मुंबई, जुलाई, 2026: भारतीय सिनेमा में देशभक्ति, सामाजिक सरोकार और सशक्त कहानी कहने की अपनी अलग पहचान बनाने वाले महान अभिनेता, लेखक और निर्देशक मनोज कुमार की 89वीं जयंती के अवसर पर ज़ी क्लासिक एक विशेष फिल्म फेस्टिवल लेकर आ रहा है। 19 जुलाई से 24 जुलाई तक प्रसारित होने वाले इस विशेष आयोजन में दर्शकों को मनोज कुमार की उन यादगार फिल्मों को देखने का अवसर मिलेगा, जिन्होंने उन्हें भारतीय सिनेमा का अमर सितारा और ‘भारत कुमार’ की पहचान दिलाई।

मनोज कुमार ने अपने लंबे फिल्मी सफर में देशभक्ति को केवल पर्दे तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे करोड़ों भारतीयों की भावनाओं से जोड़ दिया। उनकी फिल्मों में देश के साथ-साथ आम लोगों का संघर्ष, उनके सपने, त्याग और अटूट हौसला प्रमुखता से दिखाई देता है। यही कारण है कि उनकी फिल्में आज भी दर्शकों के बीच उतनी ही लोकप्रिय और प्रासंगिक मानी जाती हैं।

ज़ी क्लासिक द्वारा आयोजित इस विशेष फिल्म फेस्टिवल में मनोज कुमार के चार दशक से अधिक लंबे सिनेमाई सफर की छह चर्चित फिल्मों का प्रसारण किया जाएगा। इस श्रृंखला की शुरुआत ‘रोटी कपड़ा और मकान’ से होगी, जिसमें आम आदमी के संघर्ष और उसके सपनों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है। इसके बाद ‘उपकार’ दिखाई जाएगी, जिसने मनोज कुमार को हमेशा के लिए ‘भारत कुमार’ की पहचान दिलाई। देश के किसान और जवान को समर्पित यह फिल्म आज भी प्रेरणादायक मानी जाती है। इसके बाद ‘पूरब और पश्चिम’ भारतीय संस्कृति और संस्कारों की खूबसूरती को दर्शाएगी। ‘शोर’ प्यार, बिछड़ने के दर्द और पिता के जज़्बात की ऐसी कहानी है, जो आज भी दर्शकों के दिल को छू जाती है। ‘शहीद’ में भगत सिंह के किरदार को मनोज कुमार ने जिस दमदार अंदाज में निभाया, उसे भारतीय सिनेमा की सबसे यादगार प्रस्तुतियों में गिना जाता है। इस विशेष फिल्म फेस्टिवल का समापन 24 जुलाई को उनकी भव्य फिल्म ‘क्रांति’ के साथ होगा। शानदार कलाकारों से सजी इस फिल्म ने एक बार फिर यह साबित किया कि मनोज कुमार बड़े कैनवास पर देशभक्ति, त्याग और इंसानियत की कहानियां कहने में बेमिसाल थे।

इस अवसर पर मनोज कुमार के साथ काम कर चुके कई कलाकारों और उनके करीबी सहयोगियों ने भी उन्हें याद करते हुए अपने अनुभव साझा किए।

शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा, “जब भी मैं मनोज कुमार जी को याद करता हूँ, तो सिर्फ एक शानदार अभिनेता या निर्देशक याद नहीं आता, बल्कि एक ऐसा इंसान याद आता है, जो अपनी हर फिल्म को पूरी तरह जीता था। उनके लिए सिनेमा सिर्फ मनोरंजन नहीं था। हर कहानी का एक मकसद होता था और हर किरदार कुछ बड़ा कहता था। मुझे आज भी याद है कि शूटिंग शुरू होने से पहले वो सेट की हर छोटी से छोटी बात को बड़े ध्यान से देखते थे। उनके अंदर एक अलग ही सुकून था, लेकिन साथ ही उन्हें हमेशा साफ पता होता था कि उन्हें क्या चाहिए। उनके साथ काम करके मैंने सीखा कि किसी भी कलाकार की सबसे बड़ी ताकत उसकी सच्चाई होती है। पूरी इंडस्ट्री उन्हें 'भारत कुमार' कहती थी, लेकिन हमारे लिए वो हमेशा मनोज जी ही रहे, एक बेहद सादगी पसंद, गरिमामय और अपने देश से बेइंतहा प्यार करने वाले इंसान।”

हेमा मालिनी ने कहा, “मनोज जी के साथ काम करने की मेरी कई खूबसूरत यादें हैं। उनके सेट पर हर दिन कुछ नया सीखने को मिलता था। वो अपने कलाकारों को बहुत प्यार और धैर्य से समझाते थे और हमेशा कहते थे कि अभिनय में सच्चाई दिखनी चाहिए, सिर्फ ड्रामा नहीं। सबसे अच्छी बात यह थी कि वो हर इंसान का बराबर सम्मान करते थे, चाहे वो बड़ा कलाकार हो या फिर तकनीकी टीम का सदस्य। उनकी फिल्मों में इतना दिल इसलिए होता था, क्योंकि वो खुद भी बेहद संवेदनशील और गहराई से सोचने वाले इंसान थे। आज भी जब मैं उनकी फिल्में देखती हूँ, तो हर फ्रेम में उनकी मेहनत, जुनून और अनुशासन साफ नजर आता है। उनके साथ काम करना मेरे लिए हमेशा गर्व की बात रहेगी।”

प्यारेलाल ने कहा, “मनोज कुमार जी के लिए संगीत बहुत मायने रखता था। जब भी हम साथ काम करते थे, वे घंटों हमारे साथ बैठकर सिर्फ धुन ही नहीं, बल्कि हर गीत के जज़्बात पर भी बात करते थे। संगीत की उनकी समझ कमाल की थी। उन्हें पता था कि एक गीत सिर्फ फिल्म का हिस्सा नहीं होता, बल्कि पूरी कहानी की धड़कन होता है। शायद यही वजह है कि उनकी फिल्मों के गाने आज भी लोगों की जुबान पर हैं। उनके साथ काम करना हमेशा एक यादगार अनुभव रहा, क्योंकि वे हर बार हमें अपना सर्वश्रेष्ठ देने की प्रेरणा देते थे।”

प्रेम चोपड़ा ने कहा, “मनोज और मैंने सिर्फ फिल्मों में साथ काम नहीं किया, बल्कि ज़िंदगी के भी कई खूबसूरत पल साथ बिताए। कैमरे के सामने और पीछे वो बेहद अनुशासित, मेहनती और अपने काम के प्रति पूरी तरह समर्पित रहते थे। लेकिन, शूटिंग खत्म होते ही वे बेहद मिलनसार, स्नेही और हँसमुख इंसान बन जाते थे। वे हमेशा अपने आसपास के लोगों का ख्याल रखते थे और हर किसी को अहमियत देते थे। मुझे उनकी सबसे बड़ी बात यह लगती थी कि उन्होंने कभी अपने विचारों से समझौता नहीं किया। देश, रिश्तों और इंसानियत पर फिल्में बनाना उनका विश्वास था और उन्होंने इसे हमेशा निभाया। मैं खुद को खुशकिस्मत मानता हूँ कि मुझे उनके साथ काम करने और उन्हें करीब से जानने का मौका मिला।”

ज़ी क्लासिक का यह विशेष फिल्म फेस्टिवल केवल मनोज कुमार को श्रद्धांजलि नहीं है, बल्कि भारतीय सिनेमा के उस सुनहरे दौर का उत्सव भी है, जिसने कई पीढ़ियों को प्रेरित किया। जिन्होंने उनकी फिल्में पहले देखी हैं, वे एक बार फिर पुरानी यादों को ताज़ा कर सकेंगे, जबकि नई पीढ़ी को भारतीय सिनेमा की कुछ बेहतरीन फिल्मों से रूबरू होने का अवसर मिलेगा। मनोज कुमार की 89वीं जयंती पर 19 जुलाई से 24 जुलाई तक हर शाम 7 बजे ज़ी क्लासिक पर इस विशेष फिल्म फेस्टिवल का प्रसारण होगा। 24 जुलाई को उनकी जयंती के अवसर पर भव्य फिल्म ‘क्रांति’ की विशेष प्रस्तुति भी केवल ज़ी क्लासिक पर दिखाई जाएगी।

Pratahkal Newsroom

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