एनिमेटेड फिल्म 'महाप्रभु जगन्नाथ' अपनी रिलीज के बाद से ही गंभीर विवादों के घेरे में आ गई है। भगवान जगन्नाथ के जीवन और उनकी पौराणिक कथाओं पर आधारित इस फिल्म को ओडिशा में व्यापक विरोध का सामना करना पड़ रहा है, जिसके चलते वहां इसकी रिलीज पर आधिकारिक तौर पर रोक लगा दी गई है। यह फिल्म हिंदू धर्म की प्राचीन परंपराओं और भगवान जगन्नाथ की सांस्कृतिक विरासत को युवा पीढ़ी तक पहुँचाने के उद्देश्य से बनाई गई थी, किंतु इसमें देवताओं को चित्रित करने के तरीके ने धार्मिक संगठनों को आक्रोशित कर दिया है। फिल्म के कई दृश्य सोशल मीडिया पर वायरल होने के पश्चात स्थिति तनावपूर्ण हो गई और कई धार्मिक समूहों ने इसे धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बताया है।

विवाद की शुरुआत तब हुई जब यूट्यूब पर फिल्म का टीजर जारी किया गया। इसके उपरांत ओडिशा के विभिन्न धार्मिक समूहों और श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने फिल्म में की गई सिनेमैटिक क्रिएटिविटी पर कड़े सवाल उठाए। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि फिल्म में भगवान जगन्नाथ को उन तौर-तरीकों से दिखाया गया है, जो स्थापित मंदिर परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं से मेल नहीं खाते हैं। उनका कहना है कि पवित्र हस्तियों को व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए काल्पनिक रूप से प्रस्तुत करना अनुचित है। आरोप है कि फिल्म निर्माताओं ने पहले बदलाव का आश्वासन दिया था, लेकिन अंतिम रिलीज में उन सुधारों को शामिल नहीं किया गया, जिससे विरोध और भी तीव्र हो गया।

इस मामले ने कानूनी रूप ले लिया जब ओडिशा हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई। मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश हरीश टंडन और न्यायमूर्ति मुरहारी श्री रमन की खंडपीठ ने फिल्म की रिलीज पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया। अदालत ने अपने फैसले में टिप्पणी की कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार धार्मिक भावनाओं को आहत करने का लाइसेंस नहीं है। न्यायालय ने कहा कि यदि किसी फिल्म का प्रदर्शन समाज की शांति और धार्मिक आस्था के ताने-बाने को प्रभावित करता है, तो उसे अनुमति नहीं दी जा सकती।

इस प्रतिबंध के बाद फिल्म के निर्माता अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं। निर्माताओं का कहना है कि उन्होंने इस फिल्म का निर्माण भगवान जगन्नाथ के प्रति गहरी भक्ति और सम्मान के साथ किया है। उनका पक्ष है कि फिल्म का उद्देश्य संस्कृति और मूल्यों को बच्चों व परिवारों तक पहुँचाना है, न कि किसी की आस्था को ठेस पहुँचाना। फिल्मकारों ने अपनी सफाई में कहा कि यह रचना एक भक्त की भावनाओं की अभिव्यक्ति है और वे दर्शकों से अपील करते हैं कि वे फिल्म को निष्पक्ष रूप से देखें। वर्तमान में यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है, जहां फिल्म के भविष्य और धार्मिक मान्यताओं के प्रति सम्मान के बीच संतुलन को लेकर कानूनी बहस जारी है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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