हिंदी सिनेमा के सबसे प्रतिभाशाली और बहुमुखी अभिनेताओं में गिने जाने वाले नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी 19 मई 2026 को अपना 52वां जन्मदिन मना रहे हैं। उत्तर प्रदेश के एक छोटे से कस्बे से निकलकर बॉलीवुड और अंतरराष्ट्रीय मंच तक अपनी अलग पहचान बनाने वाले नवाज़ुद्दीन का जीवन संघर्ष, आत्मसम्मान और जुनून की ऐसी कहानी है, जिसने लाखों युवाओं को प्रेरित किया है। उनकी यात्रा सिर्फ एक अभिनेता बनने की कहानी नहीं, बल्कि उन मुश्किल रास्तों की दास्तान है जिन्हें उन्होंने अपने दम पर तय किया।

19 मई 1974 को उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर जिले के बुढ़ाना कस्बे में जन्मे नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी एक ज़मींदार मुस्लिम परिवार से आते हैं। वह आठ भाई-बहनों में सबसे बड़े हैं। उनका बचपन उत्तराखंड में बीता और उन्होंने हरिद्वार स्थित गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय से रसायन विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के बाद उन्होंने वडोदरा में एक केमिस्ट के तौर पर काम किया, लेकिन मन कहीं और था। अभिनय की दुनिया उन्हें लगातार अपनी ओर खींच रही थी। इसी जुनून ने उन्हें दिल्ली पहुंचाया, जहां उन्होंने राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में प्रवेश पाने के लिए थिएटर की राह चुनी।

दिल्ली में संघर्ष के दिनों में नवाज़ुद्दीन ने खुद को संभालने के लिए चौकीदार की नौकरी तक की। हालांकि, उन्होंने कई बार स्पष्ट किया कि यह नौकरी उन्होंने गरीबी की वजह से नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर रहने के लिए की थी। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर नहीं थी, लेकिन वह अपने सपनों के लिए घरवालों से पैसे नहीं लेना चाहते थे। उनके माता-पिता हमेशा मदद के लिए तैयार रहते थे, लेकिन नवाज़ुद्दीन ने अपने संघर्ष को खुद जीने का फैसला किया। यही आत्मसम्मान आगे चलकर उनकी पहचान बना।

अभिनेता नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी

संघर्ष के उसी दौर में उन्होंने छोटे-छोटे काम भी किए, जिनमें सुरक्षा गार्ड की नौकरी और धनिया बेचने तक शामिल था। थिएटर करते हुए उन्होंने अभिनय की बारीकियां सीखीं और धीरे-धीरे फिल्मों में छोटे रोल मिलने लगे। शुरुआती दौर में उन्हें “सरफरोश”, “शूल” और “मुन्ना भाई एमबीबीएस” जैसी फिल्मों में छोटी भूमिकाएं मिलीं, लेकिन असली पहचान उन्हें अनुराग कश्यप की फिल्म “ब्लैक फ्राइडे” और फिर “गैंग्स ऑफ वासेपुर” से मिली। इसके बाद “द लंचबॉक्स”, “किक”, “बजरंगी भाईजान”, “रईस”, “मॉम” और “मंटो” जैसी फिल्मों ने उन्हें आलोचकों और दर्शकों दोनों का पसंदीदा अभिनेता बना दिया।

नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी सिर्फ बॉलीवुड तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी मजबूत पहचान बनाई। नेटफ्लिक्स की चर्चित सीरीज़ “सेक्रेड गेम्स” और ब्रिटिश शो “मैकमाफिया” में उनके अभिनय को दुनियाभर में सराहा गया। उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, फिल्मफेयर पुरस्कार, आईफा अवॉर्ड और इंटरनेशनल एमी नामांकन जैसे कई बड़े सम्मान मिले।

उनकी निजी जिंदगी भी अक्सर सुर्खियों में रही। युवावस्था में उनकी मुलाकात अंजलि नाम की लड़की से हुई, जो उनके ही गांव से थीं। दोनों का रिश्ता बाद में टूट गया, लेकिन समय के साथ दोनों फिर करीब आए और शादी कर ली। शादी के बाद अंजलि ने अपना नाम आलिया सिद्दीकी रख लिया। दोनों के दो बच्चे हैं। हालांकि, साल 2020 में आलिया ने सोशल मीडिया पर तलाक की घोषणा कर दी थी। नवाज़ुद्दीन का नाम अभिनेत्री निहारिका सिंह और एक अमेरिकी महिला सुज़ैन के साथ भी जुड़ा।

आज नवाज़ुद्दीन मुंबई में अपने छोटे भाई शमास नवाब के साथ रहते हैं, जो फिल्म निर्देशक हैं। अभिनय की व्यस्तता से दूर वह अक्सर अपने गांव बुढ़ाना लौट जाते हैं, जहां उनका फार्महाउस है और जहां वह सुकून के पल बिताना पसंद करते हैं। चौकीदार से लेकर “वॉच मी” मैन बनने तक का नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी का सफर भारतीय सिनेमा में संघर्ष और सफलता की सबसे प्रेरणादायक कहानियों में से एक माना जाता है। 52वें जन्मदिन पर उनका यह सफर सिर्फ एक अभिनेता की उपलब्धि नहीं, बल्कि उस जज़्बे की मिसाल है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपनों को सच करने का हौसला देता है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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