नेशनल डॉक्टर्स डे के अवसर पर भारतीय सिनेमा और वेब सीरीज़ के उन यादगार डॉक्टर किरदारों को एक बार फिर याद किया जा रहा है, जिन्होंने अपने अभिनय से चिकित्सा पेशे को केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि सेवा, संवेदनशीलता और समर्पण का प्रतीक बनाकर दर्शकों के दिलों में स्थायी जगह बनाई। संजय दत्त के अनोखे 'मुन्ना भाई' से लेकर 'ग्राम चिकित्सालय 2' में अमोल पाराशर के डॉ. प्रभात सिन्हा और आकांक्षा रंजन कपूर की डॉ. गार्गी तक, इन सभी किरदारों ने अपनी अलग पहचान बनाई।

फिल्म '3 इडियट्स' में करीना कपूर खान ने डॉ. पिया सहस्रबुद्धे की भूमिका निभाई, जो एक सख्त और दकियानूसी कॉलेज प्रिंसिपल की बेटी होने के बावजूद बेहद विनम्र, दयालु, जमीन से जुड़ी और संवेदनशील डॉक्टर थीं। उन्होंने हमेशा अपने मरीजों को प्राथमिकता दी। चाहे राजू का इलाज करना हो, उसके पिता की मदद करनी हो या वेबकैम के जरिए अपनी बहन की डिलीवरी में छात्रों का मार्गदर्शन करना हो, हर परिस्थिति में उनकी संवेदनशीलता और निस्वार्थ सेवा ने इस किरदार को यादगार बना दिया।

फिल्म 'कल हो ना हो' में सोनाली बेंद्रे ने डॉ. प्रिया की भूमिका निभाई, जो कैंसर से जूझ रहे शाहरुख खान द्वारा निभाए गए अमन माथुर की करीबी दोस्त हैं। डॉक्टर होने के साथ-साथ वह कठिन समय में अमन का हर कदम पर साथ देती हैं और बीमारी के खिलाफ उसकी बहादुरी भरी लड़ाई में मजबूत सहारा बनती हैं।

वेब सीरीज़ 'ग्राम चिकित्सालय' में अमोल पाराशर ने डॉ. प्रभात सिन्हा का किरदार निभाया है। वह एक सम्मानित डॉक्टर के बेटे हैं, जो आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के जरिए स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार का सपना लेकर भटकंदी गांव पहुंचते हैं। पहले सीज़न में उन्हें ग्रामीणों का भरोसा जीतने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता है, क्योंकि गांव के लोग एक "गूगल डॉक्टर" पर निर्भर रहते हैं। हालांकि अपनी लगन, ईमानदारी और समर्पण से वह धीरे-धीरे सभी का विश्वास जीत लेते हैं। हाल ही में रिलीज़ हुए सीज़न 2 में लोग इलाज के लिए उनके पास आने लगते हैं। नई चुनौतियों के बीच उनका आशावाद, दृढ़ संकल्प और करुणा इस किरदार को और अधिक प्रभावशाली बनाते हैं।

इसी सीरीज़ में आकांक्षा रंजन कपूर ने डॉ. गार्गी का किरदार निभाया है, जिन्होंने पहले सीज़न से लेकर हाल ही में रिलीज़ हुए सीज़न 2 तक दर्शकों का दिल जीता है। छोटे शहर की संवेदनशील डॉक्टर के रूप में वह डॉ. प्रभात सिन्हा की मजबूत सहयोगी बनी रहती हैं। साथ ही मातृ स्वास्थ्य (Maternal Healthcare) और अस्पतालों में सुरक्षित डिलीवरी को बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्य करती हैं। मरीजों के प्रति उनका समर्पण, ईमानदारी, गर्मजोशी और शांत व्यक्तित्व उन्हें हाल के वर्षों के सबसे यादगार डॉक्टर किरदारों में शामिल करता है।

फिल्म 'कबीर सिंह' में शाहिद कपूर ने डॉ. कबीर सिंह की भूमिका निभाई। वह एक बेहद काबिल सर्जन हैं, जिनकी मेडिकल प्रतिभा जितनी असाधारण है, उतने ही उनके जीवन में भावनात्मक उतार-चढ़ाव भी हैं। शराब की लत और मानसिक संघर्षों के बावजूद ऑपरेशन थिएटर में उनका असाधारण कौशल कभी प्रभावित नहीं होता। उनका आत्मविश्वास, मेडिकल उत्कृष्टता और भावनात्मक सफर इस किरदार को सिनेमा के सबसे चर्चित डॉक्टर पात्रों में शामिल करता है।

वहीं 'मुन्ना भाई एम.बी.बी.एस.' में संजय दत्त ने मुन्ना का किरदार निभाया, जो मुंबई का एक नेकदिल गैंगस्टर है और एंट्रेंस परीक्षा में चीटिंग कर मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लेता है। भले ही वह पारंपरिक डॉक्टर नहीं होता, लेकिन अपनी करुणा, सहानुभूति और मशहूर "जादू की झप्पी" से मरीजों का दिल जीत लेता है। दवाइयों से अधिक अपनापन और मानवीय संवेदनाओं के जरिए इलाज करने की उसकी सोच ने इस किरदार को भारतीय सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित और यादगार डॉक्टर पात्रों में हमेशा के लिए स्थापित कर दिया।

नेशनल डॉक्टर्स डे के अवसर पर ये सभी किरदार चिकित्सा पेशे की मानवीय संवेदनाओं, सेवा भावना, समर्पण और मरीजों के प्रति जिम्मेदारी का सशक्त प्रतिनिधित्व करते हैं। यही कारण है कि वर्षों बाद भी ये ऑन-स्क्रीन डॉक्टर दर्शकों के दिलों में अपनी अलग और स्थायी पहचान बनाए हुए हैं।

Pratahkal Bureau

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