'तेजाब' और 'खुदा गवाह' जैसी फिल्मों में निगेटिव रोल से पहचान बनाने वाले किरण कुमार ने फिल्मों के साथ टीवी और क्षेत्रीय सिनेमा में भी अपनी अलग छाप छोड़ी है।

Kiran Kumar इन दिनों फिर से चर्चा में हैं। वजह है उनका लंबा और दमदार करियर, जिसमें उन्होंने हीरो से लेकर ऐसे विलेन तक के किरदार निभाए जिन्हें दर्शक आज भी भूल नहीं पाए हैं। बड़े पर्दे पर उनकी एंट्री होते ही एक अलग डर और रौब महसूस होता था। चाहे पुलिस ऑफिसर का रोल हो, माफिया डॉन हो या फिर चालाक नेता, किरण कुमार ने हर किरदार में ऐसा असर छोड़ा कि लोग उन्हें बॉलीवुड के सबसे अंडररेटेड लेकिन सबसे मजबूत एक्टर्स में गिनने लगे। हाल ही में उनकी फिल्में और पुराने टीवी शोज़ सोशल मीडिया पर फिर वायरल होने लगे हैं, जिसके बाद नई पीढ़ी भी उनके काम को खोज रही है।

कश्मीरी पंडित परिवार से आने वाले किरण कुमार का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा। उन्होंने इंदौर के बोर्डिंग स्कूल से पढ़ाई की, फिर मुंबई के आर.डी. नेशनल कॉलेज पहुंचे और उसके बाद पुणे के मशहूर एफटीआईआई से एक्टिंग की पढ़ाई की। अभिनय उनके खून में था और यही वजह रही कि शुरुआती संघर्ष के बावजूद उन्होंने खुद को इंडस्ट्री में साबित कर दिया। साठ के दशक में चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर शुरुआत करने वाले किरण कुमार ने धीरे-धीरे फिल्मों में अपनी पकड़ मजबूत की। शुरुआती दौर में उन्होंने रोमांटिक और सपोर्टिंग रोल किए, लेकिन असली पहचान उन्हें निगेटिव किरदारों से मिली।

नब्बे का दशक आते-आते किरण कुमार हर बड़े बैनर की पहली पसंद बन चुके थे। Tezaab, Khuda Gawah, Bol Radha Bol, Aaj Ka Arjun और Anjaam जैसी फिल्मों में उन्होंने अपने दमदार अभिनय से कहानी में जान डाल दी। उनकी भारी आवाज़, आंखों का गुस्सा और स्क्रीन प्रेजेंस इतनी मजबूत थी कि कई बार विलेन होने के बावजूद दर्शकों की नजरें उन्हीं पर टिक जाती थीं। यही कारण था कि उन्हें कई बार पुलिस कमिश्नर, डॉन, गैंगस्टर और पावरफुल पिता जैसे किरदार लगातार मिलने लगे। फिल्मफेयर में ‘खुदा गवाह’ के लिए बेस्ट निगेटिव रोल का नॉमिनेशन मिलना इस बात का सबूत था कि उनका अभिनय सिर्फ कमर्शियल नहीं बल्कि क्रिटिक्स को भी प्रभावित करता था।

सिर्फ फिल्मों तक सीमित रहना किरण कुमार को मंजूर नहीं था। उन्होंने टीवी की दुनिया में भी जबरदस्त पहचान बनाई। Zindagi, Ghutan, Grihasti, Yeh Un Dinon Ki Baat Hai और Prithvi Vallabh जैसे शोज़ में उन्होंने अलग-अलग रंग दिखाए। उस दौर में टीवी पर उनका आना किसी बड़े स्टार की एंट्री जैसा माना जाता था। खास बात यह रही कि उन्होंने भोजपुरी, गुजराती और हिंदी सिनेमा तीनों में बराबर काम किया और हर इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाई। थिएटर से जुड़े रहने की वजह से उनके संवाद बोलने का अंदाज हमेशा बाकी कलाकारों से अलग नजर आया।

आज जब लोग पुराने बॉलीवुड विलेन्स की बात करते हैं तो अमरीश पुरी, गुलशन ग्रोवर और शक्ति कपूर के साथ किरण कुमार का नाम भी मजबूती से लिया जाता है। फर्क सिर्फ इतना है कि उन्होंने खुद को एक ही इमेज में कैद नहीं होने दिया। कभी सख्त पिता बने, कभी ईमानदार अफसर तो कभी ऐसा खतरनाक अपराधी जिसे देखकर दर्शकों के अंदर डर बैठ जाए। यही बहुमुखी प्रतिभा उन्हें बाकी कलाकारों से अलग बनाती है। हाल के सालों में Bholaa, Sukhee और Kaagaz 2 जैसी फिल्मों में उनकी मौजूदगी ने साबित किया कि उम्र बढ़ सकती है, लेकिन स्क्रीन पर उनका असर आज भी वैसा ही है।

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