साल 2024 में अगर किसी अभिनेत्री की वापसी ने सबसे ज्यादा चर्चा बटोरी है, तो वह ज्योतिका हैं। अजय देवगन और आर. माधवन के साथ आई फिल्म ‘शैतान’ ने उन्हें फिर से पूरे देश की लाइमलाइट में ला दिया। 24 साल बाद हिंदी सिनेमा में उनकी वापसी सिर्फ एक कमबैक नहीं बल्कि एक बड़ा सिनेमाई मोमेंट बन गई। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर ताबड़तोड़ कमाई की और ज्योतिका का शांत लेकिन दमदार अभिनय हर किसी के बीच चर्चा का विषय बन गया। नेटफ्लिक्स की सीरीज ‘डब्बा कार्टेल’ और मलयालम फिल्म ‘काथल – द कोर’ ने भी साबित कर दिया कि आज भी स्क्रीन पर उनकी मौजूदगी अलग ही असर छोड़ती है।

मुंबई में जन्मीं ज्योतिका का असली नाम ज्योतिका सदानाह है। उनके पिता फिल्म प्रोड्यूसर थे और बहन नगमा पहले से ही इंडस्ट्री का बड़ा नाम थीं, लेकिन ज्योतिका ने अपनी पहचान खुद बनाई। मिथिबाई कॉलेज से साइकोलॉजी की पढ़ाई करने वाली ज्योतिका ने 1997 में प्रियदर्शन की हिंदी फिल्म ‘डोली सजा के रखना’ से अभिनय की शुरुआत की। हालांकि फिल्म ज्यादा नहीं चली, लेकिन उनकी स्क्रीन प्रेजेंस ने सबका ध्यान खींच लिया। असली गेम चेंजर बनी तमिल फिल्म ‘वाली’, जिसने उन्हें स्टार बना दिया। इसके बाद ‘कुशी’ ने उन्हें साउथ सिनेमा की नई सेंसेशन बना दिया और फिर पीछे मुड़कर देखने की जरूरत नहीं पड़ी।

2000 से 2007 तक ज्योतिका तमिल सिनेमा की सबसे बड़ी फीमेल सुपरस्टार बन चुकी थीं। ‘डम डम डम’, ‘पूवेल्लम उन वासम’, ‘काखा काखा’, ‘पेराझगन’, ‘चंद्रमुखी’ और ‘मोझी’ जैसी फिल्मों ने उन्हें अभिनय की पावरहाउस बना दिया। रजनीकांत के साथ ‘चंद्रमुखी’ आज भी तमिल सिनेमा की सबसे आइकॉनिक फिल्मों में गिनी जाती है। वहीं ‘मोझी’ में एक मूक-बधिर लड़की का किरदार निभाकर उन्होंने आलोचकों को भी चौंका दिया। विक्रम ने तो उन्हें “लेडी कमल हासन” तक कह दिया था। उनके नाम चार तमिलनाडु स्टेट बेस्ट एक्ट्रेस अवॉर्ड जीतने का रिकॉर्ड है, जो लंबे समय तक किसी और अभिनेत्री के पास नहीं था।

करियर के पीक पर ज्योतिका ने अभिनेता सूर्या से शादी कर ली और फिल्मों से दूरी बना ली। दोनों की लव स्टोरी भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रही। ‘पूवेल्लम केट्टुपार’ के सेट पर शुरू हुई दोस्ती प्यार में बदली और फिर शादी तक पहुंची। शादी और बच्चों के बाद ज्योतिका ने परिवार को प्राथमिकता दी, लेकिन 2015 में ‘36 वयाधिनिले’ के साथ ऐसा कमबैक किया जिसने पूरे इंडस्ट्री का नजरिया बदल दिया। इस फिल्म में उन्होंने एक साधारण गृहिणी के सपनों और संघर्ष को इतने असली अंदाज में दिखाया कि महिलाएं खुद को उनसे जोड़ने लगीं। इसके बाद ‘नाचियार’, ‘राक्षसी’, ‘कात्रिन मोझी’ और ‘पोन्मगल वंधाल’ जैसी महिला प्रधान फिल्मों ने उन्हें नई पीढ़ी की प्रेरणा बना दिया।

ज्योतिका सिर्फ एक अभिनेत्री नहीं बल्कि कंटेंट और सिनेमा की समझ रखने वाली प्रोड्यूसर भी हैं। सूर्या के साथ उनकी कंपनी 2डी एंटरटेनमेंट ने ‘सूररई पोटरु’ जैसी नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली फिल्म बनाई। समाज सेवा में भी यह जोड़ी हमेशा आगे रही है। तमिलनाडु अस्पतालों की मदद से लेकर वायनाड भूस्खलन पीड़ितों तक, ज्योतिका और सूर्या ने करोड़ों रुपये दान किए। यही वजह है कि लोग उन्हें सिर्फ स्टार नहीं बल्कि जिम्मेदार सेलिब्रिटी के तौर पर भी देखते हैं।

आज ज्योतिका उस दौर में खड़ी हैं जहां उम्र नहीं बल्कि अभिनय की ताकत मायने रखती है। साउथ से बॉलीवुड तक उनका सफर इस बात का सबूत है कि असली स्टार वही होता है जो हर दौर में खुद को नए तरीके से साबित करे। उनकी फिल्मों में ग्लैमर के साथ इमोशन, ताकत और सच्चाई का ऐसा मिश्रण दिखता है जिसने उन्हें भारतीय सिनेमा की सबसे सम्मानित अभिनेत्रियों में शामिल कर दिया है।

Pratahkal Newsroom

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