आज अगर ओटीटी और बॉलीवुड की दुनिया में किसी अभिनेता का नाम सबसे ज्यादा भरोसे और दमदार एक्टिंग के लिए लिया जाता है, तो वो हैं पंकज त्रिपाठी। सोशल मीडिया पर उनकी सादगी, उनके डायलॉग्स और उनकी नेचुरल एक्टिंग का अलग ही क्रेज़ देखने को मिलता है। “कालीन भैया” से लेकर “रुद्र” और “वकील माधव मिश्रा” तक, उन्होंने हर किरदार को ऐसा निभाया कि लोग उन्हें किरदार के नाम से पहचानने लगे। यही वजह है कि हर नई फिल्म और सीरीज़ में दर्शकों की पहली नज़र अब पंकज त्रिपाठी पर ही रहती है।

बिहार के गोपालगंज जिले के छोटे से गांव बेलसंड में जन्मे पंकज त्रिपाठी का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। किसान परिवार में पले-बढ़े पंकज बचपन में गांव के नाटकों में लड़की का रोल तक निभाया करते थे। पटना में होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से एक्टिंग सीखी। मुंबई पहुंचने के बाद शुरुआती दिनों में उन्हें छोटे-छोटे रोल मिले। “रन”, “ओमकारा”, “अपहरण” और “अग्निपथ” जैसी फिल्मों में लोग उन्हें मुश्किल से नोटिस कर पाए, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

फिर साल 2012 में “गैंग्स ऑफ वासेपुर” ने उनकी जिंदगी बदल दी। सुल्तान के किरदार में उनकी एक्टिंग ने दर्शकों और फिल्ममेकर्स दोनों को चौंका दिया। इसके बाद “फुकरे”, “मसान”, “नील बट्टे सन्नाटा”, “बरेली की बर्फी”, “स्त्री” और “लूडो” जैसी फिल्मों में उन्होंने हर बार साबित किया कि बिना हीरो वाली चमक-दमक के भी कोई कलाकार दिल जीत सकता है। “न्यूटन” में उनकी शानदार परफॉर्मेंस ने उन्हें नेशनल अवॉर्ड स्पेशल मेंशन दिलाया, जबकि “मिमी” में निभाए गए किरदार ने उन्हें नेशनल फिल्म अवॉर्ड और फिल्मफेयर अवॉर्ड दोनों जिताए।

ओटीटी की दुनिया में भी पंकज त्रिपाठी ने ऐसा दबदबा बनाया कि आज उन्हें भारत के सबसे बड़े डिजिटल स्टार्स में गिना जाता है। “मिर्जापुर” के कालीन भैया ने उन्हें घर-घर में मशहूर कर दिया। उनका शांत चेहरा और खतरनाक अंदाज़ दर्शकों के बीच कल्ट बन गया। वहीं “क्रिमिनल जस्टिस” में वकील माधव मिश्रा के रोल ने दिखाया कि वो सिर्फ गैंगस्टर नहीं, बल्कि हर तरह के किरदार में जान डाल सकते हैं। “सेक्रेड गेम्स”, “कागज़” और हॉलीवुड फिल्म “एक्सट्रैक्शन” तक, उन्होंने हर प्लेटफॉर्म पर अपनी अलग पहचान बनाई।

पंकज त्रिपाठी की सबसे बड़ी ताकत उनकी सादगी और नेचुरल एक्टिंग मानी जाती है। वो उन कलाकारों में हैं जो बिना ज्यादा ड्रामा किए सिर्फ आंखों और आवाज़ से पूरा सीन यादगार बना देते हैं। यही कारण है कि बड़े निर्देशक और निर्माता उनके लिए खास रोल लिखने लगे हैं। “ओएमजी 2”, “फुकरे 3”, “मैं अटल हूं” और “स्त्री 2” जैसी फिल्मों ने फिर साबित किया कि उनका स्टारडम लगातार बढ़ता जा रहा है। एक्टिंग के साथ-साथ वो सामाजिक कामों में भी काफी एक्टिव रहते हैं और अपने गांव में लाइब्रेरी तक खुलवा चुके हैं।

आज पंकज त्रिपाठी सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा हैं जो छोटे शहरों से बड़े सपने लेकर निकलते हैं। बिना किसी फिल्मी बैकग्राउंड के उन्होंने जिस तरह अपनी मेहनत और टैलेंट के दम पर बॉलीवुड और ओटीटी में राज किया है, वही उन्हें बाकी सितारों से अलग बनाता है। शायद यही वजह है कि हर तरफ सिर्फ एक ही चर्चा है — पंकज त्रिपाठी का दौर अभी खत्म नहीं, बल्कि और बड़ा होने वाला है।

Pratahkal Newsroom

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