अभिनेता लक्ष्मीकांत बर्डे के शुरुआती संघर्ष, मराठी थिएटर में सफलता और बॉलीवुड की सुपरहिट फिल्मों में उनके योगदान की पूरी जानकारी।

एक दौर था जब स्क्रीन पर उनका आना मतलब थिएटर में सीटियां, ठहाके और पूरा माहौल फुल ऑन एंटरटेनमेंट मोड में चला जाना। आज भी सोशल मीडिया पर उनकी क्लिप्स वायरल होती हैं और लोग कहते हैं कि ऐसी नेचुरल कॉमेडी अब बहुत कम देखने को मिलती है। Laxmikant Berde सिर्फ एक अभिनेता नहीं थे, बल्कि मराठी और हिंदी सिनेमा के वो चेहरा थे जिन्होंने आम इंसान की जिंदगी, उसकी परेशानियों और उसकी मासूमियत को कॉमेडी के जरिए अमर बना दिया। करीब 185 फिल्मों में काम करने वाले इस कलाकार ने अपने एक्सप्रेशन, बॉडी लैंग्वेज और डायलॉग डिलीवरी से ऐसा जादू चलाया कि लोग उन्हें प्यार से “लक्ष्या” कहकर बुलाने लगे।

26 अक्टूबर 1954 को मुंबई में जन्मे लक्ष्मीकांत बर्डे की जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं थी। छह भाई-बहनों में सबसे छोटे लक्ष्मीकांत बचपन में घर चलाने के लिए लॉटरी टिकट तक बेचा करते थे। लेकिन उनके अंदर का कलाकार गणेश उत्सव के नाटकों में धीरे-धीरे आकार ले रहा था। गिरगांव की गलियों से शुरू हुआ उनका सपना बाद में मुंबई मराठी साहित्य संघ तक पहुंचा, जहां उन्होंने छोटे-छोटे रोल करते हुए अपने अभिनय को निखारा। 1983-84 में मराठी नाटक “तूर तूर” ने उन्हें ऐसी पहचान दिलाई कि पूरा महाराष्ट्र उनकी कॉमिक टाइमिंग का फैन बन गया।

मराठी सिनेमा में उनकी एंट्री फिल्म “लेक चालली सासरला” से हुई और पहली ही फिल्म ने उन्हें स्टार बना दिया। इसके बाद “धूम धड़ाका”, “दे दनादन”, “अशी ही बनवा बनवी”, “थरथराट”, “हमाल दे धमाल” और “झपाटलेला” जैसी फिल्मों ने उन्हें कॉमेडी का बादशाह बना दिया। खास बात ये रही कि उनकी जोड़ी Ashok Saraf, Mahesh Kothare और Sachin Pilgaonkar के साथ सुपरहिट मानी जाती थी। “लेक चालली सासरला” और “धूम धड़ाका” के लिए लगातार दो फिल्मफेयर मराठी अवॉर्ड जीतना इस बात का सबूत था कि लक्ष्मीकांत सिर्फ लोगों को हंसाते नहीं थे, बल्कि अभिनय की दुनिया में अलग स्तर की पकड़ रखते थे।

फिर आया बॉलीवुड का दौर, जहां उन्होंने Maine Pyar Kiya में Salman Khan के साथ ऐसा यादगार रोल निभाया कि हिंदी दर्शक भी उनके दीवाने हो गए। इसके बाद “साजन”, “100 डेज”, “बेटा”, “अनाड़ी” और Hum Aapke Hain Koun..! जैसी फिल्मों में उनकी मौजूदगी फिल्म की जान बन गई। खासकर “हम आपके हैं कौन..!” में उनका लल्लू प्रसाद वाला किरदार आज भी लोगों के दिलों में बसा हुआ है। उन्हें चार बार फिल्मफेयर में बेस्ट कॉमिक रोल के लिए नॉमिनेशन मिला, लेकिन असली अवॉर्ड तो वो प्यार था जो दर्शकों ने उन्हें दिया।

लक्ष्मीकांत बर्डे ने सिर्फ कॉमेडी ही नहीं, बल्कि गंभीर अभिनय में भी हाथ आजमाया। फिल्म “एक होता विदूषक” में उनका अलग अंदाज देखने को मिला, हालांकि दर्शकों ने उन्हें सबसे ज्यादा हंसाने वाले कलाकार के रूप में ही अपनाया। निजी जिंदगी में भी उन्होंने काफी उतार-चढ़ाव देखे। पहली पत्नी रुही की मौत ने उन्हें तोड़ दिया, लेकिन बाद में उन्होंने अभिनेत्री Priya Berde से शादी की। उनके बेटे Abhinay Berde और बेटी स्वानंदी भी अभिनय की दुनिया में आए। अपने आखिरी दिनों में उन्होंने “अभिनय आर्ट्स” नाम का प्रोडक्शन हाउस शुरू किया और वेंट्रिलोक्विस्ट व गिटारिस्ट के रूप में भी अपनी कला दिखाई।

16 दिसंबर 2004 को किडनी की बीमारी के कारण जब लक्ष्मीकांत बर्डे ने दुनिया को अलविदा कहा, तब सिर्फ 50 साल की उम्र में भारतीय सिनेमा ने अपनी सबसे चमकदार कॉमिक मुस्कानों में से एक खो दी। लेकिन आज भी उनके डायलॉग, उनकी हरकतें और उनका मासूम चेहरा इंटरनेट पर नई पीढ़ी को उतना ही हंसाता है जितना 90 के दशक के दर्शकों को हंसाया करता था। यही वजह है कि लक्ष्मीकांत बर्डे सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि भारतीय कॉमेडी का वो गोल्डन चैप्टर हैं जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।

Pratahkal Newsroom

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