कौन हैं चिरंजीवी? जो 'बच्चन' से बड़े बने और अब बनाया है अनोखा वर्ल्ड रिकॉर्ड!
पुलिस कॉन्स्टेबल के बेटे से भारतीय सिनेमा के महानायक बनने तक चिरंजीवी के संघर्ष, रिकॉर्ड और सामाजिक योगदान का पूरा विवरण।

भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता चिरंजीवी जिन्हें हाल ही में नृत्य के क्षेत्र में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड और पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया है।
आज भारतीय सिनेमा में अगर किसी एक नाम का सिक्का सबसे ज्यादा चमक रहा है, तो वह है 'मेगास्टार' चिरंजीवी। साल २०२४ में पद्म विभूषण से सम्मानित होने और हाल ही में ५३७ गानों में २४,००० से ज्यादा डांस स्टेप्स के लिए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराने वाले चिरंजीवी आज भी बॉक्स ऑफिस पर राज कर रहे हैं। उनकी हालिया रिलीज 'माना शंकर वरप्रसाद गारू' की जबरदस्त सफलता ने यह साबित कर दिया है कि सत्तर की उम्र में भी उनका चार्म कम नहीं हुआ है। उनके स्टाइल, ग्रेस और स्क्रीन प्रेजेंस का आलम यह है कि फैंस उन्हें भगवान की तरह पूजते हैं और उनके सिग्नेचर डांस मूव्स आज भी सोशल मीडिया पर ग्लोबल लेवल पर वायरल होते रहते हैं।
लेकिन इस महानायक का सफर इतना आसान नहीं था। आंध्र प्रदेश के एक छोटे से गांव मोगलथुर में एक पुलिस कॉन्स्टेबल के घर जन्मे कोनिडेला शिवशंकर वरप्रसाद ने कभी नहीं सोचा था कि वे एक दिन भारतीय सिनेमा के सबसे प्रभावशाली अभिनेताओं में गिने जाएंगे। मद्रास फिल्म इंस्टीट्यूट से अभिनय की बारीकियां सीखकर १९७८ में फिल्म 'प्राण खरीदु' से अपने करियर की शुरुआत करने वाले इस कलाकार ने शुरुआती दौर में विलेन और सपोर्टिंग रोल निभाकर अपनी पहचान बनाई। अपनी मां के कहने पर उन्होंने अपना स्क्रीन नाम 'चिरंजीवी' रखा, जिसका अर्थ है अमर, और वाकई आज उनका काम सिनेमा के इतिहास के पन्नों में अमर हो चुका है।
अस्सी के दशक की फिल्म 'कैदी' ने उन्हें रातों-रात एक एक्शन स्टार बना दिया। इसके बाद 'गैंग लीडर' और 'घराना मोगुडु' जैसी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड्स की झड़ी लगा दी। 'घराना मोगुडु' दक्षिण भारत की पहली ऐसी फिल्म बनी जिसने १० करोड़ रुपये से ज्यादा का कलेक्शन किया। इसी दौर में एक मशहूर नेशनल मैग्जीन ने उन्हें बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन से भी बड़ा और 'नया मनी मशीन' करार दिया था। वे भारत के पहले ऐसे अभिनेता थे जिन्होंने एक फिल्म के लिए सवा करोड़ रुपये की फीस ली, जो उस समय एक अविश्वसनीय रिकॉर्ड था।
चिरंजीवी सिर्फ एक कमर्शियल स्टार ही नहीं, बल्कि एक मंझे हुए अभिनेता भी रहे हैं। जहां उन्होंने 'इंद्रा' और 'टैगोर' जैसी फिल्मों से मास ऑडियंस का दिल जीता, वहीं 'स्वयं कृषि' और 'रुद्रवीणा' जैसी क्लासिक फिल्मों के लिए उन्हें नंदी अवॉर्ड और नेशनल अवॉर्ड जैसे सम्मान भी मिले। वे पहले दक्षिण भारतीय अभिनेता थे जिन्हें १९८७ में ऑस्कर समारोह में आमंत्रित किया गया था। ९ फिल्मफेयर अवॉर्ड्स और आई एफ एफ आई इंडियन फिल्म पर्सनैलिटी ऑफ द ईयर जैसे सम्मान उनके शानदार करियर की गवाही देते हैं। उनकी वर्सेटिलिटी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे जितने बेहतरीन एक्शन हीरो हैं, उतने ही लाजवाब डांसर भी।
सिनेमा के पर्दे से इतर चिरंजीवी का व्यक्तित्व एक जनसेवक जैसा रहा है। १९९८ में उन्होंने चिरंजीवी चैरिटेबल ट्रस्ट की स्थापना की, जिसके ब्लड और आई बैंक ने लाखों लोगों की मदद की है। राजनीति के मैदान में भी उन्होंने अपनी 'प्रजा राज्यम पार्टी' बनाई और बाद में राज्यसभा सांसद व केंद्र सरकार में पर्यटन मंत्री के रूप में सेवाएं दीं। हालांकि, २०१७ में 'कैदी नंबर १५०' के साथ सिनेमा में उनकी ग्रैंड वापसी ने यह साफ कर दिया कि उनका असली घर सिल्वर स्क्रीन ही है। हाल ही में अपने परिवार की विरासत और पोते की इच्छा को लेकर दिए गए उनके एक बयान पर थोड़ा विवाद जरूर हुआ, लेकिन उनके दशकों के सामाजिक योगदान और फिल्मी कद के सामने उनके प्रति जनता की दीवानगी कम नहीं हुई।
आज चिरंजीवी न केवल खुद एक मेगास्टार हैं, बल्कि उन्होंने इंडस्ट्री को राम चरण, अल्लू अर्जुन और पवन कल्याण जैसे सितारे दिए हैं। 'वल्टेयर वीरय्या' और 'गॉडफादर' जैसी हालिया हिट्स के बाद अब पूरी दुनिया उनकी अगली फिल्म 'विश्वंभरा' का बेसब्री से इंतजार कर रही है। एक कॉन्स्टेबल के बेटे से लेकर भारतीय सिनेमा के शिखर तक पहुंचने की उनकी यह यात्रा संघर्ष, अनुशासन और कभी न खत्म होने वाले जज्बे की एक ऐसी मिसाल है जो हर उभरते हुए कलाकार के लिए एक गाइड बुक की तरह है।

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