आज के दौर में जब हम वर्सटाइल कलाकारों की बात करते हैं, तो एक नाम सबसे ऊपर चमकता है और वह है कमल हासन। हाल ही में राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेने और फिल्म कल्कि 2898 एडी में अपने खौफनाक विलेन के अवतार से सनसनी मचाने वाले कमल हासन सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि सिनेमा की एक जीती-जागती संस्था हैं। सात नवंबर 1954 को जन्मे इस कलाकार ने महज छह साल की उम्र में फिल्म कलथुर कन्नम्मा के लिए राष्ट्रपति स्वर्ण पदक जीतकर अपने सुनहरे सफर का आगाज किया था। आज वह तमिल, हिंदी, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ सहित कई भाषाओं में 250 से अधिक फिल्में कर चुके हैं। उनकी लोकप्रियता का आलम यह है कि उन्हें ऑस्कर की 'अकादमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज' में सदस्य के रूप में आमंत्रित किया गया है, जो उनके वैश्विक प्रभाव को दर्शाता है।

कमल हासन का सफर महज परदे तक सीमित नहीं रहा है। उनके पिता ने एक मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानी मित्र की याद में उनका नाम कमल हासन रखा था, जो उनके व्यक्तित्व में रची-बसी धर्मनिरपेक्षता की पहली झलक थी। उन्होंने अपने करियर में अपूर्व रागंगल से लेकर 16 वयथिनिले जैसी फिल्मों के जरिए अभिनय के नए मापदंड स्थापित किए। वह भारतीय सिनेमा के पहले ऐसे अभिनेता बने जिन्होंने अपने फैन क्लबों को समाज सेवा संगठनों में बदल दिया। उनके अभिनय का जादू 'सागर' और 'सदमा' जैसी हिंदी फिल्मों में भी सिर चढ़कर बोला। उन्होंने नायकन, इंडियन और तेवर मगन जैसी फिल्मों के लिए नेशनल अवार्ड्स की झड़ी लगा दी और उनके नाम सबसे ज्यादा 21 फिल्मफेयर पुरस्कार जीतने का अनोखा रिकॉर्ड दर्ज है।

तकनीकी रूप से कमल हासन हमेशा समय से आगे रहे हैं। उन्होंने 'पुष्पक' जैसी बिना संवाद वाली फिल्म में काम किया और 'अपूर्व सगोदरर्गल' में एक बौने का किरदार निभाकर सबको हैरान कर दिया। इतना ही नहीं, 'दशावतारम' में उन्होंने दस अलग-अलग भूमिकाएं निभाकर अपनी अभिनय क्षमता का लोहा मनवाया। वह सिर्फ एक एक्टर ही नहीं, बल्कि एक बेहतरीन डायरेक्टर, स्क्रीनराइटर, प्लेबैक सिंगर और कोरियोग्राफर भी हैं। उन्होंने 'चाची 420' और 'विश्वरूपम' जैसी फिल्मों का निर्देशन कर अपनी विजनरी सोच का परिचय दिया। 'विक्रम' की ब्लॉकबस्टर सफलता ने यह साबित कर दिया कि साठ के दशक में भी उनका स्टारडम और एनर्जी किसी युवा सुपरस्टार से कम नहीं है।

राजनीति के मैदान में भी कमल हासन ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है। 2018 में उन्होंने 'मक्कल नीधि मय्यम' नाम की पार्टी बनाई और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई। साल 2025 उनके लिए बेहद खास रहा है, क्योंकि उन्होंने तमिलनाडु से राज्यसभा सांसद के रूप में देश के उच्च सदन में कदम रखा है। हालांकि उनका राजनीतिक सफर चुनौतियों और विवादों से भरा रहा है, लेकिन वह एक स्पष्टवादी और तर्कवादी नेता के रूप में अपनी बात निडरता से रखते हैं। चाहे वह सामाजिक मुद्दे हों या कला का क्षेत्र, कमल हासन हमेशा 'सेंट्रिज्म' और मानवतावाद की वकालत करते नजर आते हैं।

साहित्य के प्रति उनका प्रेम भी किसी से छिपा नहीं है। उन्होंने 'मयम' जैसी पत्रिका का संपादन किया और सौ से अधिक कविताएं लिखीं। हाल ही में उनकी पुस्तक 'मयम: थिअर्नदेदुत्थ पदैप्पुकल' का विमोचन हुआ है, जो उनके बौद्धिक पक्ष को उजागर करती है। उन्होंने 'केएच हाउस ऑफ खद्दर' नाम से अपना फैशन ब्रांड भी लॉन्च किया है, जो खादी को आधुनिक पहचान दे रहा है। अपने जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखने के बावजूद, कमल हासन आज भी उसी ऊर्जा के साथ सक्रिय हैं। वह एक ऐसे विरले कलाकार हैं जिन्होंने अपने पसीने और प्रतिभा से भारतीय सिनेमा को विश्व पटल पर एक नई गरिमा प्रदान की है।

Pratahkal Newsroom

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