कौन हैं केष्टो मुखर्जी? बिना शराब पिए बॉलीवुड के सबसे यादगार ‘शराबी’ कॉमेडियन
बॉलीवुड के मशहूर कॉमेडियन केष्टो मुखर्जी के फिल्मी सफर, ऋत्विक घटक के साथ उनके जुड़ाव और शराबी किरदारों के पीछे की असल कहानी का विवरण।

हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता केष्टो मुखर्जी अपनी एक फिल्म के दृश्य में, जिन्होंने अपनी विशिष्ट कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों के बीच पहचान बनाई।
एक दौर था जब स्क्रीन पर लड़खड़ाती चाल, आधी खुली आंखें और टूटी-फूटी जुबान देखते ही लोग हंस-हंसकर लोटपोट हो जाते थे, और उस चेहरे का नाम था Keshto Mukherjee। आज भी सोशल मीडिया पर उनके पुराने सीन वायरल होते हैं और नई पीढ़ी यह जानकर हैरान रह जाती है कि हिंदी सिनेमा का सबसे मशहूर ‘शराबी’ किरदार निभाने वाला यह कलाकार असल जिंदगी में बेहद अलग इंसान था। उनकी कॉमिक टाइमिंग इतनी नेचुरल थी कि लोग मान बैठते थे कि कैमरे के सामने वह एक्टिंग नहीं, बल्कि अपनी असली जिंदगी जी रहे हैं। यही वजह है कि दशकों बाद भी उनका नाम बॉलीवुड के सबसे आइकॉनिक कॉमेडियंस में गिना जाता है।
कोलकाता में जन्मे केष्टो मुखर्जी का फिल्मी सफर आसान नहीं था। बड़े सपने लेकर वह मुंबई पहुंचे, लेकिन शुरुआती दिनों में उन्हें गरीबी, अकेलापन और संघर्ष का सामना करना पड़ा। छोटे-छोटे रोल करते हुए उन्होंने खुद को इंडस्ट्री में टिकाए रखा। मशहूर फिल्मकार Ritwik Ghatak के साथ उनका खास रिश्ता था और उन्होंने “बाड़ी थेके पालिये”, “अजंत्रिक”, “नगरिक” और “जुक्ति तक्को आर गप्पो” जैसी फिल्मों में छोटे मगर असरदार किरदार निभाए। उस दौर में शायद किसी ने नहीं सोचा था कि यही कलाकार आगे चलकर हिंदी फिल्मों में कॉमिक शराबी किरदारों का चेहरा बन जाएगा।
साठ और सत्तर के दशक में केष्टो मुखर्जी हर बड़े बैनर और स्टार की फिल्मों का जरूरी हिस्सा बन चुके थे। “पड़ोसन”, “बॉम्बे टू गोवा”, “चुपके चुपके”, “शोले”, “गोलमाल”, “खूबसूरत”, “नसीब”, “जंजीर” और “खट्टा मीठा” जैसी फिल्मों में उनका छोटा-सा रोल भी दर्शकों को याद रह जाता था। उनकी खासियत यह थी कि बिना लंबे डायलॉग के भी वह सिर्फ एक्सप्रेशन और बॉडी लैंग्वेज से पूरा सीन चुरा लेते थे। उनके लड़खड़ाते कदम और मासूम चेहरे वाली कॉमेडी उस दौर की फिल्मों की पहचान बन गई थी। बॉलीवुड में शराबी किरदार पहले भी थे, लेकिन केष्टो मुखर्जी ने उसे एक अलग स्टाइल और आत्मा दी।
उनकी जिंदगी का सबसे दिलचस्प पहलू यह रहा कि लोग उन्हें हमेशा ‘दारू वाले कॉमेडियन’ के तौर पर याद करते रहे। कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि वह असल जिंदगी में शराब से दूर रहते थे, लेकिन एक पुराने इंटरव्यू में उन्होंने खुलकर बताया था कि संघर्ष के दिनों में शराब उनके अकेलेपन की साथी बन गई थी। उन्होंने कहा था कि मुंबई में काम न मिलने की वजह से वह टूट चुके थे और उसी दर्द ने उन्हें वह पहचान दी जिसके लिए पूरी दुनिया उन्हें जानने लगी। शायद यही सच्चाई उनकी एक्टिंग में इतनी गहराई लेकर आई कि दर्शकों को उनका हर सीन असली लगता था।
केष्टो मुखर्जी सिर्फ कॉमेडियन नहीं थे, बल्कि वह हिंदी सिनेमा के उन दुर्लभ कलाकारों में शामिल थे जिन्होंने साइड रोल को भी स्टारडम में बदल दिया। उन्होंने सौ से ज्यादा फिल्मों में काम किया और हर पीढ़ी के बड़े सितारों के साथ स्क्रीन शेयर की। फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में उन्हें कई बार बेस्ट कॉमिक रोल के लिए नॉमिनेशन मिला और आखिरकार “खूबसूरत” के लिए उन्हें जीत भी हासिल हुई। 1982 में मुंबई में एक हादसे में उनकी मौत हो गई, लेकिन उनकी बनाई हुई कॉमिक विरासत आज भी जिंदा है। जब भी बॉलीवुड के सबसे यादगार कॉमेडियंस की बात होती है, केष्टो मुखर्जी का नाम हमेशा सबसे आगे नजर आता है।

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