भारतीय सिनेमा की प्रतिष्ठित अभिनेत्री और राजनेता मौसमी चटर्जी, जिनका जन्म 26 अप्रैल 1954 को कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता) में इंदिरा चट्टोपाध्याय के रूप में हुआ था, वर्ष 2026 में अपने 78वें जन्मदिन की ओर अग्रसर हैं। हिंदी और बंगाली फिल्मों में अपने सशक्त अभिनय से एक अलग पहचान बनाने वाली मौसमी चटर्जी को 1970 के दशक की सबसे अधिक फीस पाने वाली अभिनेत्रियों में गिना जाता है। अभिनय से लेकर राजनीति तक का उनका सफर न केवल प्रेरणादायक रहा है, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक और सार्वजनिक जीवन में उनकी मजबूत उपस्थिति को भी दर्शाता है।

मौसमी चटर्जी का जन्म एक बंगाली ब्राह्मण परिवार में हुआ था, जो मूल रूप से बांग्लादेश के बिक्रमपुर क्षेत्र से संबंध रखता था। उनके पिता प्रतोष चट्टोपाध्याय भारतीय सेना में कार्यरत थे, जबकि उनके दादा न्यायाधीश रहे थे। परिवार में उन्हें प्यार से इंदिरा कहा जाता था, जबकि ‘मौसमी’ उनका फिल्मी नाम है। कम उम्र में ही उनका विवाह जयंत मुखर्जी से हो गया था, जो प्रसिद्ध संगीतकार और गायक हेमंत मुखोपाध्याय के पुत्र हैं। इस दंपति की दो बेटियाँ हुईं। निजी जीवन में पारिवारिक जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देने वाली मौसमी चटर्जी ने हमेशा अपने करियर और परिवार के बीच संतुलन बनाए रखा। उनकी बेटी पायल लंबे समय तक टाइप-1 डायबिटीज से जूझती रहीं और वर्ष 2019 में उनका निधन हो गया, जिसने उनके निजी जीवन को गहरा आघात पहुंचाया।

फिल्म के एक दृश्य में मौसमी चटर्जी

सिनेमा जगत में मौसमी चटर्जी ने अपने करियर की शुरुआत बालिका वधू (1967) जैसी बंगाली फिल्म से की, जब वह मात्र किशोरावस्था में थीं। इसके बाद उन्होंने परिणीता, अनिंदिता और आनंद आश्रम जैसी फिल्मों में अभिनय कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। हिंदी सिनेमा में उनकी बड़ी पहचान 1972 में आई फिल्म अनुराग से बनी, जिसमें उन्होंने एक दृष्टिहीन युवती की भूमिका निभाई थी। इस फिल्म की सफलता ने उन्हें फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री नामांकन भी दिलाया और यह फिल्म वर्ष की सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में शामिल रही।

1980 के बाद मौसमी चटर्जी ने चरित्र भूमिकाओं की ओर रुख किया और मां, भाभी तथा पारिवारिक किरदारों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंने घायल जैसी फिल्मों में सनी देओल की भाभी का किरदार निभाया। 1990 के दशक में उन्होंने गोयल पारिवार, संतां, प्रतीक्षा और कीमत: दे आर बैक जैसी फिल्मों में भी महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं। 2000 के बाद भी वे ज़िंदगी रॉक्स और न तुम जानो न हम जैसी फिल्मों में दिखाई दीं। बंगाली सिनेमा में भी उनका योगदान लगातार जारी रहा और गोयनार बक्सो जैसी फिल्मों के लिए उन्हें सम्मानित किया गया।

अमित शाह के साथ खड़ी मौसमी चटर्जी

मौसमी चटर्जी का राजनीतिक जीवन भी उल्लेखनीय रहा है। उन्होंने वर्ष 2004 में कांग्रेस पार्टी के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा, हालांकि उन्हें सफलता नहीं मिली। बाद में वर्ष 2019 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की, जिससे उनके राजनीतिक सफर में एक नया अध्याय जुड़ गया। अभिनय, निजी संघर्ष और राजनीति के विविध अनुभवों से गुजरते हुए मौसमी चटर्जी आज भी भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम युग की जीवंत प्रतिनिधि मानी जाती हैं। उनका आगामी 78वां जन्मदिन केवल एक व्यक्तिगत पड़ाव नहीं, बल्कि भारतीय फिल्म इतिहास में उनके योगदान को याद करने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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