आजकल अगर साउथ सिनेमा के सबसे दमदार स्क्रीन प्रेजेंस वाले कलाकारों की बात हो, तो जगपति बाबू का नाम सबसे ऊपर आता है। कभी फैमिली हीरो बनकर लोगों के दिल जीतने वाले जगपति बाबू अब ऐसे खतरनाक विलेन बन चुके हैं जिनकी आंखों का गुस्सा ही पूरी कहानी बदल देता है। Salaar: Part 1 – Ceasefire में राजामन्नार का उनका किरदार हो या Kisi Ka Bhai Kisi Ki Jaan में उनकी दमदार मौजूदगी, हर जगह उनका अलग ही स्वैग देखने को मिला। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर फैंस उन्हें “साउथ का रियल पावरहाउस” कहकर बुला रहे हैं।

12 फरवरी 1962 को आंध्र प्रदेश के मछलीपट्टनम में जन्मे जगपति बाबू फिल्मी माहौल में बड़े हुए। उनके पिता वी. बी. राजेंद्र प्रसाद तेलुगु सिनेमा के बड़े प्रोड्यूसर और डायरेक्टर थे। चेन्नई में पले-बढ़े जगपति बाबू ने 1989 में फिल्म Simha Swapnam से हीरो के तौर पर डेब्यू किया। शुरुआती दिनों में उन्हें संघर्ष भी करना पड़ा, लेकिन 1992 में आई Peddarikam ने उन्हें पहचान दिलाई। इसके बाद Gaayam ने उनकी किस्मत बदल दी। Ram Gopal Varma की इस फिल्म में उनकी एक्टिंग ने साबित कर दिया कि वह सिर्फ रोमांटिक हीरो नहीं बल्कि इंटेंस परफॉर्मर भी हैं।

90 के दशक में जगपति बाबू फैमिली ऑडियंस के सबसे पसंदीदा स्टार बन गए थे। Subhalagnam, Maavichiguru और Subhakankshalu जैसी फिल्मों ने उन्हें घर-घर पहुंचा दिया। उनकी एक्टिंग में एक सादगी थी जो सीधे दर्शकों के दिल में उतर जाती थी। यही वजह रही कि उन्होंने चार फिल्मफेयर अवॉर्ड और सात नंदी अवॉर्ड अपने नाम किए। Manoharam और Lakshyam जैसी फिल्मों में उनकी परफॉर्मेंस आज भी याद की जाती है।

लेकिन असली गेम तब बदला जब उन्होंने हीरो से विलेन बनने का रिस्क लिया। 2014 में आई Legend में उनका निगेटिव रोल इतना पावरफुल था कि लोगों ने उन्हें नए अवतार में स्वीकार कर लिया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। Lingaa में Rajinikanth के सामने खड़े होना हो, Srimanthudu में Mahesh Babu के पिता बनना हो या Nannaku Prematho में एक खतरनाक बिजनेसमैन का रोल निभाना हो, हर किरदार में उन्होंने नई जान डाल दी। Pulimurugan और Aravinda Sametha Veera Raghava में उनका नेगेटिव शेड आज भी फैंस के बीच चर्चा में रहता है।

जगपति बाबू की सबसे बड़ी ताकत उनकी वर्सेटिलिटी है। वह तेलुगु, तमिल, कन्नड़, मलयालम और हिंदी फिल्मों में बराबर दम दिखा चुके हैं। Rangasthalam में गांव के क्रूर प्रेसिडेंट का रोल हो या Goodachari में बांग्लादेशी आतंकवादी का किरदार, उन्होंने हर बार खुद को नए अंदाज में पेश किया। आज की जनरेशन उन्हें सिर्फ एक एक्टर नहीं बल्कि “किरदारों का गिरगिट” मानती है, जो हर रोल में पूरी तरह ढल जाता है। यही वजह है कि बड़े-बड़े निर्देशक जैसे Sukumar, Trivikram Srinivas और Prashanth Neel उन्हें अपनी फिल्मों का सबसे मजबूत हथियार मानते हैं।

अब हालात ऐसे हैं कि फिल्म में जगपति बाबू का नाम आते ही फैंस समझ जाते हैं कि कहानी में कुछ बड़ा होने वाला है। हीरो से विलेन तक का उनका सफर सिर्फ एक करियर ट्रांसफॉर्मेशन नहीं बल्कि साउथ सिनेमा के इतिहास की सबसे शानदार कमबैक स्टोरी में से एक माना जाता है। यही कारण है कि आज भी उनकी हर नई फिल्म रिलीज से पहले सोशल मीडिया पर जबरदस्त बज बना रहता है।

Pratahkal Newsroom

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