फर्जी निकला कुंभ की ‘मोनालिसा’ का जन्म प्रमाण पत्र? अस्पताल के रिकॉर्ड में हुआ बड़ा खुलासा
मध्य प्रदेश की वायरल ‘कुंभ की मोनालिसा’ भोसले की कहानी अब कानूनी विवाद में बदल गई है। नाबालिग होने के आरोप, केरल में हुई शादी, फर्जी जन्म प्रमाण पत्र और पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज केस ने इस वायरल सनसनी को राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया है।

मध्य प्रदेश के एक साधारण जनजातीय परिवार से निकलकर अचानक देशभर में पहचान बनाने वाली मोनालिसा भोसले की कहानी अब एक नए और गंभीर मोड़ पर पहुंच चुकी है। 2025 के महाकुंभ मेले में अपनी अनोखी आंखों और मासूम चेहरे की वजह से सोशल मीडिया पर रातोंरात छा जाने वाली यह लड़की आज कानूनी विवादों के घेरे में है, जहां उसकी उम्र, शादी और उससे जुड़े दस्तावेजों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
पारधी जनजाति से संबंध रखने वाली मोनालिसा भोसले पहले एक सामान्य जीवन जी रही थीं और कुंभ मेले में रुद्राक्ष की मालाएं बेचकर अपनी आजीविका चलाती थीं। इसी दौरान किसी ने उनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए, जिनमें उनकी आकर्षक आंखें और सादगी भरा व्यक्तित्व लोगों को बेहद पसंद आया। देखते ही देखते ये वीडियो इंस्टाग्राम, यूट्यूब और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो गए और उन्हें “कुंभ की मोनालिसा” के नाम से पहचान मिल गई।
सोशल मीडिया पर वायरल मोनालिसा भोसले
वायरल होने के बाद मोनालिसा की जिंदगी में तेजी से बदलाव आया। उन्हें मॉडलिंग और फिल्मी दुनिया से प्रस्ताव मिलने लगे और मीडिया चैनलों ने भी उनकी कहानी को प्रमुखता से कवर करना शुरू कर दिया। एक सड़क किनारे सामान बेचने वाली लड़की से वह अचानक एक सार्वजनिक व्यक्तित्व बन गईं, जिसकी हर गतिविधि पर लोगों की नजर रहने लगी।
इसी बीच, वायरल होने के बाद उन्होंने केरल में अपने प्रेमी फारमान खान से विवाह कर लिया। इस विवाह को लेकर परिवार और समाज के विरोध के चलते दोनों ने पुलिस सुरक्षा भी मांगी थी। हालांकि, यही विवाह अब उनके जीवन का सबसे बड़ा विवाद बन गया है।
हाल ही में मध्य प्रदेश के खरगोन पुलिस की जांच में यह दावा किया गया है कि मोनालिसा भोसले नाबालिग हैं। जांच के आधार पर उनके पति फारमान खान के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता के तहत आपराधिक साजिश और अवैध विवाह से जुड़े प्रावधानों में भी केस दर्ज किया गया है। मोनालिसा के जनजातीय पृष्ठभूमि को देखते हुए अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई है।
सोशल मीडिया पर वायरल मोनालिसा भोसले
जांच में सामने आया है कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग द्वारा प्राप्त सरकारी अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार मोनालिसा का जन्म 30 दिसंबर 2009 को हुआ था। इस आधार पर उनकी उम्र 11 मार्च को हुए विवाह के समय 16 वर्ष, 2 महीने और 12 दिन थी, जो कानूनन नाबालिग मानी जाती है।
यह मामला तब और जटिल हो गया जब जांच में विवाह से जुड़े दस्तावेजों में गड़बड़ी पाई गई। केरल के नैनार देवा मंदिर में संपन्न हुए इस विवाह के दौरान मंदिर प्रशासन ने आधार कार्ड में दर्ज उम्र के आधार पर रस्में पूरी करवाई थीं। बाद में यह विवाह ग्राम पंचायत कार्यालय में पंजीकृत किया गया, जहां प्रस्तुत जन्म प्रमाण पत्र को जांच टीम ने फर्जी पाया। महेश्वर नगर पालिका द्वारा जारी इस प्रमाण पत्र में जन्म तिथि 1 जनवरी 2008 दर्ज थी, जो अस्पताल के रिकॉर्ड से लगभग दो वर्ष पहले की है। आयोग ने इस फर्जी दस्तावेज को निरस्त करने के निर्देश भी जारी कर दिए हैं।
इन सभी आरोपों और जांच के बावजूद मोनालिसा भोसले ने सार्वजनिक रूप से यह दावा किया है कि वह बालिग हैं और उनके खिलाफ लगाए गए आरोप गलत हैं। दूसरी ओर, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए केरल और मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशकों को 22 अप्रैल को नई दिल्ली में पेश होने के लिए समन जारी किया है।
सोशल मीडिया की चमक-दमक से शुरू हुई यह कहानी अब कानून, समाज और राजनीति के जटिल सवालों में उलझ चुकी है। एक ओर यह मामला बाल विवाह और नाबालिगों के अधिकारों की गंभीरता को सामने लाता है, वहीं दूसरी ओर यह भी दिखाता है कि कैसे वायरल प्रसिद्धि कभी-कभी व्यक्ति को ऐसे विवादों के केंद्र में ला खड़ा करती है, जहां से निकलना आसान नहीं होता।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
