आज भी जब हिंदी सिनेमा के सबसे शानदार कैरेक्टर एक्टर्स की बात होती है, तो Om Prakash का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। सोशल मीडिया पर उनकी फिल्मों के क्लिप्स लगातार वायरल होते रहते हैं और नई पीढ़ी भी उनकी कॉमिक टाइमिंग की दीवानी है। चाहे “पड़ोसन” का मजेदार अंदाज़ हो, “चुपके चुपके” की नैचुरल कॉमेडी या “शराबी” में निभाया गया भावुक किरदार, ओम प्रकाश हर रोल में ऐसे घुल जाते थे कि दर्शक उन्हें किरदार नहीं, असली इंसान मान बैठते थे। यही वजह है कि दशकों बाद भी उनका नाम बॉलीवुड के सबसे भरोसेमंद कलाकारों में लिया जाता है।

लाहौर में जन्मे ओम प्रकाश का असली नाम ओम प्रकाश छिब्बर था। बचपन से ही उन्हें थिएटर, संगीत और फिल्मों का शौक था। सिर्फ बारह साल की उम्र में उन्होंने क्लासिकल म्यूजिक सीखना शुरू कर दिया था और रामलीला में सीता का किरदार भी निभाया करते थे। बाद में उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो जॉइन किया, जहां “फतेह दीन” नाम से उनकी आवाज़ पंजाब भर में मशहूर हो गई। उनकी शानदार मिमिक्री और लोगों को हंसाने की कला ने उन्हें आम लोगों के बीच स्टार बना दिया। एक शादी समारोह में उनकी परफॉर्मेंस देखकर फिल्ममेकर दलसुख पंचोली इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने उन्हें फिल्म “दासी” में मौका दे दिया और यहीं से शुरू हुई हिंदी सिनेमा के एक अनमोल कलाकार की कहानी।

बंटवारे के बाद ओम प्रकाश मुंबई पहुंचे और यहां उन्होंने अपने टैलेंट से इंडस्ट्री के बड़े-बड़े सितारों के बीच अलग पहचान बनाई। Dilip Kumar, Raj Kapoor, Kishore Kumar, Dev Anand और Ashok Kumar जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ काम करते हुए भी उन्होंने कभी खुद को भीड़ में खोने नहीं दिया। “आज़ाद”, “हावड़ा ब्रिज”, “तेरे घर के सामने”, “दिल तेरा दीवाना” और “मिस मैरी” जैसी फिल्मों में उनका अंदाज़ इतना अलग था कि दर्शक उन्हें देखते ही मुस्कुरा उठते थे। उनकी सबसे बड़ी ताकत थी कि वो कॉमेडी और इमोशन दोनों को बराबर गहराई से निभाते थे। यही वजह रही कि वो सिर्फ कॉमिक कलाकार नहीं, बल्कि एक कम्प्लीट एक्टर बन गए।

ओम प्रकाश की फिल्मोग्राफी इतनी लंबी और शानदार है कि उसे हिंदी सिनेमा का खजाना कहा जा सकता है। “प्यार किए जा”, “पड़ोसन”, “गोपी”, “जॉनी आई लव यू”, “गोलमाल”, “नमक हलाल”, “शराबी”, “जंजीर”, “जॉली”, “लावारिस” और “चमेली की शादी” जैसी फिल्मों में उनके किरदार आज भी याद किए जाते हैं। खास तौर पर “गोपी” में उनकी एक्टिंग को लेकर एक किस्सा बेहद मशहूर है। कहा जाता है कि Dilip Kumar ने खुद माना था कि अपने पूरे करियर में अगर वो किसी अभिनेता से डरे, तो वो ओम प्रकाश थे, क्योंकि “गोपी” में उनका अभिनय कई जगह भारी पड़ गया था। यह तारीफ बताती है कि ओम प्रकाश सिर्फ हंसाने वाले कलाकार नहीं थे, बल्कि अभिनय की एक पूरी संस्था थे।

करीब 307 फिल्मों में काम करने वाले ओम प्रकाश ने सिर्फ अभिनय ही नहीं किया, बल्कि फिल्म निर्माण में भी हाथ आजमाया। “जहांआरा”, “संजोग” और “गेटवे ऑफ इंडिया” जैसी फिल्मों का निर्माण करके उन्होंने पर्दे के पीछे भी अपनी रचनात्मकता दिखाई। उनकी खासियत यह थी कि वो हर उम्र, हर तरह और हर मूड के किरदार को इतनी सहजता से निभाते थे कि दर्शकों को लगता था जैसे कहानी उन्हीं के इर्द-गिर्द घूम रही हो। उनके चेहरे की मासूमियत, आवाज़ का उतार-चढ़ाव और संवाद बोलने का तरीका उन्हें बाकी कलाकारों से अलग बनाता था।

1998 में दिल का दौरा पड़ने से ओम प्रकाश ने दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन उनका काम आज भी जिंदा है। ओटीटी और सोशल मीडिया के दौर में उनकी फिल्मों के सीन फिर से वायरल हो रहे हैं और लोग उन्हें हिंदी सिनेमा का “ऑरिजिनल कैरेक्टर किंग” कह रहे हैं। नई पीढ़ी उन्हें देखकर समझ रही है कि बिना ओवरएक्टिंग के भी दर्शकों के दिल जीते जा सकते हैं। यही वजह है कि ओम प्रकाश आज भी सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा की एक अमर याद बन चुके हैं।

Pratahkal Newsroom

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