और रिलीज हुई “हेरा फेरी”, जिसने परेश रावल की जिंदगी बदल दी। बाबूराव गणपतराव आप्टे का उनका किरदार इतना आइकॉनिक बन गया कि आज भी उसके डायलॉग इंटरनेट पर वायरल होते रहते हैं। “उठा ले रे देवा”, “ये बाबूराव का स्टाइल है” जैसे डायलॉग्स ने उन्हें कल्ट स्टार बना दिया। “फिर हेरा फेरी”, “हंगामा”, “गरम मसाला”, “वेलकम”, “भूल भुलैया”, “भागम भाग”, “दे दना दन” और “चुप चुप के” जैसी फिल्मों में उनकी कॉमिक टाइमिंग ने उन्हें कॉमेडी का बादशाह बना दिया। लेकिन उन्होंने सिर्फ हंसाया ही नहीं, “ओएमजी”, “संजू”, “उरी” और “टेबल नंबर 21” जैसी फिल्मों में इमोशनल और गंभीर किरदार निभाकर दर्शकों को चौंका भी दिया।

फिल्मों के अलावा परेश रावल राजनीति में भी सक्रिय रहे। 2014 में वो अहमदाबाद ईस्ट से सांसद चुने गए और उसी साल भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया। उनकी निजी जिंदगी भी काफी चर्चित रही है। उन्होंने पूर्व मिस इंडिया और अभिनेत्री स्वरूप संपत से शादी की और हमेशा अपनी फैमिली लाइफ को बेहद सादगी से जिया। थिएटर, टेलीविजन और गुजराती नाटकों में भी उनका योगदान शानदार रहा है। हाल ही में “द स्टोरीटेलर”, “सरफिरा” और आने वाली फिल्मों “भूत बंगला”, “वेलकम टू द जंगल” और “हेरा फेरी 3” को लेकर उनका नाम फिर सुर्खियों में बना हुआ है।

आज परेश रावल सिर्फ एक अभिनेता नहीं बल्कि भारतीय सिनेमा की वो पहचान हैं जिन्होंने हर दौर में खुद को साबित किया। विलेन से लेकर कॉमेडी किंग और गंभीर कलाकार तक, उन्होंने हर रंग में दर्शकों का दिल जीता है। यही कारण है कि दशकों बाद भी उनका स्टारडम कम नहीं हुआ और हर नई पीढ़ी उन्हें उतना ही प्यार देती है जितना पुराने दर्शक देते आए हैं।

Pratahkal Newsroom

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