महाप्रभु जगन्नाथ फिल्म विवाद: रिलीज से पहले हाईकोर्ट की रोक, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
महाप्रभु जगन्नाथ फिल्म रिलीज विवाद में ओडिशा हाईकोर्ट ने भगवान जगन्नाथ के चित्रण पर आपत्तियों के बाद रोक लगाई है। जानिए कोर्ट का आदेश, मंदिर समिति की आपत्ति और सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई की पूरी जानकारी।

एनिमेटेड फिल्म 'महाप्रभु जगन्नाथ' का आधिकारिक पोस्टर, जिसमें फिल्म का शीर्षक और मुख्य पात्र नजर आ रहे हैं।
ओडिशा हाईकोर्ट ने एनिमेटेड फिल्म ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ की रिलीज पर रोक लगा दी है। फिल्म 17 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली थी, लेकिन भगवान जगन्नाथ के चित्रण को लेकर उठी आपत्तियों के बाद रिलीज से एक दिन पहले अदालत ने यह अंतरिम आदेश जारी किया। अब ओडिशा हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार (16 जुलाई) को सुनवाई करेगा।
ओडिशा हाईकोर्ट ने कहा कि भगवान जगन्नाथ के चित्रण को लेकर उठाई गई आपत्तियों पर फिल्म के प्रदर्शन से पहले विस्तृत न्यायिक जांच की आवश्यकता है। हाईकोर्ट का यह आदेश अंगुल निवासी महेश कुमार साहू, पुरी निवासी डॉ. प्रमोद कुमार आचार्य और निमापाड़ा निवासी उमाशंकर आचार्य की ओर से दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान आया।
मुख्य न्यायाधीश हरिश टंडन और न्यायमूर्ति एमएस रमन की खंडपीठ ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए संबंधित पक्षों को निर्देश दिया कि वे 17 जुलाई और उसके बाद फिल्म को अदालत की अनुमति के बिना या अगली सुनवाई तक, जो भी पहले हो, रिलीज न करें। मामले की अगली सुनवाई 5 अगस्त को निर्धारित की गई है।
याचिका में फिल्म के प्रमाणन को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) से रद्द करने और ओडिशा में इसकी सार्वजनिक स्क्रीनिंग पर रोक लगाने की मांग की गई थी। फिल्म की रिलीज पर रोक लगने के बाद इसकी मीडिया स्क्रीनिंग भी रद्द कर दी गई।
‘महाप्रभु जगन्नाथ’ विवाद की शुरुआत तब हुई जब श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति ने फिल्म निर्माताओं से रिलीज टालने की अपील की। समिति ने आरोप लगाया कि फिल्म में भगवान जगन्नाथ के जीवन को काल्पनिक रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो हिंदू धर्मग्रंथों से मेल नहीं खाता।
6 जून को फिल्म का टीजर जारी होने के बाद श्रद्धालुओं, याचिकाकर्ताओं, श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन और अन्य पक्षों ने भगवान जगन्नाथ के चित्रण और फिल्म के शीर्षक को लेकर आपत्तियां जताईं।
याचिका के अनुसार, बाद में पुरी के गजपति महाराज की मौजूदगी में फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग आयोजित की गई, जिसमें फिल्म को स्थापित मंदिर परंपराओं और धार्मिक ग्रंथों के अनुरूप नहीं बताया गया।
पुरी के नाममात्र राजा और श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति (SJITMC) के अध्यक्ष गजपति महाराजा दिब्यसिंह देव ने PTI से कहा, “फिल्म का आधिकारिक ट्रेलर, जो जारी हो चुका है और सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है, श्री जगन्नाथ महाप्रभु की पूरी तरह काल्पनिक कहानी प्रस्तुत करता है। यह कहानी हमारे धर्मग्रंथों में वर्णित पवित्र कथाओं के विपरीत है।”
उन्होंने कहा कि भगवान जगन्नाथ की महिमा को दिखाने का कोई भी प्रयास धार्मिक ग्रंथों में दिए गए विवरणों के अनुरूप होना चाहिए, विशेष रूप से उन विवरणों के अनुसार जिन्हें महर्षि वेदव्यास ने संकलित किया है, जिन्होंने वेदों और पुराणों की रचना की और भगवान जगन्नाथ को भगवान कृष्ण के स्वरूप के रूप में वर्णित किया।
उन्होंने आगे कहा कि भगवान के “विकृत और काल्पनिक” चित्रण से दुनियाभर के लाखों श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हो सकती हैं।
गजपति महाराजा दिब्यसिंह देव ने कहा, “इसलिए मैं इस फिल्म के निर्माता भुवनेश्वर स्थित Ele Animations Pvt Ltd से अपील करता हूं कि वह सिनेमाघरों या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस फिल्म की रिलीज को तब तक स्थगित करें, जब तक कि फिल्म की सामग्री को श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) द्वारा नियुक्त विशेषज्ञों से प्रमाणित न करा लिया जाए।”
फिल्म निर्माता की ओर से याचिका का विरोध करते हुए अधिवक्ता गौतम मुखर्जी ने दलील दी कि फिल्म में इसे काल्पनिक कृति बताने वाला डिस्क्लेमर दिया गया है। उन्होंने कहा कि फिल्म को संविधान में दिए गए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का संरक्षण प्राप्त है और जनहित याचिका अंतिम समय में दाखिल की गई है।
‘महाप्रभु जगन्नाथ’ एक एनिमेटेड पौराणिक फिल्म है, जिसका निर्माण Ele Animations ने किया है और निर्देशन श्रीपद वारखेडकर ने किया है। फिल्म में प्राची सेव साथी, सोनल कौशल और आदित्यराज शर्मा ने आवाज दी है।
Ele Animations के दुर्गा प्रसाद दलई ने भी फिल्म पर लगी रोक को लेकर आधिकारिक बयान जारी किया। उन्होंने कहा, “महाप्रभु जगन्नाथ हमारी एनिमेटेड सीरीज जय जगन्नाथ का विस्तार है, जिसे भगवान जगन्नाथ और उनके भक्तों के लिए पूरी ईमानदारी, निष्ठा और भक्ति के साथ बनाया गया है। यह फिल्म एक भक्त के महाप्रभु जगन्नाथ के प्रति भाव (भक्ति) का हृदयस्पर्शी चित्रण है और हमारा ऐसा कोई दावा नहीं है।”
उन्होंने आगे कहा, “हम हर श्रद्धालु और भगवान जगन्नाथ के मार्ग का अनुसरण करने वाले सभी लोगों की भावनाओं का गहरा सम्मान करते हैं। हम केवल यह चाहते हैं कि दर्शकों को फिल्म देखने का अवसर मिले और वे स्वयं निर्णय ले सकें। इस रथ यात्रा पर हमारी इच्छा है कि फिल्म बच्चों और परिवारों तक पहुंचे और उन्हें भगवान जगन्नाथ के बारे में अधिक जानने तथा संस्कृति और मूल्यों को आत्मसात करने के लिए प्रेरित करे। हमने इस फिल्म को अपने दिल, आत्मा और शुद्ध इरादों के साथ आस्था, संस्कृति और भक्ति का उत्सव मनाने के लिए बनाया है।”
बयान में आगे कहा गया, “फिल्म को हिंदी, ओडिया और तेलुगु भाषाओं में CBFC से U सर्टिफिकेट प्राप्त हुआ है और हमने माननीय सुप्रीम कोर्ट में समीक्षा याचिका दायर की है। चूंकि मामला वर्तमान में न्यायालय के विचाराधीन है, इसलिए हम इस पर आगे टिप्पणी करने से बचेंगे और न्यायिक प्रक्रिया में अपना विश्वास रखते हैं। प्रणाम प्रभु जगन्नाथ।”

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