कौन हैं मिथून? हर दिल की धड़कन और रूहानी संगीत के असली मास्टरमाइंड
पंडित राम प्रसाद शर्मा के पोते मिथून ने 'तुम ही हो' जैसे गानों से वैश्विक पहचान बनाई और अरिजीत सिंह जैसे गायकों को मंच दिया।

म्यूजिक कंपोजर और गायक मिथून एक लाइव कॉन्सर्ट के दौरान मंच पर प्रस्तुति देते हुए, जिन्होंने बॉलीवुड को कई यादगार धुनें दी हैं।
आज के दौर में अगर कोई धुन आपके मोबाइल की रील्स से लेकर शादी के मंडप तक हर जगह गूंज रही है, तो यकीन मानिए उस जादू के पीछे मिथून का हाथ है। "तुम ही हो" जैसी कालजयी रचना देकर उन्होंने खुद को सिर्फ एक संगीतकार के तौर पर नहीं, बल्कि एक इमोशन के रूप में स्थापित कर लिया है। उनकी धुनों में एक ऐसी कशिश है जो सीधे रूह को छू जाती है और यही वजह है कि आज हर संगीत प्रेमी यह जानना चाहता है कि आखिर वह कलाकार कौन है जिसने बॉलीवुड के म्यूजिक सीन को पूरी तरह बदल कर रख दिया है।
मिथून की कामयाबी कोई रातों-रात मिली शोहरत नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बहुत बड़ी म्यूजिक लेगेसी का हाथ है। उनके दादा पंडित राम प्रसाद शर्मा और पिता नरेश शर्मा इंडस्ट्री के दिग्गज नाम रहे हैं और इसी माहौल में पलते हुए उन्होंने महज ग्यारह साल की उम्र से ही सुरों की बारीकियां सीखना शुरू कर दिया था। हालांकि उन्होंने कभी अपनी पारिवारिक विरासत का फायदा नहीं उठाया, बल्कि अपनी मेहनत और कुछ अलग करने की चाहत से अपनी एक नई पहचान बनाई। उनके गानों में क्लासिकल गहराई और मॉडर्न वाइब का एक ऐसा मिश्रण मिलता है जो उन्हें बाकी संगीतकारों से एकदम जुदा बनाता है।
उनके करियर की शुरुआत भले ही 'वो लम्हे' और 'आदत' जैसे रिक्रिएटेड ट्रैक्स से हुई हो, लेकिन दुनिया को उनके हुनर का असली अंदाजा तब हुआ जब उन्होंने फिल्म 'बस एक पल' में अपनी ओरिजिनल कंपोजिशन पेश की। 'तेरे बिन' और 'मौला मेरे' जैसे गानों ने यह साफ कर दिया कि मिथून सिर्फ धुनें नहीं बनाते, बल्कि वह जज्बातों को बुनते हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने ही अरिजीत सिंह जैसे टैलेंट को 'फिर मोहब्बत' गाने के जरिए दुनिया के सामने पेश किया, जो आज बॉलीवुड की सबसे बड़ी आवाज बन चुके हैं। यह मिथून की दूरदर्शी सोच का ही नतीजा था कि उन्होंने एक ऐसे सितारे को पहचाना।
मिथून के सफर में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब फिल्म 'आशिकी 2' का गाना 'तुम ही हो' रिलीज हुआ। यह सिर्फ एक हिट गाना नहीं था, बल्कि प्यार करने वालों के लिए एक नेशनल एंथम बन गया। इस एक ट्रैक ने उन्हें फिल्मफेयर और आईफा जैसे बड़े अवॉर्ड्स दिलाकर टॉप कंपोजर्स की लीग में सबसे आगे खड़ा कर दिया। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और 'बंजारा', 'सनम रे', 'फिर भी तुमको चाहूंगा' और 'तुझे कितना चाहने लगे' जैसे एक के बाद एक कई ब्लॉकबस्टर गाने दिए। उनके गानों ने न सिर्फ चार्ट्स पर राज किया बल्कि स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर भी ग्लोबल रिकॉर्ड्स तोड़ दिए।
मिथून के संगीत की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उनके गानों में दर्द, प्यार और तड़प इतनी खूबसूरती से घुली होती है कि सुनने वाला खुद को उन शब्दों से जुड़ा हुआ महसूस करता है। चाहे 'एक विलेन' का 'हमदर्द' हो या 'कबीर सिंह' का 'तुझे कितना चाहने लगे', उनका हर ट्रैक एक पूरी कहानी कहता है और यही स्टोरीटेलिंग उन्हें एक बेहतरीन आर्टिस्ट बनाती है। वह जानते हैं कि शब्दों और संगीत के जरिए कैसे किसी के दिल में अपनी जगह बनानी है।
अपनी निजी जिंदगी में भी मिथून सादगी और जुनून के साथ रहना पसंद करते हैं। साल दो हजार बाईस में उन्होंने मशहूर सिंगर पलक मुच्छल से शादी की, जो खुद भी अपनी सुरीली आवाज के लिए जानी जाती हैं। आज भी मिथून 'गदर 2' जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के जरिए लगातार हिट गाने दे रहे हैं और आने वाली फिल्मों में भी कुछ नया क्रिएट करने की तैयारी में हैं। उनकी यही सादगी और संगीत के प्रति अटूट समर्पण आज की युवा पीढ़ी से लेकर पुराने श्रोताओं तक हर किसी को उनका दीवाना बनाए हुए है।

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