बॉलीवुड में जब भी नैचुरल एक्टिंग, दमदार इमोशंस और बिंदास पर्सनैलिटी की बात होती है, तो सबसे पहले नाम आता है Kajol का। आज भी सोशल मीडिया पर उनकी फिल्मों के डायलॉग, एक्सप्रेशन और शाहरुख खान के साथ उनकी केमिस्ट्री वायरल होती रहती है। ओटीटी से लेकर बड़े पर्दे तक, काजोल हर दौर में खुद को नए अंदाज़ में पेश करती रही हैं। हाल ही में “दो पत्ती”, “द ट्रायल” और “मां” जैसी फिल्मों और सीरीज़ के बाद एक बार फिर उनकी चर्चा हर तरफ हो रही है। लोग आज भी उन्हें सिर्फ एक अभिनेत्री नहीं, बल्कि बॉलीवुड की इमोशनल क्वीन मानते हैं।

5 अगस्त 1974 को मुंबई में जन्मीं काजोल फिल्मी परिवार से आती हैं। उनकी मां Tanuja अपने दौर की मशहूर अभिनेत्री रहीं, जबकि पिता शोमू मुखर्जी फिल्म निर्माता थे। बचपन से ही काजोल का स्वभाव काफी शरारती और बेबाक था। स्कूल के दिनों में ही उन्होंने फिल्म “बेखुदी” से डेब्यू किया, लेकिन असली पहचान उन्हें “बाज़ीगर” और “ये दिल्लगी” से मिली। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। “दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे” ने उन्हें रातों-रात सुपरस्टार बना दिया। सिमरन के किरदार में उनकी मासूमियत और इमोशंस ने पूरी पीढ़ी को प्यार करना सिखा दिया। यही वजह है कि यह फिल्म आज भी हिंदी सिनेमा की सबसे आइकॉनिक फिल्मों में गिनी जाती है।

90 के दशक में काजोल ने लगातार ऐसी फिल्में दीं जिन्होंने बॉक्स ऑफिस और दिल दोनों जीत लिए। “कुछ कुछ होता है” में अंजलि का किरदार हो या “दुश्मन” में बदला लेने वाली लड़की, हर रोल में उन्होंने अपनी अलग छाप छोड़ी। “गुप्त” में साइको किलर बनकर उन्होंने साबित कर दिया कि वह सिर्फ रोमांटिक हीरोइन नहीं, बल्कि बेहद वर्सेटाइल अभिनेत्री हैं। उस दौर में जब अभिनेत्रियों को एक जैसी भूमिकाओं में बांध दिया जाता था, काजोल ने अपने दम पर यह सोच बदल दी। उनकी आंखों की मासूमियत और गुस्से की तीव्रता दोनों ही दर्शकों को स्क्रीन से बांधे रखते थे।

Ajay Devgn के साथ उनकी लव स्टोरी भी हमेशा सुर्खियों में रही। “गुंडाराज” के सेट पर शुरू हुई दोस्ती शादी तक पहुंची और 1999 में दोनों ने शादी कर ली। उस समय कई लोगों ने कहा कि शादी के बाद काजोल का करियर खत्म हो जाएगा, लेकिन उन्होंने इस सोच को गलत साबित कर दिया। “फना”, “माय नेम इज़ खान”, “दिलवाले” और “तानाजी” जैसी फिल्मों में उन्होंने फिर साबित किया कि शादी और मातृत्व के बाद भी अभिनेत्री सुपरस्टार रह सकती है। “माय नेम इज़ खान” में उनके अभिनय को इंटरनेशनल स्तर पर सराहा गया और उन्हें कई बड़े अवॉर्ड्स मिले। सात फिल्मफेयर अवॉर्ड जीत चुकी काजोल को भारत सरकार ने पद्मश्री से भी सम्मानित किया।

फिल्मों के अलावा काजोल सामाजिक कामों में भी काफी सक्रिय रही हैं। बच्चों की शिक्षा, महिलाओं और विधवाओं के लिए वह लगातार काम करती रही हैं। उनकी साफगोई, बेबाक अंदाज़ और कैमरे के सामने बिना दिखावे वाली पर्सनैलिटी ही उन्हें बाकी सितारों से अलग बनाती है। काजोल उन चुनिंदा अभिनेत्रियों में शामिल हैं जिन्होंने हर दौर में खुद को प्रासंगिक बनाए रखा। यही कारण है कि आज की युवा पीढ़ी भी उनकी फिल्मों के क्लिप्स शेयर करती है और 90s के फैंस आज भी उन्हें बॉलीवुड की असली क्वीन मानते हैं।

Pratahkal Newsroom

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