कौन बनेगा करोड़पति 18 के हालिया एपिसोड में एक ऐसा अद्भुत और प्रेरणादायक पल देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद हर शख्स के साथ-साथ टीवी स्क्रीन के सामने बैठे दर्शकों का भी दिल जीत लिया। इस विशेष एपिसोड में गुजरात के एक छोटे से गांव से ताल्लुक रखने वाले और अपनी असाधारण जीवन यात्रा के बल पर 'दुनिया के सबसे छोटे डॉक्टर' के रूप में अपनी खास पहचान बनाने वाले डॉ. गणेश बरैया ने हॉट सीट पर पहुंचकर इतिहास रच दिया। उनकी संघर्ष, अटूट मेहनत और कभी हार न मानने वाली जिद की कहानी ने शो के होस्ट और सदी के महानायक अमिताभ बच्चन को भी पूरी तरह से भावुक और प्रभावित कर दिया।

शो के नियमों के मुताबिक, डॉ. गणेश ने सबसे पहले सबसे तेज बजर राउंड यानी फास्टेस्ट फिंगर फर्स्ट में शानदार प्रदर्शन करते हुए खेल में अपनी आधिकारिक एंट्री ली थी। हॉट सीट पर बैठने के बाद उन्होंने शुरुआती दौर के कई कठिन सवालों के बहुत ही सटीक और आत्मविश्वास के साथ जवाब दिए। खेल आगे बढ़ता गया और वे धीरे-धीरे धन राशि के बड़े पड़ाव की ओर अग्रसर हुए, हालांकि इस सफर में उनकी लाइफलाइन भी एक-एक करके समाप्त होने लगीं। आखिरकार खेल के नौवें चरण में 3 लाख रुपये के एक बेहद महत्वपूर्ण सवाल पर आकर उनका जवाब गलत हो गया, जिसके चलते उन्हें तय नियमों के अनुसार खेल से संतोषजनक राशि के साथ विदा होना पड़ा।

यह नौवां सवाल तस्वीरों पर आधारित था, जिसमें डॉ. गणेश को भारत के चार ऐतिहासिक और प्रसिद्ध स्मारकों की तस्वीरें दिखाई गई थीं और उनसे यह पूछा गया था कि इनमें से कितने स्मारक गुजरात के उत्तर दिशा में स्थित हैं। इन तस्वीरों में दिल्ली का लाल किला, आगरा का ताजमहल, हैदराबाद की चार मीनार और मदुरै का मीनाक्षी मंदिर शामिल थे, हालांकि उनकी पहचान के लिए स्मारकों के नाम सीधे तौर पर नहीं लिखे गए थे। इस सवाल के लिए 0, 1, 2 और 3 के चार विकल्प दिए गए थे। इस पड़ाव तक पहुंचते-पहुंचते वे अपनी दो महत्वपूर्ण लाइफलाइन पहले ही गंवा चुके थे और जल्दबाजी में उन्होंने विकल्प 3 चुन लिया, जबकि इस सवाल का सही जवाब 2 था क्योंकि केवल दिल्ली का लाल किला और आगरा का ताजमहल ही गुजरात के उत्तर में स्थित हैं। इस गलत उत्तर के कारण वे निर्धारित 3 लाख रुपये की राशि नहीं जीत सके और अंततः 25,000 रुपये की पुरस्कार राशि के साथ इस रोमांचक खेल से बाहर हो गए।

खेल की इस हार-जीत से परे, डॉ. गणेश बरैया की जिंदगी का संघर्ष और उनका सफर हर किसी के लिए एक मिसाल है। शो के दौरान उन्होंने अपने शुरुआती दिनों की एक बेहद मार्मिक और झकझोर देने वाली कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि जब वे प्राइमरी स्कूल में अपनी शुरुआती पढ़ाई कर रहे थे, तब उनके गांव में सर्कस से जुड़ा हुआ एक समूह आया था। उस समूह के लोगों ने उनके किसान पिता को गणेश के बदले 5 लाख रुपये देने का एक लालच भरा ऑफर दिया था, ताकि वे उन्हें अपने साथ ले जा सकें। उस दर्दनाक और कठिन समय को याद करते हुए डॉ. गणेश ने गर्व के साथ बताया कि उनके पिता ने पैसों की चमक-दमक को ठुकराते हुए उनके भविष्य के लिए शिक्षा के रास्ते को चुना और पैसे के बजाय पढ़ाई को प्राथमिकता दी।

उनका शारीरिक कद सामान्य मनुष्यों की तुलना में काफी छोटा है, जिसके कारण समाज में उनके लिए हर कदम पर बाधाएं खड़ी की गई थीं। उन्होंने अपने संघर्षों को याद करते हुए बताया कि उन्हें बार-बार यह अहसास कराया गया था कि उन जैसे व्यक्ति के लिए उच्च शिक्षा प्राप्त करना और डॉक्टर बनना पूरी तरह से असंभव है। लोगों ने यहां तक कह दिया था कि वे कभी भी चिकित्सा के क्षेत्र में कदम नहीं रख सकते, लेकिन उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत, दृढ़ संकल्प और परिवार के समर्थन से उन सभी नकारात्मकताओं को गलत साबित कर दिखाया।

बचपन के दिनों को याद करते हुए उन्होंने बताया कि उनका स्कूल उनके घर से करीब पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित था। उनके कद के कारण उनके पिता रोज उन्हें अपने कंधे पर बैठाकर स्कूल छोड़ने जाते थे और वापस लाते थे। इसके अलावा स्कूल के अंदर रखी जाने वाली बेंच भी उनके कद के अनुकूल नहीं थीं, जिससे उन्हें रोजाना पढ़ाई के दौरान भारी शारीरिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता था। इन तमाम विकट परिस्थितियों से जूझते हुए उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की और अंततः अपनी काबिलियत के दम पर मेडिकल की पढ़ाई पूरी कर डॉक्टर बनने का अपना सपना सच कर दिखाया।

वर्तमान समय में डॉ. गणेश गुजरात के भावनगर शहर के एक प्रतिष्ठित अस्पताल में बाल रोग विभाग यानी पीडिएट्रिक डिपार्टमेंट में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें बच्चों के साथ काम करना बेहद पसंद है और वे पूरी निष्ठा से अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे हैं। उनकी इस अविश्वसनीय संघर्ष यात्रा और असाधारण सफलता की दास्तान सुनकर शो के होस्ट अमिताभ बच्चन भी बेहद प्रभावित हुए और उन्होंने डॉ. गणेश को उनके उज्ज्वल भविष्य तथा सपनों को साकार करने के लिए हार्दिक बधाई दी।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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