डॉन 3' विवाद पर जब कंगना ने दिया रणवीर का साथ, तो FWICE चीफ ने सरेआम उड़ाई खिल्ली|
फिल्म 'डॉन 3' और रणवीर सिंह विवाद पर कंगना रनौत की टिप्पणी पर FWICE के मुख्य सलाहकार अशोक पंडित ने कड़ी आपत्ति जताते हुए तथ्यों को समझने की सलाह दी है।

मुंबई में एक प्रेस वार्ता के दौरान फिल्म निर्माता अशोक पंडित और एक अन्य कार्यक्रम में अपनी बात रखती हुईं अभिनेत्री कंगना रनौत ।
मुंबई: फिल्म अभिनेता रणवीर सिंह और निर्माता फरहान अख्तर के बीच फिल्म 'डॉन 3' को लेकर उपजा विवाद अब पूरी तरह से एक नया मोड़ ले चुका है। इस पूरे घटनाक्रम में फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) द्वारा जारी किए गए असहयोग निर्देश पर जब अभिनेत्री कंगना रनौत ने टिप्पणी की, तो फिल्म संस्था के मुख्य सलाहकार अशोक पंडित ने इस पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। अशोक पंडित ने अभिनेत्री के बयान को पूरी तरह से गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए कहा कि तथ्यों की जानकारी के बिना किसी भी गंभीर मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से राय बनाना अनुचित है और यही कारण है कि उनके खिलाफ पहले भी कड़े कदम उठाए गए थे।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब कंगना रनौत ने अपनी आगामी फिल्म 'भारत भाग्य विधाता' के ट्रेलर लॉन्च के दौरान रणवीर सिंह के कथित विवाद पर प्रतिक्रिया दी थी। संवाददाताओं के सवालों का जवाब देते हुए अभिनेत्री ने कहा था कि उन्हें भी अतीत में कई बार उद्योग के लोगों द्वारा प्रतिबंधित करने का प्रयास किया गया था, परंतु इन बातों से उनकी साख पर कोई अंतर नहीं पड़ता। उन्होंने आगे जोड़ते हुए कहा था कि जब किसी व्यक्ति की सामाजिक और व्यावसायिक हैसियत बढ़ती है, तो उसके साथ ही उसके शत्रुओं की संख्या में भी वृद्धि हो जाती है। कंगना ने यह भी कहा था कि रणवीर सिंह को अपनी वर्तमान हैसियत पर विचार करना चाहिए कि उनके इतने विरोधी खड़े हो गए हैं, जो कि एक प्रकार से सकारात्मक संकेत है।
कंगना रनौत के इसी बयान पर पलटवार करते हुए FWICE के मुख्य सलाहकार अशोक पंडित ने मीडिया से बातचीत में महासंघ का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि फेडरेशन किसी भी कलाकार को व्यक्तिगत रूप से निशाना नहीं बना रहा है और न ही यह रणवीर सिंह के खिलाफ कोई व्यक्तिगत अभियान है। अशोक पंडित ने नाराजगी जताते हुए कहा कि फिल्म उद्योग से जुड़े कई लोग पूरे मामले की पृष्ठभूमि को समझे बिना ही सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर अनर्गल टिप्पणियां कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि फेडरेशन का निर्णय किसी व्यक्ति विशेष के विरोध में नहीं, बल्कि संपूर्ण फिल्म निर्माण प्रक्रिया से जुड़े निर्माताओं, तकनीशियनों, दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों और कामगारों के हितों की रक्षा के लिए लिया गया एक संगठनात्मक कदम था।
इस पूरे विवाद की कानूनी और आधिकारिक पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो यह मामला तब शुरू हुआ जब रणवीर सिंह ने अचानक फिल्म 'डॉन 3' से अलग होने का निर्णय लिया। इस निर्णय से नाराज होकर फिल्म के निर्देशक व निर्माता फरहान अख्तर ने FWICE के समक्ष आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उन्होंने लगभग 45 करोड़ रुपये के वित्तीय नुकसान का हर्जाना मांगा। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए महासंघ ने रणवीर सिंह को तीन बार रिमाइंडर और कारण बताओ नोटिस जारी किए। हालांकि, अभिनेता के सचिव द्वारा भेजे गए आधिकारिक ईमेल उत्तर में यह तर्क दिया गया कि यह पूरा मामला महासंघ के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत नहीं आता है।
अभिनेता के इस रुख से असहमत होकर FWICE ने उनके खिलाफ असहयोग निर्देश (Non-Cooperation Directive) जारी कर दिया, जिसके तहत महासंघ से जुड़े लगभग 4 लाख कर्मचारियों के अभिनेता के साथ काम न करने की बात कही गई थी। हालांकि, यह विधिक रूप से कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं था, बल्कि एक संगठनात्मक असहयोग था जिसके कारण भविष्य में शूटिंग और कार्यबल जुटाने में व्यवधान आ सकता था। इसके उपरांत जब रणवीर सिंह की ओर से फेडरेशन को कानूनी नोटिस भेजा गया, तब परिस्थितियों की समीक्षा करते हुए महासंघ ने इस असहयोग निर्देश को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया। अशोक पंडित ने अंत में जोर देकर कहा कि सार्वजनिक हस्तियों को किसी भी विवाद पर बोलने से पहले आधिकारिक नियमों और कानूनी बारीकियों का अध्ययन अवश्य करना चाहिए।

Lalita Rajput
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