अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित कान्स फिल्म फेस्टिवल के वैश्विक मंच पर भारतीय सिनेमा और यहां की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का समागम एक बार फिर आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। हालिया दिनों में अपनी निजी जिंदगी और वैवाहिक जीवन में आए उतार-चढ़ाव को लेकर लगातार मीडिया की सुर्खियों में बनी रहने वाली प्रसिद्ध भारतीय अभिनेत्री मौनी रॉय ने इस प्रतिष्ठित महोत्सव में हिस्सा लेकर अपनी पेशेवर प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट परिचय दिया है। वह फ्रांस के कान्स शहर में आयोजित हो रहे इस अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह में अपनी आगामी महत्वाकांक्षी फिल्म 'बॉम्बे स्टोरीज' का आधिकारिक पोस्टर और टीज़र लॉन्च करने के लिए पहुंची थीं। इस विशेष वैश्विक अवसर पर अभिनेत्री ने रेड कारपेट और अपनी सेकंड अपीयरेंस के लिए एक विशिष्ट और ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण परिधान का चयन किया, जिसने वहां मौजूद वैश्विक मीडिया, फैशन समीक्षकों और आम प्रशंसकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

फैशन उद्योग की आधिकारिक जानकारियों के अनुसार मौनी रॉय ने कान्स के इस विशेष सत्र के लिए विख्यात फैशन हाउस 'द हाउस ऑफ पटोला' द्वारा विशेष रूप से तैयार किया गया एक कस्टम हैंडक्राफ्टेड गाउन पहना था, जिसे प्रसिद्ध फैशन डिजाइनर पूजा शाह ने डिजाइन किया है। इस विशेष परिधान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे पूरी तरह से हस्तनिर्मित तरीके से तैयार करने में कुशल कारीगरों को लगभग 240 घंटों का अथक परिश्रम और समय लगा। इस गाउन पर गुजरात की ऐतिहासिक और अत्यंत प्रतिष्ठित 'पटोला' कढ़ाई व बुनाई की गई थी, जो अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारतीय वस्त्र उद्योग की समृद्ध विरासत और बारीक क्राफ्ट्समैनशिप को बेहद प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने में सफल रही। इस गाउन के माध्यम से आधुनिक पश्चिमी सिल्हूट और सदियों पुरानी भारतीय पारंपरिक बुनाई कला का एक अद्भुत संतुलन देखने को मिला।

ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से देखें तो गुजराती पटोला कला का इतिहास अत्यंत गौरवशाली और लगभग 700 से 800 वर्ष पुराना माना जाता है। इस कला का विकास मुख्य रूप से मध्यकाल में सालवी समुदाय के कुशल बुनकरों द्वारा किया गया था, जो मूल रूप से महाराष्ट्र और कर्नाटक के क्षेत्रों से विस्थापित होकर गुजरात के पाटन क्षेत्र में आकर बस गए थे। ऐतिहासिक रूप से पटोला साड़ियां और वस्त्र भारत के राजघरानों, राजा-महाराजाओं और अत्यंत संभ्रांत व्यापारिक परिवारों की प्रतिष्ठा और संपन्नता का प्रतीक माने जाते थे। प्राचीन काल में अत्यंत विशिष्ट अवसरों पर ही राजाओं द्वारा इसका उपयोग किया जाता था और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों जैसे थाईलैंड और इंडोनेशिया में भी इस बहुमूल्य फैब्रिक की भारी मांग दर्ज की जाती थी। यह कला अपनी अत्यंत जटिल 'डबल इकत' तकनीक के लिए जानी जाती है, जिसमें धागों की बुनाई करने से पहले ही उन्हें ज्यामितीय सटीकता के साथ रंगा जाता है ताकि कपड़ा तैयार होने पर दोनों तरफ एक समान पैटर्न उभर सके।

वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में मॉडर्न फैशन का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुकी इस पटोला कला को मौनी रॉय के इस गाउन में बेहद आधुनिक रूप दिया गया था। नीले रंग के इस मुख्य गाउन पर लाल, सफेद और पीले रंगों के रेशमी धागों से बारीक पटोला नक्काशी उभारी गई थी। गाउन को आधुनिक लुक देने के लिए इसमें स्ट्रैपी स्लीव्स और फ्रंट पर स्क्वायर नेकलाइन के साथ बैक साइड में एक डीप कट डिजाइन दिया गया था। बॉडी हगिंग सिल्हूट वाले इस स्ट्रेट गाउन की खूबसूरती को बढ़ाने और लुक में थोड़ा ड्रामा जोड़ने के लिए बैक साइड पर साटन की एक फ्लोई ब्लू ट्रेल जोड़ी गई थी, जिसे कमर पर प्लीट्स बनाकर अटैच किया गया था। इस भव्य ट्रेल को पूरी तरह से प्लेन रखा गया था ताकि गाउन पर की गई पारंपरिक पटोला नक्काशी का संतुलन बिगड़ने न पाए और वह वैश्विक कैमरे के सामने अलग से हाइलाइट हो सके।

अपनी इस खास आउटफिट की गरिमा और कलात्मक सुंदरता को बनाए रखने के लिए मौनी रॉय ने न्यूनतम अलंकरण की नीति अपनाई और नो-जूलरी लुक को फॉलो किया। उन्होंने हाथों में केवल एक हीरे की अंगूठी पहनी थी और अपने पूरे मेकअप को बेहद सटल और सोबर टोन पर रखा। गुलाबी सॉफ्ट लिप्स और हल्की स्मज्ड आइज के साथ साइड पार्टीशन वाले वेवी ओपन हेयरस्टाइल ने उनके इस लुक को एक अंतर्राष्ट्रीय गरिमा प्रदान की। समकालीन फैशन के इस दौर में सदियों पुरानी पारंपरिक भारतीय हस्तशिल्प कला को अंतर्राष्ट्रीय सिनेमा के इतने बड़े मंच पर फ्लॉन्ट करना भारतीय कारीगरों और हथकरघा उद्योग के प्रोत्साहन की दिशा में एक बड़ा और सराहनीय कदम माना जा रहा है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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