कौन हैं Nag Ashwin? जिसने ‘कल्कि 2898 एडी’ से बदल दिया इंडियन सिनेमा का गेम
येवडे सुब्रमण्यम से महानटी और कल्कि 2898 एडी तक, नाग अश्विन ने भारतीय सिनेमा को ग्लोबल पहचान दिलाकर अपनी विजनरी सोच को साबित किया है।

निर्देशक नाग अश्विन अपनी फिल्म निर्माण यात्रा के दौरान, जिन्होंने 'महानटी' के लिए नेशनल अवॉर्ड जीता और 'कल्कि 2898 एडी' के साथ वैश्विक पहचान हासिल की।
आज पूरे देश में अगर किसी डायरेक्टर की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, तो वो हैं नाग अश्विन। ‘कल्कि 2898 एडी’ जैसी मेगा साइंस-फिक्शन फिल्म बनाकर उन्होंने सिर्फ बॉक्स ऑफिस नहीं हिलाया, बल्कि ये भी साबित कर दिया कि भारतीय सिनेमा अब हॉलीवुड लेवल की विजुअल स्टोरीटेलिंग करने के लिए पूरी तरह तैयार है। प्रभास, दीपिका पादुकोण, अमिताभ बच्चन और कमल हासन जैसे दिग्गज सितारों को एक साथ लेकर उन्होंने ऐसा सिनेमैटिक यूनिवर्स बनाया, जिसकी चर्चा भारत से लेकर इंटरनेशनल मीडिया तक हुई। सैन डिएगो कॉमिक-कॉन में फिल्म की प्रेजेंटेशन ने नाग अश्विन को ग्लोबल पहचान दिला दी और तभी से हर कोई जानना चाहता है कि आखिर ये डायरेक्टर है कौन।
23 अप्रैल 1986 को तेलुगु परिवार में जन्मे नाग अश्विन का फिल्मी सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। उनके माता-पिता डॉक्टर हैं और हैदराबाद में हॉस्पिटल चलाते हैं, लेकिन नाग अश्विन का दिल हमेशा फिल्मों में लगा। हैदराबाद पब्लिक स्कूल में पढ़ाई के दौरान उनकी दोस्ती राणा दग्गुबाती से हुई, जो बाद में इंडस्ट्री के बड़े स्टार बने। मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने न्यूयॉर्क फिल्म अकैडमी से फिल्म डायरेक्शन सीखा। वहां से लौटकर उन्होंने शेखर कम्मुला के साथ असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम किया और धीरे-धीरे अपनी अलग पहचान बनानी शुरू की।
साल 2015 में आई ‘येवडे सुब्रमण्यम’ नाग अश्विन की पहली फिल्म थी और इसी फिल्म ने बता दिया था कि ये डायरेक्टर भीड़ से अलग सोचता है। नानी, विजय देवरकोंडा और रितु वर्मा स्टारर इस फिल्म को नेपाल के एवरेस्ट बेस कैंप में शूट किया गया था, जो अपने आप में बड़ा रिस्क था। फिल्म सिर्फ एंटरटेनमेंट नहीं थी, बल्कि जिंदगी और खुद को खोजने की कहानी थी। दर्शकों को इसकी इमोशनल वाइब इतनी पसंद आई कि नाग अश्विन को बेस्ट डेब्यू डायरेक्टर का नंदी अवॉर्ड मिल गया। पहली ही फिल्म से उन्होंने साबित कर दिया कि वो सिर्फ मसाला फिल्में नहीं, बल्कि दिल छू लेने वाली कहानियां सुनाना जानते हैं।
लेकिन असली गेम-चेंजर साबित हुई ‘महानटी’। दिग्गज अभिनेत्री सावित्री की जिंदगी पर बनी इस फिल्म के लिए नाग अश्विन ने करीब छह महीने रिसर्च की। पुराने आर्टिकल पढ़े, इंडस्ट्री के लोगों से मिले और फिर ऐसी फिल्म बनाई जिसने साउथ सिनेमा को नया सम्मान दिलाया। कीर्ति सुरेश की दमदार परफॉर्मेंस और नाग अश्विन की संवेदनशील डायरेक्शन ने फिल्म को क्लासिक बना दिया। ‘महानटी’ सिर्फ सुपरहिट नहीं हुई, बल्कि नेशनल अवॉर्ड भी जीतकर लाई। इसी फिल्म ने नाग अश्विन को देश के सबसे टैलेंटेड फिल्ममेकर्स की लिस्ट में शामिल कर दिया। फिल्मफेयर से लेकर कई बड़े अवॉर्ड शो में उनके नाम का डंका बजा।
इसके बाद उन्होंने वो किया जिसकी उम्मीद किसी ने नहीं की थी। लगभग 600 करोड़ के बजट में बनी ‘कल्कि 2898 एडी’ के जरिए नाग अश्विन ने इंडियन सिनेमा को फ्यूचरिस्टिक साइंस-फिक्शन की नई दुनिया दिखाई। कोविड की वजह से फिल्म में देरी हुई, लेकिन जब फिल्म रिलीज हुई तो दर्शकों ने इसे विजुअल स्पेक्टेकल बताया। इंटरनेशनल क्रिटिक्स ने भी फिल्म की तारीफ करते हुए इसे यूनिक साइ-फाइ एपिक कहा। अब फैंस ‘कल्कि 2898 एडी पार्ट 2’ का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं और यही वजह है कि नाग अश्विन आज सिर्फ एक डायरेक्टर नहीं, बल्कि इंडियन सिनेमा के फ्यूचर का चेहरा बन चुके हैं।
पर्सनल लाइफ की बात करें तो नाग अश्विन ने साल 2015 में प्रोड्यूसर अश्विनी दत्त की बेटी प्रियंका दत्त से शादी की। दोनों का एक बेटा भी है। फिल्मों के अलावा उन्होंने ‘जाति रत्नालु’ जैसी फिल्मों को प्रोड्यूस भी किया और ओटीटी की दुनिया में ‘बुज्जी एंड भैरवा’ जैसे प्रोजेक्ट्स से अपनी क्रिएटिविटी दिखाई। उनकी खासियत यही है कि वो हर बार कुछ नया सोचते हैं और शायद यही वजह है कि आज पूरा देश नाग अश्विन को इंडियन सिनेमा का अगला बड़ा विजनरी मान रहा है।

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