नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस से जुड़े बहुचर्चित 200 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग और जबरन वसूली मामले में देश की सर्वोच्च अदालत से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। सुप्रीम कोर्ट के माननीय न्यायाधीश जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने इस संवेदनशील मामले में अभिनेत्री की याचिका पर सुनवाई करने से खुद को अलग (Recuse) कर लिया है। कानूनी गलियारों में इस अप्रत्याशित कदम को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं, हालांकि इसके पीछे एक बेहद महत्वपूर्ण वैधानिक और नैतिक वजह सामने आई है। न्यायाधीश के इस फैसले के बाद अब यह पूरा मामला एक नई पीठ (बेंच) के समक्ष विचारार्थ प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे इस हाई-प्रोफाइल कानूनी लड़ाई में एक नया मोड़ आ गया है।

न्यायालय के भीतर हुए इस घटनाक्रम की तकनीकी पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो जैसे ही मामला सुनवाई के लिए आया, जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने स्पष्ट किया कि वह इस प्रकरण का हिस्सा नहीं बने रह सकते। उन्होंने निष्पक्षता के सर्वोच्च न्यायिक सिद्धांतों का हवाला देते हुए बताया कि इस पूरे मामले से जुड़े एक अन्य सह-मामले या पक्षकार की ओर से उनका बेटा बतौर अधिवक्ता (वकील) पैरवी कर रहा है। न्यायपालिका की मर्यादा और 'हितों के टकराव' (Conflict of Interest) की स्थिति से बचने के लिए उन्होंने स्वेच्छा से इस मामले से हटने का निर्णय लिया। भारतीय न्यायिक व्यवस्था में यह स्थापित परंपरा रही है कि यदि किसी न्यायाधीश का कोई निकट संबंधी किसी मामले से सीधे या परोक्ष रूप से जुड़ा हो, तो वे निष्पक्षता बनाए रखने के लिए स्वयं को सुनवाई से दूर कर लेते हैं।

इस कूटनीतिक और न्यायिक कदम के बाद अब जैकलीन फर्नांडिस की याचिका को देश के मुख्य न्यायाधीश के निर्देशानुसार एक अन्य पीठ के समक्ष स्थानांतरित किया जाएगा। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को आगामी 24 जून के लिए सूचीबद्ध (List) किया है। अब जून के अंतिम सप्ताह में गठित होने वाली नई बेंच यह तय करेगी कि निचली अदालत के आदेश के खिलाफ दायर की गई इस विशेष अनुमति याचिका पर शीर्ष अदालत का आगे क्या रुख होगा और क्या अभिनेत्री को कोई तात्कालिक राहत दी जा सकती है या नहीं।

याचिका के मूल कानूनी पहलुओं की बात करें तो अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस ने दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट द्वारा 30 मई को पारित किए गए एक कड़े आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उल्लेखनीय है कि ट्रायल कोर्ट (पटियाला हाउस कोर्ट) ने अपने आदेश में जैकलीन फर्नांडिस, मुख्य आरोपी सुकेश चंद्रशेखर, उसकी पत्नी लीना पॉल और 14 अन्य सह-आरोपियों के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट यानी पीएमएलए (PMLA) की गंभीर धाराओं के तहत औपचारिक रूप से आरोप तय करने का निर्देश जारी किया था। ट्रायल कोर्ट के इसी फैसले को पूरी तरह गलत बताते हुए 'वेलकम टू द जंगल' फेम एक्ट्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

अभिनेत्री के कानूनी सलाहकारों और उनकी याचिका में यह तर्क दिया गया है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा जांच के दौरान जुटाए गए उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर उनके खिलाफ आपराधिक आरोप तय किया जाना कानूनी रूप से उचित नहीं है। जैकलीन का दावा है कि उन्हें इस पूरे मामले में दुर्भावनापूर्ण तरीके से घसीटा गया है, जिसके चलते उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से पटियाला हाउस कोर्ट के आरोप तय करने वाले निर्देश को पूरी तरह से निरस्त (Quash) करने की मांग की है।

यह पूरा विवाद दिल्ली की तिहाड़ जेल से संचालित होने वाले एक बेहद शातिर 200 करोड़ रुपये के जबरन वसूली और धन शोधन रैकेट से जुड़ा हुआ है, जिसकी कमान ठग सुकेश चंद्रशेखर के हाथों में थी। केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी का आरोप है कि सुकेश चंद्रशेखर ने जेल की सलाखों के पीछे रहते हुए एक नामी कारोबारी की पत्नी को झांसे में लेकर और डरा-धमकाकर लगभग 200 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि की ठगी की थी। एजेंसी का दावा है कि इस अपराध से जो काली कमाई या 'प्रोसीड्स ऑफ क्राइम' हासिल हुआ, उसका एक बड़ा हिस्सा बॉलीवुड की नामचीन हस्तियों को महंगे उपहार देने और उन्हें लाभ पहुंचाने में इस्तेमाल किया गया।

ईडी की चार्जशीट के अनुसार, जैकलीन फर्नांडिस को सुकेश चंद्रशेखर की ओर से सीधे तौर पर करोड़ों रुपये के आलीशान और लग्जरी उपहार मिले थे। जांच एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि इन उपहारों में विदेशी ब्रांड की लग्जरी कारें, अत्यंत कीमती हीरे और जवाहरात के गहने, अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स के महंगे बैग और अन्य विलासिता की वस्तुएं शामिल थीं। इसके अलावा, ईडी ने यह वित्तीय ट्रेल भी स्थापित करने का दावा किया है कि जैकलीन के परिवार के कुछ सदस्यों, जैसे उनकी विदेशी बैंकों में खाता रखने वाली बहन और भाई को भी सुकेश द्वारा बड़ी धनराशि हस्तांतरित की गई थी। हालांकि, जैकलीन फर्नांडिस और उनकी लीगल टीम इन तमाम आरोपों को लगातार सिरे से खारिज करती आ रही है। बहरहाल, 24 जून को नई पीठ के सामने होने वाली सुनवाई इस मामले में जैकलीन के भविष्य की दिशा तय करने में सबसे महत्वपूर्ण साबित होगी।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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