बदरुद्दीन काजी से जॉनी वॉकर बनने की कहानी और गुरु दत्त के साथ उनकी ऐतिहासिक जोड़ी का विश्लेषण।

अपनी बेमिसाल कॉमिक टाइमिंग के लिए मशहूर अभिनेता जॉनी वॉकर एक फिल्म के दृश्य में मुस्कुराते हुए।
आज जब भी बॉलीवुड के सबसे आइकॉनिक कॉमेडियंस की बात होती है, तो Johnny Walker का नाम सबसे ऊपर आता है। सोशल मीडिया पर उनकी पुरानी फिल्मों के क्लिप्स फिर से वायरल हो रहे हैं और नई पीढ़ी भी उनकी टाइमिंग, मासूमियत और क्लीन कॉमेडी की फैन बनती जा रही है। एक ऐसा कलाकार जिसने करीब 300 फिल्मों में काम किया, लेकिन कभी डबल मीनिंग या फूहड़ कॉमेडी का सहारा नहीं लिया। उनका अंदाज इतना अलग था कि सिर्फ उनके नाम पर फिल्में बनने लगीं और डिस्ट्रीब्यूटर्स उनकी मौजूदगी के लिए अलग पैसे देने को तैयार रहते थे।
इंदौर में बदरुद्दीन जमालुद्दीन काज़ी के नाम से जन्मे इस कलाकार की जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं थी। घर की आर्थिक हालत खराब हुई तो परिवार मुंबई आ गया। यहां उन्होंने बेस्ट बस कंडक्टर की नौकरी की, लेकिन टिकट काटते हुए भी यात्रियों को हंसाना नहीं छोड़ा। बस स्टॉप के नाम मजेदार अंदाज में बोलना, लोगों की नकल उतारना और छोटे-छोटे कॉमिक एक्ट करना उनकी आदत बन चुका था। यही टैलेंट एक दिन उन्हें अभिनेता Balraj Sahni तक ले गया, जिन्होंने उन्हें Guru Dutt से मिलवाया। कहा जाता है कि गुरु दत्त उनके शराबी एक्ट से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने उन्हें मशहूर स्कॉच ब्रांड के नाम पर “जॉनी वॉकर” बना दिया।
इसके बाद तो जॉनी वॉकर ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। Baazi से शुरू हुआ सफर Pyaasa, C.I.D., Chori Chori, Madhumati, Naya Daur और Mere Mehboob जैसी क्लासिक फिल्मों तक पहुंचा। उनकी कॉमेडी सिर्फ हंसाने के लिए नहीं होती थी, बल्कि कहानी का अहम हिस्सा बन जाती थी। यही वजह थी कि उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर और बेस्ट कॉमेडियन जैसे बड़े अवॉर्ड भी मिले। उनकी मौजूदगी इतनी दमदार थी कि कई फिल्मों में उनके लिए खास गाने लिखे जाते थे और दर्शक सिर्फ उन्हें देखने थिएटर पहुंच जाते थे।
सबसे दिलचस्प बात यह थी कि फिल्मों में शराबी किरदार निभाकर मशहूर हुए जॉनी वॉकर ने असल जिंदगी में कभी शराब नहीं पी। वह खुद को परिवारों वाला कलाकार मानते थे और हमेशा कहते थे कि कॉमेडी ऐसी होनी चाहिए जिसे बच्चे और बड़े साथ बैठकर देख सकें। जब बॉलीवुड में कॉमेडी का ट्रेंड बदलने लगा और फूहड़पन बढ़ने लगा, तो उन्होंने धीरे-धीरे फिल्मों से दूरी बना ली। इसके बावजूद उनका प्रभाव इतना बड़ा रहा कि Mehmood Ali, Johnny Lever, Govinda और Rajpal Yadav जैसे कलाकार भी उन्हें अपनी प्रेरणा मानते हैं।
गुरु दत्त की मौत के बाद उनका करियर जरूर धीमा पड़ा, लेकिन उनकी पहचान कभी कम नहीं हुई। उन्होंने फिल्मों के अलावा कीमती पत्थरों का सफल बिजनेस भी संभाला। लंबे ब्रेक के बाद जब वह Chachi 420 में नजर आए तो दर्शकों की पुरानी यादें ताजा हो गईं। 29 जुलाई 2003 को उनका निधन हो गया, लेकिन आज भी उनकी कॉमिक टाइमिंग, डायलॉग डिलीवरी और सादगी उन्हें बॉलीवुड का अमर कलाकार बनाती है। यही वजह है कि दशकों बाद भी जॉनी वॉकर का नाम सुनते ही लोगों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है।

