बॉलीवुड के दिग्गज फिल्म निर्माता राज कपूर का प्रभाव भारतीय सीमाओं से परे किस कदर फैला हुआ था, इसका एक अनूठा अनुभव उनके पोते और जाने-माने उद्योगपति निखिल नंदा ने साझा किया है। श्वेता बच्चन नंदा के पति और राज कपूर के नाती निखिल नंदा ने हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान अपने जीवन के एक ऐसे संस्मरण का उल्लेख किया, जिसने उन्हें उनके दादाजी की वैश्विक लोकप्रियता और उनकी विरासत की असली ताकत का अहसास कराया। निखिल के अनुसार, बचपन में वे राज कपूर को केवल एक स्नेही और देखभाल करने वाले दादाजी के रूप में जानते थे, जिन्हें वे गर्मियों की छुट्टियों में मुंबई स्थित गीता भवन और रवि कैफे जैसे स्थानों पर साथ समय बिताते हुए देखते थे। उस समय उन्हें इस बात का भान नहीं था कि उनके दादाजी भारतीय सिनेमा के इतिहास के सबसे बड़े नामों में से एक हैं।

राज कपूर की ख्याति और उनके प्रति लोगों के अटूट सम्मान की वास्तविक गहराई का अनुभव निखिल नंदा को तब हुआ जब वे उच्च शिक्षा के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका गए। पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान, एक भीषण बर्फीले तूफान में फंसे होने के दौरान निखिल ने एक टैक्सी ली। उस टैक्सी में राज कपूर के फिल्मी गीतों की धुन बज रही थी और चालक एक रूसी नागरिक था। जब निखिल ने उस ड्राइवर को बताया कि राज कपूर उनके दादाजी हैं, तो चालक ने पहले तो इसे मजाक समझा। हालाँकि, जब निखिल ने अपने पास मौजूद पारिवारिक तस्वीर दिखाकर इसकी पुष्टि की, तो चालक ने गाड़ी रोक दी। उस क्षण का महत्व यह था कि उस रूसी ड्राइवर ने राज कपूर के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए निखिल से उस यात्रा का कोई किराया नहीं लिया।

इस घटना के अलावा, निखिल नंदा ने अपने दादाजी द्वारा दी गई एक ऐसी शिक्षा का भी उल्लेख किया, जो आज भी उनके जीवन का मार्गदर्शन करती है। बारह वर्ष की आयु में जब निखिल ने राज कपूर से पूछा कि वे एक पोते के रूप में उनसे क्या अपेक्षा रखते हैं, तो उन्होंने एक गहरे अर्थ वाली सीख दी। राज कपूर ने कहा था कि असली धन और प्रतिष्ठा वह है, जिसे सेवानिवृत्ति के बाद आप स्वयं अर्जित करें। उन्होंने निखिल को समझाया कि यदि वे एक सामान्य तिपहिया वाहन (ऑटो रिक्शा) से उतरें और लोग उनके द्वारा समाज में किए गए कार्यों और फैलाए गए प्रेम के कारण उनका सम्मान करें, तो वही उनकी वास्तविक सफलता होगी। राज कपूर की यह सीख निखिल के जीवन का मूल मंत्र बन गई है, जिसे वे अब अपने बच्चों, नव्या नवेली नंदा और अभिनेता अगस्त्य नंदा के पालन-पोषण में भी आत्मसात करते हुए देखते हैं, जो अपनी-अपनी राहों पर आगे बढ़ रहे हैं। राज कपूर द्वारा छोड़ी गई यह विरासत केवल सिनेमाई नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों और जन-संबधों की एक ऐसी पूंजी है, जिसने आज भी दुनिया भर में उनके नाम को जीवंत रखा हुआ है।

Pratahkal Newsroom

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