भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता परेश रावल 30 मई 2026 को अपना 71वां जन्मदिन मनाने जा रहे हैं। चार दशकों से अधिक समय तक हिंदी और क्षेत्रीय फिल्मों में अपने सशक्त अभिनय, यादगार किरदारों और बहुआयामी प्रतिभा से दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले रावल का जीवन भारतीय मनोरंजन जगत और सार्वजनिक जीवन दोनों में एक प्रेरणादायक अध्याय माना जाता है।

30 मई 1955 को बॉम्बे (वर्तमान मुंबई) में एक गुजराती परिवार में जन्मे परेश रावल ने अपने शुरुआती जीवन से ही कला और अभिनय की ओर रुझान दिखाया। उन्होंने मुंबई के प्रतिष्ठित नरसी मोनजी कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड इकोनॉमिक्स, विले पार्ले से शिक्षा प्राप्त की। वर्ष 1987 में उन्होंने अभिनेत्री और 1979 की मिस इंडिया विजेता स्वरूप संपत से विवाह किया। इस दंपति के दो पुत्र, आदित्य और अनिरुद्ध हैं।

अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 1985 की फिल्म ‘अर्जुन’ से करने वाले परेश रावल को शुरुआती पहचान दूरदर्शन के धारावाहिक ‘बनते बिगड़ते’ से भी मिली। 1986 की सुपरहिट फिल्म ‘नाम’ ने उन्हें एक मजबूत अभिनेता के रूप में स्थापित किया। इसके बाद उन्होंने 1980 और 1990 के दशक में 100 से अधिक फिल्मों में काम किया, जिनमें अधिकतर खलनायक और गंभीर भूमिकाएँ शामिल रहीं। ‘राम लखन’, ‘मोहरा’, ‘दिलवाले’, ‘चाइना गेट’, ‘शिवा’, ‘आंदाज़ अपना अपना’ और ‘अर्जुन’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय ने दर्शकों और समीक्षकों दोनों का ध्यान आकर्षित किया।

वर्ष 2000 में आई फिल्म ‘हेरा फेरी’ ने उनके करियर को एक नई दिशा दी, जिसमें उन्होंने बाबूराव गणपत राव आप्टे का अमर किरदार निभाया। यह भूमिका भारतीय सिनेमा की सबसे प्रतिष्ठित कॉमेडी भूमिकाओं में से एक बन गई और इसके बाद ‘फिर हेरा फेरी’ ने भी उनकी लोकप्रियता को और बढ़ाया। इसके अलावा ‘आंखें’, ‘हंगामा’, ‘हलचल’, ‘गरम मसाला’, ‘भूल भुलैया’, ‘वेलकम’, ‘दे दना दन’ और ‘गोलमाल’ जैसी फिल्मों में उनके हास्य और चरित्र अभिनय ने उन्हें एक अलग पहचान दी।

1994 में उन्हें फिल्म ‘वो छोकरी’ और ‘सर’ के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जबकि ‘सर’ के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड फॉर बेस्ट नेगेटिव रोल भी मिला। इसके बाद ‘सरदार’ फिल्म में सरदार वल्लभभाई पटेल की भूमिका निभाकर उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा अर्जित की। 2014 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया।

परेश रावल ने न केवल हिंदी बल्कि गुजराती रंगमंच में भी उल्लेखनीय योगदान दिया है, जिनमें उनका चर्चित नाटक ‘डियर फादर’ प्रमुख है। टेलीविजन निर्माण के क्षेत्र में भी उन्होंने ‘तीन बहुरानियां’, ‘मैं ऐसी क्यों हूँ’ और ‘लागी तुझसे लगन’ जैसे धारावाहिकों का निर्माण किया। राजनीतिक क्षेत्र में भी उनका सक्रिय योगदान रहा है। वर्ष 2014 के आम चुनाव में वे भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर अहमदाबाद पूर्व से सांसद चुने गए। इसी वर्ष उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया। वर्ष 2020 में उन्हें राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।

हाल के वर्षों में भी उन्होंने अपनी अभिनय यात्रा जारी रखी। वर्ष 2018 की फिल्म ‘संजू’ में उन्होंने सुनील दत्त की भूमिका निभाई, जबकि 2021 में ‘तूफान’ में उनकी उपस्थिति को सराहा गया। 2025 में वे ‘निकिता रॉय’ और ‘थामा’ जैसी हॉरर फिल्मों में नजर आए, वहीं ‘अजय: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ अ योगी’ और ‘द ताज स्टोरी’ जैसी फिल्मों को लेकर वे विवादों और चर्चाओं में भी रहे।

अपने करियर के पांच दशकों में परेश रावल ने खलनायक से लेकर हास्य अभिनेता, गंभीर कलाकार और राजनीतिक व्यक्तित्व तक की भूमिका निभाकर भारतीय मनोरंजन और सार्वजनिक जीवन में एक असाधारण छाप छोड़ी है। उनका सफर इस बात का प्रमाण है कि निरंतर मेहनत, विविधता और समर्पण किसी भी कलाकार को कालजयी पहचान दिला सकते हैं।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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