मुंबई। गुजराती सिनेमा की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में शामिल ‘लालो- कृष्ण सदा सहायते’ अब अपने वर्ल्ड टेलीविजन प्रीमियर के जरिए एक बार फिर दर्शकों के बीच लौटने जा रही है। फिल्म का प्रसारण 17 मई को दोपहर 1 बजे सिर्फ Sony Max पर होगा। बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड सफलता हासिल करने के बाद अब उन वास्तविक और भावनात्मक कहानियों की चर्चा तेज हो गई है, जिन्होंने ‘लालो’ को एक साधारण फिल्म से कहीं अधिक प्रभावशाली बनाया।

फिल्म के डायरेक्टर Ankit Sakhiya ने सौराष्ट्र के अलग-अलग क्षेत्रों में केवल प्राकृतिक सूरज की रोशनी में फिल्म की शूटिंग की। फिल्मांकन की यह शैली दर्शकों को बेहद पसंद आई और फिल्म की दृश्यात्मक प्रस्तुति को अलग पहचान मिली। हालांकि ‘लालो’ की ताकत सिर्फ इसकी लोकेशंस तक सीमित नहीं रही, बल्कि कलाकारों के निजी अनुभवों और भावनाओं ने भी इसे दर्शकों से गहराई से जोड़ा।

फिल्म में ‘लालो’ का मुख्य किरदार निभाने वाले Karan Joshi ने बिना पैसे वाले थिएटर शो से लेकर पैन-इंडिया ब्लॉकबस्टर का चेहरा बनने तक का लंबा संघर्ष तय किया। अपने किरदार को लेकर उन्होंने कहा कि यह केवल अभिनय नहीं था, बल्कि ऐसा बदलाव था जिसने उनकी जिंदगी को नई दिशा दी। उन्होंने बताया कि लालजी की आत्म-परिवर्तन की यात्रा कहीं न कहीं उनकी अपनी जिंदगी से जुड़ी रही, जहां उन्होंने खुद पर भरोसा करना और अपने उद्देश्य को समझना सीखा। उनके अनुसार, ‘लालो’ ने उनके भीतर भी बदलाव लाने का काम किया।

वहीं Shruhad Goswami के लिए श्रीकृष्ण का किरदार निभाना पारंपरिक और गंभीर छवि से अलग एक नया प्रयोग साबित हुआ। उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश थी कि श्रीकृष्ण दर्शकों को अपने जैसे महसूस हों, ऐसे जो समझें, साथ दें और भावनाओं से जुड़े रहें। उन्होंने कहा कि दर्शक उन्हें केवल दूर बैठे भगवान के रूप में नहीं, बल्कि मार्गदर्शक और साथी के रूप में महसूस करें। उनके अनुसार, यही अपनापन इस किरदार का सबसे कठिन, लेकिन सबसे खूबसूरत पक्ष था।

फिल्म में ‘तुलसी’ का किरदार निभाने वाली Reva Rachh ने अपनी सादगी और गहरी भावनात्मक प्रस्तुति से कहानी को अलग आयाम दिया। उन्होंने वास्तविक जीवन की भावनाओं को अपने अभिनय में उतारते हुए किरदार को बेहद सच्चा और जुड़ा हुआ बनाया। उन्होंने कहा कि तुलसी की खामोशी ही उसकी सबसे बड़ी ताकत थी। यह केवल इंतजार के दर्द की कहानी नहीं थी, बल्कि हर परिस्थिति में मजबूत बने रहने की भी कहानी थी।

वास्तविक लोकेशंस, ईमानदार कहानी और कलाकारों की सच्ची भावनाओं ने ‘लालो- कृष्ण सदा सहायते’ को गुजराती सिनेमा में अलग पहचान दिलाई। फिल्म ने यह साबित किया कि सच्चाई और भावनात्मक गहराई से जुड़ी कहानियां दर्शकों के दिलों पर गहरा असर छोड़ सकती हैं। अब यह फिल्म एक बार फिर देशभर के घरों तक पहुंचने के लिए तैयार है, जहां 17 मई को दोपहर 1 बजे इसका वर्ल्ड टेलीविजन प्रीमियर सिर्फ सोनी मैक्स पर प्रसारित होगा।

Pratahkal Bureau

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