जब भी भारतीय सिनेमा में दमदार एक्टिंग, गहरी आवाज़ और स्क्रीन पर रूह तक उतर जाने वाले किरदारों की बात होती है, तो सबसे पहले नाम आता है Naseeruddin Shah का। आज भी सोशल मीडिया पर उनकी फिल्मों के डायलॉग, इंटरव्यू और बेबाक बयान वायरल हो जाते हैं। चाहे बात ‘आक्रोश’ जैसी गंभीर फिल्म की हो, ‘जाने भी दो यारों’ की कल्ट कॉमेडी हो या फिर ‘ए वेडनेसडे’ का थ्रिल, नसीरुद्दीन शाह ने हर दौर में खुद को सबसे अलग साबित किया। यही वजह है कि उन्हें सिर्फ अभिनेता नहीं, बल्कि एक्टिंग का स्कूल कहा जाता है।

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में एक नवाबी परिवार में जन्मे नसीरुद्दीन शाह का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा। पढ़ाई अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से हुई और फिर दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा ने उनके भीतर के कलाकार को नई पहचान दी। उस दौर में जब बॉलीवुड में सिर्फ बड़े हीरो और ग्लैमर का बोलबाला था, तब नसीरुद्दीन शाह ने पैरेलल सिनेमा को अपनी ताकत बनाया। ‘निशांत’, ‘स्पर्श’, ‘मिर्च मसाला’, ‘मंडी’ और ‘अर्ध सत्य’ जैसी फिल्मों ने उन्हें एक्टिंग का सबसे भरोसेमंद चेहरा बना दिया। उनकी खासियत यही रही कि वो किरदार निभाते नहीं थे, बल्कि खुद उस किरदार में ढल जाते थे।

फिर आया वो दौर जब उन्होंने मेनस्ट्रीम सिनेमा में भी अपनी धाक जमा दी। ‘मासूम’ में भावुक पिता, ‘कर्मा’ में दमदार मौजूदगी, ‘मोहरा’ में खतरनाक विलेन और ‘सरफरोश’ में ग़ज़ल गायक के चेहरे के पीछे छिपा आतंकवादी मास्टरमाइंड, हर रोल ने दर्शकों को चौंका दिया। ‘इकबाल’ में शराबी कोच का किरदार हो या ‘द डर्टी पिक्चर’ में उनका अलग अंदाज़, नसीरुद्दीन शाह हर पीढ़ी के दर्शकों के लिए प्रासंगिक बने रहे। हॉलीवुड फिल्म ‘द लीग ऑफ एक्स्ट्राऑर्डिनरी जेंटलमेन’ में कैप्टन नीमो बनकर उन्होंने इंटरनेशनल स्तर पर भी भारतीय कलाकारों का नाम रोशन किया।

सिर्फ फिल्मों तक ही नहीं, थिएटर और टेलीविजन में भी उनका योगदान बेहद बड़ा रहा है। ‘मिर्जा गालिब’ सीरियल में उनकी अदाकारी आज भी लोगों को याद है। उन्होंने टॉम ऑल्टर और बेंजामिन गिलानी के साथ मिलकर ‘मोटले प्रोडक्शंस’ नाम का थिएटर ग्रुप बनाया, जिसने भारतीय रंगमंच को नई पहचान दी। निर्देशक के तौर पर भी उन्होंने ‘यूँ होता तो क्या होता’ जैसी फिल्म बनाई। उनकी आत्मकथा ‘एंड देन वन डे’ भी काफी चर्चा में रही, जिसमें उन्होंने अपनी जिंदगी के संघर्ष, रिश्तों और फिल्म इंडस्ट्री के कई अनसुने किस्से साझा किए।

नसीरुद्दीन शाह की निजी जिंदगी भी हमेशा चर्चा में रही। अभिनेत्री Ratna Pathak Shah के साथ उनकी जोड़ी इंडस्ट्री की सबसे सम्मानित जोड़ियों में गिनी जाती है। दोनों ने कई फिल्मों और थिएटर प्रोजेक्ट्स में साथ काम किया और आज भी उनकी केमिस्ट्री लोगों को पसंद आती है। उनके बेटे इमाद शाह और विवान शाह भी अभिनय की दुनिया में सक्रिय हैं। नसीरुद्दीन शाह का परिवार पूरी तरह कला और अभिनय से जुड़ा हुआ माना जाता है।

पुरस्कारों की बात करें तो नसीरुद्दीन शाह का करियर उपलब्धियों से भरा पड़ा है। तीन नेशनल अवॉर्ड, तीन फिल्मफेयर अवॉर्ड, वेनिस फिल्म फेस्टिवल का प्रतिष्ठित वोल्पी कप और भारत सरकार की तरफ से पद्मश्री और पद्मभूषण सम्मान उनके शानदार सफर की गवाही देते हैं। लेकिन असली सम्मान उन्हें दर्शकों के दिलों से मिला है। यही वजह है कि दशकों बाद भी जब अभिनय की बात होती है, तो नसीरुद्दीन शाह का नाम सबसे ऊपर लिया जाता है। वो सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा की जीवित विरासत हैं।

Pratahkal Newsroom

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