कौन हैं नदीम–श्रवण? 90 के दशक के रोमांस को सुरों में ढालने वाले जादूगर
90 के दशक में बॉलीवुड संगीत को नई दिशा देने वाली इस जोड़ी ने 'आशिकी' और 'राजा हिंदुस्तानी' जैसी फिल्मों से रिकॉर्ड सफलता हासिल की।

संगीत निर्देशक नदीम सैफी (बाएं) और श्रवण राठौड़ (दाएं) जिन्होंने 90 के दशक में 'आशिकी' और 'साजन' जैसी फिल्मों के लिए सुपरहिट धुनें तैयार कीं।
आज जब भी 90 के दशक के रोमांटिक गानों की बात होती है, एक नाम अपने आप ट्रेंड करने लगता है—नदीम–श्रवण। सोशल मीडिया पर उनके पुराने गाने फिर से वायरल हो रहे हैं और नई पीढ़ी भी उनकी धुनों पर रील बना रही है। वजह साफ है, उनके संगीत में वो जादू है जो सीधे दिल तक पहुंचता है। “धीरे-धीरे से”, “तुझें देखा तो ये जाना सनम” जैसे गानों की फील आज भी लोगों को उसी दौर में ले जाती है।
नदीम अख्तर सैफी और श्रवण कुमार राठौड़ की जोड़ी की शुरुआत 1970 के दशक में हुई थी, लेकिन असली पहचान उन्हें 1990 में फिल्म ‘आशिकी’ से मिली। इस एक एल्बम ने जैसे म्यूजिक इंडस्ट्री का गेम ही बदल दिया। रिकॉर्ड तोड़ बिक्री के साथ ये एल्बम बॉलीवुड का सबसे ज्यादा बिकने वाला साउंडट्रैक बना और इसी के साथ नदीम–श्रवण हर दिल की धड़कन बन गए। इसके बाद ‘साजन’, ‘दिल है कि मानता नहीं’, ‘दीवाना’ और ‘राजा हिंदुस्तानी’ जैसी फिल्मों ने उनकी सफलता को और ऊंचाई दी।
उनकी सबसे बड़ी खासियत थी उनका क्लासिकल टच। बांसुरी, सितार और शहनाई जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों को उन्होंने मॉडर्न अंदाज में इस्तेमाल किया, जिससे हर गाना एक अलग ही एहसास देता था। उनकी धुनों में ग़ज़ल का असर साफ दिखता है, जो उन्हें बाकी म्यूजिक डायरेक्टर्स से अलग बनाता है। कुमार सानू, अलका याज्ञनिक और उदित नारायण की तिकड़ी के साथ उनका कॉम्बिनेशन ऐसा था जिसने एक के बाद एक सुपरहिट गाने दिए।
हालांकि उनकी जिंदगी में विवाद भी कम नहीं रहे। टी-सीरीज के मालिक गुलशन कुमार की हत्या के मामले में नदीम का नाम सामने आया, जिसके बाद उन्हें देश छोड़ना पड़ा। लेकिन कोर्ट ने बाद में उन्हें पूरी तरह बरी कर दिया। इस मुश्किल दौर के बावजूद इस जोड़ी ने वापसी की और 2000 के दशक में ‘धड़कन’, ‘राज़’ और ‘अंदाज़’ जैसी हिट फिल्मों से साबित कर दिया कि उनका जादू अभी खत्म नहीं हुआ है।
नदीम–श्रवण ने सिर्फ गाने नहीं बनाए, बल्कि एक पूरा म्यूजिक एरा खड़ा किया। उनकी धुनों ने न सिर्फ फिल्मों को हिट बनाया, बल्कि टी-सीरीज जैसे म्यूजिक लेबल को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। 2005 में दोनों अलग हो गए, लेकिन उनका संगीत आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है। श्रवण के निधन के बाद ये जोड़ी भले ही इतिहास बन गई हो, लेकिन उनके गाने आज भी हर मोहब्बत की कहानी का हिस्सा हैं।

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