भारतीय टेलीविजन के सबसे लोकप्रिय और लंबे समय से चले आ रहे क्विज शो 'कौन बनेगा करोड़पति' का 18वां सीजन एक बार फिर दर्शकों के बीच अपनी भव्य वापसी कर चुका है। इस बहुप्रतीक्षित सीजन का पहला एपिसोड सोमवार, 10 अगस्त को प्रसारित किया गया, जिसने पहले ही दिन से दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इस विशेष एपिसोड की शोभा बढ़ाने के लिए बॉलीवुड के दिग्गज सितारे सनी देओल, आमिर खान और अभिनेत्री प्रीति जिंटा हॉट सीट पर मेहमान के रूप में शामिल हुए। शो में इन कलाकारों के आने का मुख्य उद्देश्य उनकी आगामी फिल्म 'बंटवारा 1947' का प्रमोशन करना था, और इस मंच से जीती जाने वाली पूरी धनराशि को एक प्रतिष्ठित चैरिटेबल फाउंडेशन को दान किया जाना तय किया गया था। शो के दौरान खेल का रोमांच उस समय अपने चरम पर पहुंच गया जब ये तीनों मंझे हुए कलाकार 25 लाख रुपये के एक महत्वपूर्ण और पेचीदा सवाल पर आकर अटक गए।

खेल आगे बढ़ते हुए जब 13वें यानी 25 लाख रुपये के पड़ाव पर पहुंचा, तो होस्ट अमिताभ बच्चन ने कंटेस्टेंट्स के सामने एक ऐसा सवाल रखा जो एक मशहूर उर्दू और हिंदी कवि से जुड़ा हुआ था। सवाल यह था कि किस प्रसिद्ध शायर या कवि ने यह अमर पंक्तियां लिखी थीं—'कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता, कहीं जमीन कहीं आसमान नहीं मिलता?' इस सवाल के चार विकल्प दिए गए थे, जिनमें अकबर इलाहाबादी, जौन एलिया, निदा फाजली और फैज अहमद फैज के नाम शामिल थे। इन विकल्पों को देखने से पहले ही अभिनेत्री प्रीति जिंटा ने अपने अंदाज में यह अनुमान लगाया कि शायद ये पंक्तियां फिल्म 'मिर्जा गालिब' से जुड़ी हुई हैं, और अभिनेता आमिर खान ने भी उनकी इस बात पर सहमति जताई। हालांकि, स्क्रीन पर जैसे ही आधिकारिक विकल्प उभरे, उन्हें तुरंत इस बात का अहसास हो गया कि वे गलत दिशा में सोच रहे थे और सही उत्तर तक पहुंचने के लिए उन्हें अपनी सूझबूझ का इस्तेमाल करना होगा।

इस निर्णायक मोड़ पर कलाकारों के पास केवल एक ही जीवन रेखा यानी 'महाफ्लिप' शेष बची थी। इस विशेष लाइफलाइन के प्रावधान के तहत, कंटेस्टेंट्स को मौजूदा सवाल को बदलकर उसकी जगह दो नए विकल्प या सवाल प्राप्त करने का अधिकार मिलता है, जिनमें से वे किसी एक का चयन कर सकते हैं। स्थिति की नज़ाकत को भांपते हुए कलाकारों ने इस लाइफलाइन का उपयोग करने का निर्णय लिया और उस सवाल को छोड़ दिया। इसके बाद, जब शो के होस्ट अमिताभ बच्चन ने उनसे केवल अपने मनोरंजन और अनुमान के आधार पर उस छोड़े गए सवाल का जवाब देने का आग्रह किया, तो प्रीति जिंटा ने फैज अहमद फैज का नाम लिया, जो कि तकनीकी रूप से एक गलत जवाब साबित हुआ। इस सवाल का वास्तविक और सटीक सही उत्तर मशहूर शायर निदा फाजली था।

यह खूबसूरत गजल मूल रूप से कवि निदा फाजली ने अपनी एक साहित्यिक रचना के हिस्से के रूप में लिखी थी, जिसे बाद में वर्ष 1981 में रिलीज हुई फिल्म 'आहिस्ता-आहिस्ता' के लिए एक गजल के रूप में रूपांतरित किया गया था। इस प्रसिद्ध गजल का बेहतरीन संगीतकार खय्याम द्वारा तैयार किया गया था और इसे अपनी जादुई आवाज़ से लेजेंड्री गायक भूपिंदर सिंह और आशा भोंसले ने सजाया था। निदा फाजली के साहित्यिक सफर से जुड़ा एक अन्य रोचक किस्सा भी रहा है। 'फिल्मफेयर' को दिए गए अपने एक पुराने साक्षात्कार में खुद निदा फाजली ने इस बात का खुलासा किया था कि फिल्ममेकर कमाल अमरोही की नजर उनकी कविताओं पर पड़ी थी। कमाल अमरोही अपनी महत्वाकांक्षी फिल्म 'रजिया सुल्तान' के लिए एक नए और प्रतिभाशाली लेखक की तलाश कर रहे थे, क्योंकि उस फिल्म के मूल लेखक जान निसार अख्तर—जो कि मशहूर गीतकार जावेद अख्तर के पिता थे—का निधन हो चुका था। कमाल अमरोही ने उस फिल्म के लिए निदा की कुछ कविताओं का चयन किया था, हालांकि यह विशेष गजल और इसकी पंक्तियां किसी अन्य परियोजना के हिस्से के रूप में अमर हो गईं।

निदा फाजली का नाम अपने जीवनकाल में कुछ साहित्यिक और वैचारिक बहसों के साथ भी जुड़ा रहा है। साल 2013 के दौरान वे एक बड़े विवाद के केंद्र में आ गए थे, जब उन्होंने बॉलीवुड फिल्मों में प्रचलित 'एंग्री यंग मैन' की छवि की तुलना मुंबई पर हुए 26/11 आतंकवादी हमले के मुख्य साजिशकर्ताओं और दोषियों में से एक अजमल कसाब से कर दी थी। उस दौरान उनके इस बयान पर मीडिया और राजनीतिक हलकों में काफी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं। उन्होंने अपने एक लेख या वक्तव्य में लिखा था कि अमिताभ बच्चन को 'एंग्री यंग मैन' का जो खिताब दिया गया है, वह किसी किरदार या बनाए गए खिलौने की तरह था, जिसकी तुलना उन्होंने अजमल कसाब से करते हुए कहा था कि एक को सलीम-जावेद की जोड़ी ने गढ़ा था और दूसरे को हाफिज मोहम्मद सईद जैसे तत्वों ने तैयार किया था। उनके इस बयान को लेकर यह गलतफहमी फैली कि वे अभिनेता अमिताभ बच्चन की तुलना सीधे तौर पर किसी आतंकवादी से कर रहे हैं, जिससे एक बड़ा राष्ट्रीय विवाद खड़ा हो गया था।

बाद में इस पूरे विवाद पर स्थिति स्पष्ट करते हुए निदा फाजली ने सफाई दी थी कि उनके बयानों को मीडिया द्वारा तोड़-मरोड़कर पेश किया गया था और उनकी बातों का गलत मतलब निकाला गया था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि उनका आशय कभी भी अमिताभ बच्चन के व्यक्तिगत चरित्र पर सवाल उठाने का नहीं था, बल्कि वे केवल 'एंग्री यंग मैन' की उस सिनेमाई छवि की बात कर रहे थे जो उस दशक के दौर में लोकप्रिय हुई थी। उन्होंने तर्क दिया था कि इस प्रकार के गुस्से और आक्रोश की छवि को केवल 70 के दशक तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, और उदाहरण देते हुए उन्होंने 74 वर्षीय अन्ना हजारे के आंदोलन का भी जिक्र किया था कि समाज में अलग-अलग समय पर रोष और असंतोष के अलग रूप देखने को मिलते हैं। उन्होंने हमेशा अमिताभ बच्चन को एक बहुमुखी प्रतिभा वाले महान कलाकार के रूप में सराहा, जिनकी कलात्मक सीमाएं और क्षमताएं भारतीय सिनेमा का गौरव हैं। कौन बनेगा करोड़पति के इस नवीनतम मंच पर एक बार फिर पुराने किस्सों और कविताओं के जरिए साहित्य और सिनेमा का यह अनोखा संगम देखने को मिला, जिसने दर्शकों को बांधे रखा।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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