आज हर तरफ जिस शख्स की चर्चा है, वो सिर्फ सिनेमा का सुपरस्टार नहीं बल्कि राजनीति और समाज सेवा का भी बड़ा नाम है। हम बात कर रहे हैं नंदमुरी बालकृष्णा की, जिन्हें फैंस प्यार से ‘बालैया’ या ‘एनबीके’ कहते हैं। 2025 में पद्म भूषण मिलने और 50 साल पूरे कर वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज होने के बाद वह एक बार फिर सुर्खियों के केंद्र में हैं। 1960 में जन्मे बालकृष्णा आज भी अपने दमदार स्क्रीन प्रेजेंस और सशक्त व्यक्तित्व के लिए जाने जाते हैं।

उनकी कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं लगती। वह भारतीय सिनेमा के दिग्गज और आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एन. टी. रामाराव के बेटे हैं। महज 14 साल की उम्र में उन्होंने 1974 की फिल्म ‘तत्तम्मा कला’ से बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट डेब्यू किया था। बचपन से ही फिल्मी माहौल में पले-बढ़े बालकृष्णा ने अपने करियर की नींव बेहद मजबूत रखी और धीरे-धीरे तेलुगु सिनेमा में अपनी अलग पहचान बना ली।

80 और 90 के दशक में उन्होंने ‘मंगम्मागारी मनवाडु’, ‘मुद्दुला मावय्या’, ‘नारी नारी नडुमा मुरारी’, ‘अदित्य 369’, ‘राउडी इंस्पेक्टर’ और ‘भैरव द्वीपम’ जैसी फिल्मों से मास एंटरटेनर की छवि बना ली। उनकी फिल्मों में एक्शन, इमोशन और देसी मसाले का ऐसा तड़का होता था कि दर्शक सिनेमाघरों में झूम उठते थे। इस दौर ने उन्हें तेलुगु सिनेमा का असली ‘मास हीरो’ बना दिया।

बालकृष्णा की खासियत सिर्फ कमर्शियल फिल्मों तक सीमित नहीं रही। उन्होंने ‘आदित्य 369’, ‘श्रीकृष्णार्जुन विजयम’ और ‘पांडुरंगाडु’ जैसी ऐतिहासिक और पौराणिक भूमिकाओं में भी खुद को साबित किया। वहीं ‘लेजेन्ड’, ‘सिंह’, ‘अखंडा’ और ‘वीर सिम्हा रेड्डी’ जैसी फिल्मों ने उन्हें नई पीढ़ी के दर्शकों के बीच भी जबरदस्त लोकप्रियता दिलाई। उनकी 100वीं फिल्म ‘गौतमिपुत्र सातकर्णि’ ने उनके करियर को एक ऐतिहासिक ऊंचाई दी।

सिनेमा के साथ-साथ बालकृष्णा ने राजनीति में भी मजबूत कदम रखा। 2014 से वह हिंदुपुर विधानसभा क्षेत्र से लगातार विधायक हैं और जनता के बीच उनकी गहरी पकड़ है। वह बसवतारकम कैंसर हॉस्पिटल के चेयरमैन भी हैं और समाज सेवा में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। फिल्मी दुनिया, राजनीति और सामाजिक कार्य—तीनों क्षेत्रों में उनकी सक्रियता उन्हें एक बहुआयामी व्यक्तित्व बनाती है।

आज बालकृष्णा सिर्फ एक अभिनेता नहीं बल्कि एक विरासत हैं, जो अपने पिता एन. टी. रामाराव की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। पद्म भूषण, राष्ट्रीय सम्मान और कई फिल्मी अवॉर्ड्स के साथ उनका सफर लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। 50 सालों का यह सफर उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे प्रभावशाली और चर्चित सितारों में शामिल करता है।

Pratahkal Newsroom

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