आज जब भी इंडियन सिनेमा में विजन, क्लास और इमोशन की बात होती है, तो सबसे पहले नाम आता है Mani Ratnam का। सोशल मीडिया पर उनकी फिल्में आज भी नई जनरेशन के लिए मास्टरक्लास मानी जाती हैं। चाहे बात ‘रोजा’ की हो, ‘बॉम्बे’ की, ‘दिल से’ की या फिर हालिया ब्लॉकबस्टर ‘पोन्नियिन सेलवन’ की, मणिरत्नम ने हर दौर में ऐसा सिनेमा दिया जिसने सिर्फ बॉक्स ऑफिस नहीं, लोगों के दिल और सोच दोनों को बदल दिया। उनकी फिल्मों की सबसे बड़ी खासियत ये रही कि उन्होंने प्यार, राजनीति, आतंकवाद, रिश्ते और समाज जैसे मुश्किल विषयों को भी बेहद खूबसूरत अंदाज़ में पर्दे पर उतारा।

दिलचस्प बात ये है कि फिल्मी परिवार से आने के बावजूद मणिरत्नम का बचपन फिल्मों से दूर ही गुजरा। मदुरै में जन्मे मणिरत्नम ने पहले कॉमर्स की पढ़ाई की, फिर मुंबई से एमबीए किया और मैनेजमेंट कंसल्टेंट की नौकरी भी की। लेकिन अंदर कहीं न कहीं कहानी कहने का जुनून पल रहा था। इसी जुनून ने उन्हें नौकरी छोड़कर फिल्म इंडस्ट्री में ला खड़ा किया। शुरुआत आसान नहीं थी। पहली कन्नड़ फिल्म ‘पल्लवी अनु पल्लवी’ से लेकर शुरुआती कुछ फिल्मों तक उन्हें स्ट्रगल और असफलताओं का सामना करना पड़ा। मगर 1986 में आई ‘मौना रागम’ ने सबकुछ बदल दिया। इस फिल्म ने मणिरत्नम को तमिल सिनेमा का नया गेमचेंजर बना दिया और यहीं से शुरू हुआ एक ऐसा सफर जिसने इंडियन सिनेमा का चेहरा बदल दिया।

इसके बाद उन्होंने लगातार ऐसी फिल्में बनाईं जो आज भी कल्ट क्लासिक मानी जाती हैं। ‘नायकन’ को तो दुनिया की महान फिल्मों में गिना गया और इसे इंडिया का ‘गॉडफादर’ कहा गया। Kamal Haasan के साथ उनकी जोड़ी ने कमाल कर दिया। फिर ‘थलपति’ में Rajinikanth और Mammootty को लेकर उन्होंने दोस्ती और सत्ता की ऐसी कहानी दिखाई जिसे लोग आज भी याद करते हैं। 90 के दशक में ‘रोजा’, ‘बॉम्बे’ और ‘दिल से’ जैसी फिल्मों ने उन्हें नेशनल ही नहीं, इंटरनेशनल पहचान दिलाई। कश्मीर आतंकवाद, मुंबई दंगे और समाज में बढ़ती नफरत जैसे मुद्दों को उन्होंने बेहद संवेदनशील तरीके से दिखाया। यही वजह है कि उनकी फिल्में सिर्फ एंटरटेनमेंट नहीं बल्कि एक इमोशनल एक्सपीरियंस बन गईं।

मणिरत्नम की फिल्मों की एक और बड़ी पहचान है उनका विजुअल स्टाइल। उनकी फिल्मों के गाने, बैकलाइट शॉट्स, कैमरा एंगल और इमोशनल फ्रेमिंग आज भी फिल्म स्कूल्स में स्टडी किए जाते हैं। A. R. Rahman के साथ उनकी जोड़ी ने तो इतिहास रच दिया। ‘रोजा’ से शुरू हुई ये पार्टनरशिप इंडियन सिनेमा की सबसे आइकॉनिक डायरेक्टर-म्यूजिक डायरेक्टर जोड़ियों में गिनी जाती है। ‘छैंया छैंया’, ‘तू ही रे’, ‘रोजा जानेमन’ और ‘सतरंगी रे’ जैसे गाने सिर्फ हिट नहीं हुए, बल्कि पॉप कल्चर का हिस्सा बन गए। उनकी फिल्मों में रोमांस भी अलग दिखता है और दर्द भी। शायद यही वजह है कि ‘अलाईपायुथे’ और ‘ओ काधल कण्मणि’ जैसी लव स्टोरीज़ आज की यंग जनरेशन को भी उतनी ही रिलेटेबल लगती हैं।

मणिरत्नम सिर्फ एक डायरेक्टर नहीं बल्कि इंडियन सिनेमा के ट्रेंडसेटर हैं। उन्होंने आर्ट और कमर्शियल फिल्मों के बीच की दीवार तोड़ दी। उनकी फिल्मों को नेशनल अवॉर्ड्स से लेकर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल्स तक सम्मान मिला। भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया और दुनिया भर के बड़े फिल्म फेस्टिवल्स में उनकी फिल्मों की स्पेशल स्क्रीनिंग हुई। हाल के सालों में ‘पोन्नियिन सेलवन’ ने साबित कर दिया कि दशकों बाद भी मणिरत्नम का जादू कम नहीं हुआ है। इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़े और एक बार फिर दिखा दिया कि जब विजन, कहानी और सिनेमैटिक ग्रैंडनेस साथ आते हैं, तो इतिहास बनता है।

आज भी मणिरत्नम का नाम सुनते ही लोगों को क्लास, इमोशन और सिनेमैटिक ब्रिलियंस याद आती है। वो उन चुनिंदा फिल्ममेकर्स में शामिल हैं जिन्होंने भारतीय सिनेमा को दुनिया के नक्शे पर नई पहचान दी। उनकी फिल्में सिर्फ देखी नहीं जातीं, महसूस की जाती हैं। यही वजह है कि हर नई पीढ़ी उन्हें फिर से खोजती है और हर बार उनके सिनेमा से प्यार कर बैठती है।

Pratahkal Newsroom

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